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SEBI ला रहा है नया Central KYC सिस्टम, अब हर बार केवाईसी कराने की झंझट खत्म

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पांडे ने पीटीआई को दिए बयान में कहा, “हां, इस पर काम आगे बढ़ेगा। हम ऐसा सिस्टम बनाना चाहते हैं जो बहुत ही असरदार हो।”

Last Updated- May 04, 2025 | 4:57 PM IST
SEBI
Representative Image

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) एक केंद्रीकृत केवाईसी (Know Your Customer) सिस्टम बनाने की दिशा में वित्त मंत्रालय और अन्य वित्तीय नियामकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे (Tuhin Kanta Pandey) ने यह जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि यह केंद्रीय केवाईसी एक ऑनलाइन डाटाबेस होगा, जिसमें ग्राहकों की केवाईसी जानकारी एक ही जगह सुरक्षित रहेगी। इससे अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में केवाईसी प्रक्रिया को दोहराने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरी व्यवस्था ज्यादा सरल और प्रभावी हो सकेगी।

पांडे ने पीटीआई को दिए बयान में कहा, “हां, इस पर काम आगे बढ़ेगा। हम ऐसा सिस्टम बनाना चाहते हैं जो बहुत ही असरदार हो।” उन्होंने बताया कि इस पहल को लेकर बनी समिति की अध्यक्षता वित्त सचिव कर रहे हैं और प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की कोशिश हो रही है।

हालांकि उन्होंने कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई, लेकिन उम्मीद जताई कि इसे जल्दी लागू कर लिया जाएगा। पांडे ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल एक अपलोडिंग सिस्टम नहीं होगा, बल्कि पूरी तरह से प्रमाणित और सुरक्षित व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल छह केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियां (KRA) आपस में जुड़ी हुई हैं और डेटा आसानी से साझा किया जा सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि 2025 में एक नया और उन्नत केंद्रीय केवाईसी रजिस्ट्रेशन सिस्टम लॉन्च किया जाएगा। इसके बाद अप्रैल में वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें मौजूदा केवाईसी प्रणाली को बेहतर बनाने और वित्तीय सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।

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इसके साथ ही पांडे ने टी+0 (T+0) ट्रेड सेटलमेंट को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “टी+0 व्यवस्था वैकल्पिक ही रहेगी। इसे अनिवार्य नहीं किया गया है।” इससे बाजार सहभागियों को नई व्यवस्था को अपनाने में सहजता रहेगी।

तकनीक को लेकर उन्होंने बताया कि सेबी अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग नियामकीय कार्यों में कर रहा है। इसका इस्तेमाल आईपीओ दस्तावेजों की जांच और निगरानी के लिए किया जा रहा है, और भविष्य में इसे सुपरवाइजरी टेक्नोलॉजी (sup-tech) जैसे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तारित किया जाएगा।

पांडे ने बताया कि सेबी की एआई आधारित निगरानी प्रणाली लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखती है और अनधिकृत निवेश सलाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती है। सोशल मीडिया कंपनियों के सहयोग से अब तक 70,000 से ज्यादा फर्जी निवेश खातों और भ्रामक पोस्ट्स को हटाया जा चुका है।

हालांकि उन्होंने एआई से जुड़ी चुनौतियों पर भी चिंता जताई। खासकर एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग और मशीनों के जरिए ट्रेडिंग सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर उन्होंने चेताया। पांडे ने कहा, “एआई के दोनों पहलू हैं – फायदे और जोखिम। इसलिए जिम्मेदार एआई विकास और उसका विवेकपूर्ण इस्तेमाल जरूरी है।”

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First Published - May 4, 2025 | 4:57 PM IST

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