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रिजर्व बैंक के सहारे संभला रुपया

Last Updated- December 11, 2022 | 4:11 PM IST

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को गिरते-गिरते रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। डीलरों का कहना है कि इस गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को बाजार में आक्रामक तरीके से हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक की डॉलर की बिक्री से घरेलू मुद्रा में गिरावट थामने में मदद मिली। अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने दरों में बढ़ोतरी की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के जेरोम पॉवेल के बयान के बाद वैश्विक बाजार में मुद्राओं में गिरावट शुरू हुई और शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 80.13 पर पहुंच गया। बहरहाल रुपये को बचाने के लिए रिजर्व बैंक ने कदम बढ़ाया। इसकी वजह से अमेरिकी डॉलर  के मुकाबले दिन की समाप्ति पर रुपया 79.97 पर बंद हुआ। शुक्रवार को रुपया 79.87 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
डीलरों ने कहा कि माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक ने 80.05 से 80.10 के स्तर पर भारी मात्रा में डॉलर की बिकवाली की। अब तक 2022 में स्थानीय मुद्रा में डॉलर के मुकाबले 7 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। शुक्रवार को जैक्सन होल इकनॉमिक सिंपोजियम में पॉवेल ने कहा था कि कीमतों में स्थिरता बहाल करने के लिए कुछ समय के लिए प्रतिबंधात्मक नीतियां बरकरार रखने की जरूरत है। ऐतिहासिक आंकड़े शिथिल नीति के खिलाफ दृढ़ता से चेतावनी देते हैं। इस समय अमेरिका में महंगाई दर 8.5 प्रतिशत है, जबकि फेडरल रिजर्व ने 2 प्रतिशत का लक्ष्य रखा है। पॉवेल की प्रतिक्रिया का कारोबारियों पर कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन यह संकेत गए कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें और बढ़ेंगी।
अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व की लक्षित दर मार्च 2023 तक 4 प्रतिशत है, जबकि इस समय यह 2.25 से 2.50 प्रतिशत है। अमेरिका में ब्याज दर ज्यादा होने की वजह से वहां बॉन्ड प्रतिफल बढ़ता है और डॉलर में मजबूती आती है। इससे वैश्विक निवेशकों की भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश को लेकर रुचि कम होती है। सोमवार को यूएस डॉलर इंडेक्स 109.50 के करीब पहुंच गया। शुक्रवार को जब भारतीय बाजार बंद हुए थे, तब सूचकांक 108.20 पर था। इसके पहले रुपया 19 जुलाई को 80.06 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया था।
कोटक सिक्योरिटीज में करेंसी डेरिवेटिव्स ऐंड इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स के वीपी अनिंद्य बनर्जी ने कहा, ‘अमेरिकी डॉलर सूचकांक में तेज बढ़ोतरी के कारण यूएसडी/रुपया 10 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। बहरहाल यह बढ़ोतरी रिजर्व बैंक के आक्रामक हस्तक्षेप के कारण सीमित रही। साथ ही यूरोपियन सेंट्रल बैंक के बयान के बाद अमेरिकी डॉलर सूचकांक की भी वापसी हुई। निकट की अवधि के हिसाब से देखें तो हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 79.60 से 80.40 के बीच रहेगा।’फरवरी के अंत में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद से रिजर्व बैंक का मुद्रा भंडार तेजी से घटा है, क्योंकि वह रुपये में बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव को रोकने के लिए हस्तक्षेप कर रहा है।
25 फरवरी को मुद्रा का भंडार 631.53 अरब डॉलर था, जो 19 अगस्त को 564.05 अरब डॉलर रह गया। इस महीने की शुरुआत में रिजर्व बैंक ने कहा था कि चालू वित्त वर्ष में अनुमानित आयात की तुलना में 9.4 महीने के आयात के बराबर 573 अरब डॉलर भंडार है। जब 3 सितंबर 2021 को रिजर्व बैंक का भंडार 642.5 अरब डॉलर के अब तक के सर्वोच्च स्तर पर था तब केंद्रीय बैंक ने कहा था कि यह स्तर 15 महीने के आयात के बराबर है। बहरहाल विदेशी मुद्रा भंडार की मौजूदा स्थिति में मुद्रा के विशेषज्ञों को चिंता की कोई वजह नजर नहीं आती है।
यह स्तर अभी भी विश्व के 5 प्रमुख बैंकों के भंडार के स्तरों के स्तर पर है। एचडीएफसी बैंक में रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा, ‘हाल के दिनों में हमने पाया है कि केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और डॉलर में निवेश से इतर भंडार में मूल्यांकन के कारण विदेशी मुद्रा भंडार गिरा है। हमें नहीं लगता कि इससे रिजर्व बैंक की स्थिति कमजोर होगी। वह जरूरत पड़ने पर कई साधनों का इस्तेमाल कर सकता है।’

First Published - August 29, 2022 | 10:09 PM IST

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