एनएसई के मुख्य प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कंपनियों का कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) पर खर्च वित्त वर्ष 25 में सालाना आधार पर 23 फीसदी बढ़कर 22,212 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह खर्च एक साल पहले 18,011 करोड़ रुपये रहा था। प्राइम डेटाबेस ग्रुप की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली।
यह बढ़ोतरी कंपनियों के मुनाफे में हुई तेज वृद्धि के साथ-साथ हुई। प्राइम डेटाबेस ग्रुप के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में औसत शुद्ध मुनाफा 22 फीसदी बढ़ा है। उन्होंने कहा, ऐसा इन कंपनियों के औसत शुद्ध मुनाफ़े (पिछले 3 सालों का) में ई 22 फीसदी की ज़बरदस्त बढ़ोतरी की वजह से हुआ, जिसका 2 फीसदी हिस्सा नियामकीय ज़रूरतों के मुताबिक सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना जरूरी है।
भारत का सीएसआर ढांचा अप्रैल 2014 से लागू है। इसके तहत पात्र कंपनियों के लिए अनिवार्य है कि वे अपने पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का दो फीसदी सामाजिक पहलों पर खर्च करें।
31 मार्च, 2025 तक एनएसई के मुख्य प्लेटफॉर्म पर 2,142 कंपनियां सूचीबद्ध थीं। 2,081 फर्मों की सालाना रिपोर्ट उपलब्ध थीं, जिनमें से 2,066 ने सीएसआर आंकड़ों का खुलासा किया। इनमें से 1,549 कंपनियों के लिए सीएसआर पर खर्च करना ज़रूरी था। एक साल पहले यह संख्या 1,399 थी।
उनका कुल औसत शुद्ध लाभ 9.64 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 11.76 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसका मतलब है कि वित्त वर्ष 25 के लिए अनिवार्य सीएसआर खर्च 22,732 करोड़ रुपये होना चाहिए। असल खर्च 22,212 करोड़ रुपये रहा। हल्दिया ने इस अंतर की वजह उन बचे हुए फंडों को बताया, जिन्हें तय खातों में हस्तांतरित कर दिया गया था।