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एमएफ उद्योग पर सेबी की सख्ती

Last Updated- December 11, 2022 | 2:10 PM IST

 म्युचुअल फंड उद्योग में पूलिंग से जुड़े नियमों के क्रियान्वयन में देरी ने बाजार नियामक सेबी को 39 लाख करोड़ रुपये वाले देसी म्युचुअल फंड उद्योग पर सख्ती बरतने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि एमएफ यूनिट्स की खरीद के लिए दो तरीके से प्रमाणीकरण की व्यवस्था समय से लागू हो, सेबी ने एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) को इससे जुड़ी समय-सारणी और प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
बाजार पर नजर रखने वालों ने कहा कि इस तरह के कदम पुरानी व्यवस्था से बाहर निकलने के लिए होते हैं। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, नियामक सिर्फ क्रियान्वयन की समयसीमा तय करता है, लेकिन शायद ही इस पर अद्यतन जानकारी मांगता है।
फंड उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, फंडों की पूलिंग को जारी न रखने से जुड़े ढांचे और निवेश निकासी (रीडम्पशन) की खातिर दो तरीके से प्रमाणीकरण का ढांचा लागू करने में नाकामी से नियामक नाराज है। उद्योग को इस संबंध में समयसीमा का विस्तार मिलने के बावजूद ऐसा हुआ।
सेबी ने पिछले हफ्ते एक परिपत्र में कहा, अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एम्फी को 14 अक्टूबर तक क्रियान्वयन से जुड़ी समयसारणी बतानी है। साथ ही इस परिपत्र के प्रावधानों के क्रियान्वयन पर प्रगति रिपोर्ट भी सेबी को दो महीने में एक बार भेजनी है, जो 1 दिसंबर से शुरू होगी।
एमएफ यूनिट की खरीद की खातिर दो तरीके से प्रमाणीकरण की व्यवस्था का दूसरा चरण 1 अप्रैल, 2023 से प्रभावी हो जाएगा। पहले चरण में एमएफ यूनिट्स की निवेश निकासी को लेकर दो तरीके से प्रमाणीकरण की व्यवस्था 1 जुलाई से गैर-एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के लेनदेन के लिए शुरू हुई थी।
परिचालन को लेकर ये नए बदलाव थर्ड पार्टी पेमेंट को रेकने और यूनिटधारकों के हितों को सुरक्षित करने के लिए लागू किए गए हैं।
पूलिंग और दो तरीके से प्रमाणीकरण की व्यवस्था अप्रैल 2022 में प्रभावी होनी थी, लेकिन एम्फी की मांग पर इसे जुलाई 2022 कर दिया गया। यह विस्तार इस शर्त पर मिला  था कि फंड हाउस अप्रैल से जून के बीच कोई योजना पेश नहीं करेंगे। हालांकि उम्मीद के मुताबिक क्रियान्वयन नहीं हो पाया जबकि उन्हें विस्तारित समय मिला था।
म्युचुअल फंड से जुड़ा एक अहम प्लेटफॉर्म बीएसई स्टार एमएफ तकनीकी खामियों का शिकार हो गया, जिसके कारण कई लेनदेन नाकाम हो गए। प्लेटफॉर्म ने कहा कि ये समस्याएं पेमेंट एग्रीगेटर की तरफ से निवेशकों की गलत सूचना के कारण पैदा हुई।इस बारे में टिप्पणी के लिए सेबी और एम्फी को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

First Published - October 4, 2022 | 10:34 PM IST

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