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BSE सेंसेक्स, NSE निफ्टी बढ़त के साथ नई ऊंचाई पर बंद; बाजारों में लगातार तेजी पर एनालिस्ट्स ने दी राय

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पिछले कुछ वर्षो में डॉलर में इनका राजस्व एक अंक में रहा है। विदेशी निवेशकों ने 1,735 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे जबकि देसी संस्थान 356 करोड़ रुपये के खरीदार रहे।

Last Updated- September 02, 2024 | 9:47 PM IST
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देसी शेयर बाजारों का रिकॉर्ड तोड़ अभियान जारी है। अमेरिका में ब्याज कटौती की बढ़ती उम्मीदों ने खरीदारी का माहौल बनाए रखा जिससे सोमवार को बाजारों में 13वें दिन बढ़ोतरी दर्ज हुई। बेंचमार्क निफ्टी-50 लगातार 13वें दिन बढ़त के साथ बंद हुआ। इस अवधि में निफ्टी करीब 5 फीसदी चढ़ा है। पहले यह सूचकांक अधिकतम 11 कारोबारी सत्रों में ही चढ़ा था।

25,334 के ऊंचे स्तर को छूने के बाद 50 शेयरों वाला ब्लूचिप इंडेक्स 43 अंकों की बढ़त के साथ 25,279 पर बंद हुआ। सेंसेक्स ने 194 अंकों के इजाफे के साथ 82,560 पर कारोबार की समाप्ति की। दोनों ही सूचकांकों ने इंट्राडे और बंद आधार पर नई ऊंचाई को छुआ। इसकी अगुआई उपभोक्ता और सॉफ्टवेयर शेयरों ने की। बीएसई में सूचीबद्ध फर्मों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण 45,000 करोड़ रुपये बढ़कर 464.9 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

इन्फोसिस और आईटीसी ने बढ़त को गति दी। अच्छे मॉनसून के बाद ग्रामीण मांग में सुधार की उम्मीद से आईटीसी के शेयरों में बढ़त को मदद मिली। इन्फोसिस समेत आईटी शेयर इसलिए चढ़े क्योंकि उनके राजस्व का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है। हालांकि कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि आईटी शेयरों में तेजी तार्किक नहीं है। इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी. चोक्कालिंगम ने कहा कि आईटी शेयरों में बढ़त अब इनकी मांग बढ़ने से हो रही है।

पिछले कुछ वर्षो में डॉलर में इनका राजस्व एक अंक में रहा है। विदेशी निवेशकों ने 1,735 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे जबकि देसी संस्थान 356 करोड़ रुपये के खरीदार रहे।

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार ट्रेडर मानकर चल रहे हैं कि अमेरिकी दरों में कटौती का चक्र सितंबर में शुरू होगा और कुछ तो 50 आधार अंकों की कटौती मानकर चल रहे हैं। हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि अगर फेड दरें घटाता है तो भी इक्विटी की तेजी खत्म हो जाएगी। जेपी मॉर्गन चेज ऐंड कंपनी ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती वृद्धि में नरमी के जवाब में होगी।

विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी खतरे से बाहर नहीं है और भूराजनीतिक और राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके अतिरिक्त सितंबर का महीना ऐतिहासिक तौर पर अमेरिकी इक्विटी के लिए खराब रहा है। कई दौर के प्रोत्साहन के बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार न होने का असर भी निवेशकों की मनोदशा पर है। अमेरिकी चुनाव के अलावा बेरोजगारी के शुरुआती आंकड़े, गैर-कृषि रोजगार के आंकड़े और दुनिया भर के अन्य आर्थिक आंकड़े बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे।

जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि भारतीय बाजार मजबूती से टिके हैं और थोड़ी सकारात्मकता के साथ नई ऊंचाई की ओर हैं। सकारात्मक रुझान मोटे तौर पर बना हुआ है क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि अभी तक अच्छी है। पीएमआई लंबी अवधि के औसत से काफी ऊपर है जिससे आगामी तिमाहियों में आय में बढ़ोतरी का संकेत मिल रहा है। हालांकि पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि में नरमी से उतार-चढ़ाव बढ़ा है और ऐसा ही रुझान कंपनियों की आय के मामले में भी देखा गया है। अगस्त में भारतीय पीएमआई जुलाई के आंकड़ों से मामूली नीचे रहा जिससे भी सतर्कता का पता चलता है।

बाजार में चढ़ने और गिरने वाले शेयरों का अनुपात नकारात्मक रहा और 2,262 शेयर गिरे जबकि 1,776 में बढ़ोतरी हुई। सेंसेक्स के दो तिहाई शेयर चढ़े। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए। बजाज फिनसर्व व बजाज फाइनैंस निफ्टी के शेयरों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों में रहे।

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First Published - September 2, 2024 | 9:47 PM IST

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