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लुढ़ककर और नीचे चला गया रुपया

Last Updated- December 11, 2022 | 5:37 PM IST

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज नए निचले स्तर पर बंद हुआ। डीलरों का कहना है कि डॉलर 20 साल के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसकी वजह से उभरते बाजार की मुद्राएं लुढ़की हैं।
डॉलर के मुकाबले रुपया आज 79.60 पर बंद हुआ, जो इससे पहले  79.44 पर बंद हुआ था। दिन के कारोबार में घरेलू मुद्रा एक डॉलर के मुकाबले 79.66 रुपये के नए निचले स्तर पर पहुंच गई। सोमवार को बंदी का स्तर भी रुपये के लिए रिकॉर्ड निचला स्तर था, जिसकी कीमत में 2022 में अब तक डॉलर के मुकाबले 6.6 प्रतिशत की गिरावट आई है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिकी डॉलर सूचकांक बढ़कर मंगलवार को 108.56 पर पहुंच गया, जो 8 अगस्त, 2022 के बात का सर्वोच्च स्तर है। 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की स्थिति दिखाने वाला सूचकांक इसके पहले की बंदी पर 108.02 पर था।
एचडीएफसी बैंक के ट्रेजरी एडवाइजरी ग्रुप के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट भास्कर पांडा ने कहा, ‘वैश्विक वजहों से आज डॉलर के मुकाबले रुपया नए निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर सूचकांक 2 दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गया। यूरो इस समय डॉलर की बराबरी करने की कगार पर है। साथ ही तेल के वैश्विक दाम भी उच्च स्तर पर हैं।’
उन्होंने कहा कि डॉलर और रुपये की चाल समझ में आती है और अगर डॉलर में मजबूती जारी रहती है तो रुपये में और गिरावट आ सकती है। सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स ने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 79.50 रुपये का अहम स्तर टूट चुका है, अब रुपया निकट अवधि के हिसाब से 1 डॉलर के मुकाबले 80 रुपये के स्तर पर पहुंचने की ओर है।
डॉलर सूचकांक में तेज बढ़ोतरी की मुख्य वजह अमेरिकी मुद्रा सुरक्षित होने की वजह से उसकी तरफ वैश्विक दौड़ है, क्योंकि पूरी दुनिया में मंदी का डर है। इस तरह के डर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व से बल मिला है, जिसने महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दर में तेज बढ़ोतरी की है। साथ ही यूरोप में ऊर्जा का संकट गहरा रहा है।
भारत की स्थिति देखें तो डॉलर की मजबूती ने चालू खाते के घाटे की स्थिति खराब की है क्योंकि देश कच्चे तेल का अहम आयातक है। इसकी खरीद अमेरिकी डॉलर में होती है। फरवरी में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव हुआ है और यह मार्च में 140 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
उसके बाद से कच्चे तेल की कीमत कम हुई है और ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल पर था। मौजूदा स्तर से भी भारत के आयात बिल और महंगाई दर पर उल्लेखनीय दबाव पड़ रहा है।
अमेरिका में ज्यादा मुनाफे को देखते हुए भारत के वित्तीय बाजारों से विदेशी निवेश बड़ी मात्रा में बाहर निकलने से वित्तपोषण और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंता और गहरा गई है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 30.23 अरब डॉलर की भारतीय संपत्तियों की बिक्री की है। एनएसडीएल के आंकड़ों से पता चलता है कि यह 2008 में की गई कुल बिकवाली के तीन गुने से भी ज्यादा है, जब वैश्विक आर्थिक संकट आया था।
घरेलू इक्विटी में तेज गिरावट ने भी रुपये की गिरावट में अहम भूमिका निभाई है। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी मंगलवार को 1 प्रतिशत के करीब गिरकर बंद हुए। डीलरों ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये का स्तर 79.62 से 79.63 होने पर रिजर्व बैंक डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।

First Published - July 12, 2022 | 11:36 PM IST

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