अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज सुबह और भी लुढ़क गया मगर बाद में कुछ संभलकर शुक्रवार के मुकाबले मामूली चढ़कर बंद हुआ। डीलरों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बाजार में दखल दिया और बैंकों ने कंपनियों की ओर से डॉलर बेचे, जिससे रुपये की हालत सुधर गई।
अंत में रुपया आज 82.32 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में यह 82.33 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। हालांक कारोबार की शुरुआत रुपये के लिए अच्छी नहीं थी और वह 82.72 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर तक लुढ़क गया था। इससे पहले किसी एक दिन के कारोबार में रुपये का सबसे निचला स्तर 82.42 प्रति डॉलर रहा था। 2022 में रुपया अब तक 9.7 फीसदी लुढ़क चुका है।
शुरुआती कारोबार के दौरान रुपये में गिरावट की वजह अमेरिकी श्रम बाजार की अनपेक्षित मजबूती वाले आंकड़े थे। श्रम बाजार में मजबूती रही तो फेडरल रिजर्व ऊंची मुद्रास्फीति पर लगाम कसने के लिए नीतिगत दरों में बढ़ोतरी जारी रख सकता है। शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर सूचकांक उछलकर 112.80 पर पहुंच गया, जो शुक्रवार की दोपहर साढ़े तीन बजे 112.06 ही था। सीएमई फेड वॉच टूल के अनुसार फेड फंड वायदा में 78 फीसदी कारोबारी मान चुके हैं कि नवंबर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक दरें 75 आधार अंक बढ़ाएगा। फेडरल रिजर्व इस साल अभी तक नीतिगत दरों में 300 आधार अंक वृद्धि कर चुका है। इससे
डॉलर को जबरदस्त मजबूती मिली है और रुपये सहित उभरते बाजारों की सभी मुद्राओं को झटका लगा है। इस साल अभी तक अमेरिकी डॉलर सूचकांक में 18 फीसदी की बढ़त हुई है और वह 20 साल के उच्च स्तर तक पहुंच चुका है।
सुबह जब रुपया रपटना शुरू हुआ तो कारोबारी अटकल लगाने लगे कि डॉलर के मुकाबले रुपया 83 पार न चला जाए। मगर कम कारोबार के बीच रिजर्व बैंक की डॉलर बिक्री ने रुपये को संभाल लिया। कोलंबस दिवस के कारण आज अमेरिकी बाजार बंद थे, जिससे खरीद-फरोख्त कम रही। भारत में निवेश करने की संभावनाएं तलाश रही कंपनियों के निवेश से भी रुपये को बल मिला।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के अनुसंधान विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप और कंपनियों के निवेश से रुपये में शुरुआती गिरावट को थामने में मदद मिली। घरेलू शेयर बाजार में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी आज के सत्र के दौरान रुपये को बल मिला।’
विश्लेषकों के अनुसार आरबीआई नियमित आधार पर डॉलर बेचकर दखल दे रहा है और रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव को थामने की कोशिश कर रहा है। लेकिन डीलरों का कहना है कि केंद्रीय बैंक को किसी भी स्तर पर रुपये का मजबूत बचाव करते नहीं देखा गया है। जुलाई के मध्य में जब रुपया 80 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार गया था तो माना जा रहा था कि वहां से रुपये को मजबूत सहारा देने के लिए आरबीआई ने ठोस कदम उठाए।
आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्रीय बैंक ने जुलाई में हाजिर बाजार में 19.1 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की, जबकि उससे एक महीना पहले उसने महज 3.7 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की थी। जुलाई से सितंबर के दरम्यान रुपये का प्रदर्शन उभरते बाजार की 11 मुद्राओं के मुकाबले काफी अच्छा था।
इस दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 2.9 फीसदी की गिरावट आई थी। मगर चालू तिमाही में अभी तक डॉलर के मुकाबले रुपया उभरते बाजार की 14 मुद्राओं से ज्यादा गिर चुका है। इस दौरान केवल रूसी मुद्रा रूबल में अधिक गिरावट रही। अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में रुपया 1.2 फीसदी लुढ़क चुका है।