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ब्याज दरों में इजाफे की आशंका के बीच रुपये में स्थिरता

Last Updated- December 11, 2022 | 3:23 PM IST

 अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा गुरुवार को की जाने वाली मौद्रिक नीतिगत घो​षणा से पहले रुपया सतर्कता के साथ आगे बढ़ने को तैयार है, क्योंकि कुछ बुनियादी कारों से इस मुद्रा को समर्थन मिला है, भले ही डॉलर में मजबूती ने स्थानीय मुद्रा पर विश्लेषक इसे लेकर अस्पष्ट नजरिया अपना रहे हैं।
यह कयास लगाया जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस सप्ताह फिर से ब्याज दरों में न्यूनतम 75 आधार अंक तक का इजाफा करेगा, हालांकि फेड फंडों के करीब 30 प्रतिशत कारोबारी 100 आधार अंक वृद्धि का अनुमान जता रहे हैं। ​अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों की संभावना से डॉलर सूचकांक में तेजी आई है। जुलाई-सितंबर में अब तक, अमेरिकी डॉलर सूचकांक 5 प्रतिशत मजबूत हुआ है, जिसके साथ ही यह 20 वर्ष के नए ऊंचे स्तर पर पहुंचा है। हालांकि रुपया इस अव​धि में डॉलर के मुकाबले सिर्फ 1 प्रतिशत गिरा, जो 10 उभरते बाजारों की मुद्राओं के मुकाबले उसका बेहतर प्रदर्शन है।
रुपये को न सिर्फ आरबीआई की सुरक्षा हासिल हुई है जिसने पिछले कुछ महीनों के दौरान तेजी से डॉलर की बिकवाली की ब​ल्कि उसे जुलाई के अंत से वै​श्विक निवेश प्रवाह में बहाली का भी लाभ मिला है। अगस्त से इ​क्विटी बाजारों में 7.5 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह आक​र्षित होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से रुपये के लिए हालात बेहतर नजर आ रहे हैं। 
ऐ​क्सिस बैंक के ट्रेजरी प्रमुख नीरज गंभीर ने कहा, ‘यूरो, जेपीवाई और सीएनवाई जैसी प्रमुख मुद्राओं के ​खिलाफ भी अमेरिकी डॉलर की ताकत बढ़ी है। धारणा के नजरिये से हालात खराब हुए हैं, लेकिन प्रवाह के लिहाज से मेरा मानना है कि हालात में सुधार आया है, क्योंकि तेल कीमतों में कमी आई है और पूंजी प्रवाह फिर से सामान्य हुआ है।’
मुद्रा बाजार में आरबीआई के लगातार हस्तक्षेप की उम्मीद करने वाले गंभीर को अल्पाव​धि में रुपये का प्रदर्शन मौजूदा स्तरों के आसपास बने रहने का अनुमान है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 79.77 पर बंद हुआ।
एचडीएफसी बैंक में कोषाध्यक्ष आशीष पार्थसारथि ने कहा कि विचार करने का मुख्य बिंदु यह है कि मंदी की आशंका में दरें घटाने के लिए बाध्य होने के फेड के पिछले नजरिये में अब बदलाव आ रहा है। उन्होंने रुपये की चाल को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ‘अमेरिकी फेड को लंबा रास्ता तय करना है, डॉलर बेहद मजबूत है। समान समय में, भारत सर्वा​धिक वृद्धि वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।’  
 

First Published - September 19, 2022 | 10:16 PM IST

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