facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

यूएस फेड की आंधी में निवेशकों के ₹4 लाख करोड़ डूबे, बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजहें

Advertisement

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से लगातार तीसरी बार इंटरेस्ट रेट में कटौती के बाद अमेरिका और एशियाई बाजारों की तरह भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई।

Last Updated- December 19, 2024 | 4:10 PM IST
Stock Market Down

Indian Stock Market: यूएस फेड के फैसले के बाद दुनियाभर के बाजारों में भूचाल देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार में भी इससे अछूते नहीं रहे। घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार (19 दिसंबर) को चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। इंट्राडे में बेंचमार्क इंडेक्स 1.44 फीसदी से ज्यादा टूट गया। सेंसेक्स 1,162 अंक टूटकर 79,020 और निफ्टी 50 328 अंक फिसलकर 23,870 पर दिन का निचला स्तर दिखाया। बिकवाली की इस आंधी में निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से लगातार तीसरी बार इंटरेस्ट रेट में कटौती के बावजूद अमेरिका, एशियाई और भारतीय बाजारों में क्यों इतनी बड़ी गिरावट आई? आइए समझतें हैं कि फ्लैश क्रैश की 4 बड़ी वजहें…

शेयर बाजार में 19 दिसंबर को गिरावट की वजह

1. यूएस फेड के इंटरेस्ट रेट में कटौती के फैसले के बाद भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई है। फेडरल रिजर्व ने 2024 में तीसरी बार ब्याज दरों में कटौती की है। फेडरल रिजर्व की कटौती के इस फैसले ने फाइनेंशियल बाजारों में अनिश्चितता की लहर पैदा कर दी है।

2. प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापने वाला डॉलर इंडेक्स दो साल के हाई लेवल पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपये के निचले स्तर पर पहुंचने की वजह से निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर पड़ा है।

3. इंडेक्स में हैवी वेटेज रखने वाले एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भारी गिरावट ने भी बाजार को नीचे खींचा।

4. विदेशी निवेशकों के घरेलू शेयर बाजारों से पैसा निकालने की वजह से भी स्टॉक मार्केट में गिरावट आई है। एफआईआई (FIIs) ने 18 दिसंबर को 1,316.81 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

मास्टर कैपिटल सर्विसेज के डायरेक्टर पलका अरोड़ा चोपड़ा ने कहा कि फेडरल रिजर्व के फैसले ने दुनिया भर के फाइनेंशियल बाजारों में अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है।

उन्होंने कहा, ”लंबे समय तक हाई इंटरेस्ट रेट और इकनॉमिक ग्रोथ पर इसके प्रभाव की संभावना से घबराए निवेशकों ने तेज बिकवाली के साथ रिस्पांस दिया है। प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापने वाला डॉलर इंडेक्स दो साल के हाई लेवल पर पहुंच गया। यह फेड के रुख पर बाजार की प्रतिक्रिया को दर्शाता है।”

निवेशकों को 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान

यूएस फेडरल रिजर्व की आंधी से निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 415,592 करोड़ रुपये घटकर 4,49,84,172 करोड़ रुपये पर आ गया। 18 दिसंबर को यह 45,399,764 करोड़ रुपये था।

फेड से आये इस संकेत से बाजार में आया भूचाल

फेड ने बुधवार को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बीपीएस की कटौती करके 4.25 प्रतिशत-4.5 प्रतिशत की टारगेट सीमा कर दी। फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि भविष्य में इंटरेस्ट रेट में कटौती कम बार हो सकती है। सेंट्रल बैंक 2025 में केवल दो और बार ब्याज दरों में कटौती का संकेत दिया है। हालांकि, पहले फेड रिजर्व ने 2025 में 4 बार कटौती करने का संकेत दिया था। इन संकेतों से बाजार का मूड खराब हो गया।

इस बीच, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी में बिकवाली जारी रखी है। एफआईआई ने 18 दिसंबर को 1,316.81 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। बाजार के जानकारों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स 108 से ऊपर चला गया है और 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.52 फीसदी तक बढ़ गई है।

इसके अलावा एनालिस्ट्स का मानना ​​है कि हाई वैल्यूएशन वाले बाजार भयभीत हो रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वास्तविकता उनकी उम्मीदों से अलग साबित हो रही है। साथ ही यूएस फेड का 2025 में कम दर में कटौती का संकेत एक ऐसा उदाहरण है जिसने बाजार की उम्मीदों को झटका दिया है।

 

Advertisement
First Published - December 19, 2024 | 3:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement