भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि एचडीएफसी बैंक के बोर्ड की बैठक की कार्यवाही के विवरण की जांच की जाएगी। यह कदम गैर-कार्यकारी अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद उठाया जा रहा है।
पांडेय से जब यह पूछा गया कि क्या बाजार नियामक इस मुद्दे की जांच करेगा इस पर उन्होंने कहा, ‘नियामक यह देखेगा कि बैंक का प्रशासन कैसा है और बोर्ड की बैठकों में क्या चर्चा हुई थी।’ साथ ही, उन्होंने स्वतंत्र निदेशकों को बिना ठोस सबूत के बयान देने से बचने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी चिंता को प्रमाण के साथ दर्ज करना जरूरी है।
चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में ‘नैतिकता और मूल्यों’ का हवाला देते हुए कुछ चिंताओं का जिक्र किया था। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बाद में कहा कि इसने अपनी नियमित जांच में बैंक में कोई बड़ा प्रशासनिक मुद्दा नहीं पाया है।
इस घटनाक्रम के बाद एचडीएफसी बैंक शेयरों में करीब 12 फीसदी की गिरावट आई, जिससे कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई।
नियामकीय ढांचे का हवाला देते हुए पांडेय ने कहा कि स्वतंत्र निदेशकों को बयान देते समय संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘बिना ठोस सबूत और सही रिकॉर्ड के किसी भी तरह के आरोप या संकेत नहीं देने चाहिए क्योंकि ऐसे बयान छोटे निवेशकों के हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।’
उन्होंने बताया कि सूचीबद्धता दायित्व एवं प्रकटीकरण आवश्यकताएं (एलओडीआर) नियमन के अनुसार, स्वतंत्र निदेशकों की जिम्मेदारी है कि वे कंपनी के कामकाज या किसी फैसले को लेकर अपनी चिंताओं को बोर्ड के सामने रखें और उनका समाधान सुनिश्चित करें।
अगर उनकी चिंता का समाधान नहीं होता है, तो उसे आधिकारिक रूप से बोर्ड बैठक के कार्यविवरण में दर्ज कराना जरूरी है। पांडेय ने यह भी कहा कि स्वतंत्र निदेशकों की कंपनी के प्रशासन में अहम भूमिका है और उनकी जिम्मेदारी है कि जहां जरूरी हो वहां वे प्रबंधन से सवाल करें और छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा करें।