मई में शेयरों के नकद कारोबार में ट्रेडिंग गतिविधियां 22 महीने के उच्चस्तर पर पहुंच गईं जबकि डेरिवेटिव वॉल्यूम में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। इससे निवेशकों की भागीदारी में अंतर साफ नजर आता है। बाजार के प्रतिभागियों का मानना है कि कैश मार्केट गतिविधियों में यह बढ़ोतरी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगातार मजबूती के कारण हुई है जबकि नियामकीय पाबंदियों और बाजार के अनिश्चित हालात के बीच डेरिवेटिव ट्रेडिंग सुस्त रही।
एनएसई और बीएसई में कैश सेगमेंट में रोजाना का औसत कारोबार (एडीटीवी) मई में मासिक आधार पर 5.7 फीसदी बढ़कर 1.52 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह जून 2024 के बाद सबसे ज्यादा है। इसके उलट, फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफऐंडओ) सेगमेंट में रोजाना का औसत टर्नओवर काफी हद तक स्थिर रहा और यह 485.9 लाख करोड़ रुपये रहा, जो जून 2024 के 165 लाख करोड़ रुपये के सर्वोच्च स्तर से 8 फीसदी कम है। मई में, निफ्टी 50 में 1.9 फीसदी की गिरावट आई जबकि निफ्टी मिडकैप 100 में 3.2 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.7 फीसदी की बढ़त हुई।
बाजार के एक जानकार ने कहा, कैश वॉल्यूम में बढ़ोतरी से पता चलता है कि बेंचमार्क इंडेक्स के एकीकृत होने के बावजूद निवेशकों ने बाजार के चुनिंदा शेयरों में पैसा लगाना जारी रखा। डेरिवेटिव टर्नओवर में वृद्धि की नरमी हाल ही में लागू ऊंचे सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) और पिछले एक साल में किए गए कई नियामकीय उपायों के मिले-जुले असर को दिखाती है। इन उपायों में अनुबंध का बड़ा आकार, मार्जिन के सख्त नियम और एक-एक्सचेंज – एक साप्ताहिक एक्सपायरी की व्यवस्था का शामिल है।