भू-राजनीतिक झटकों के कारण पहले भी घरेलू शेयर बाजारों में तेज लेकिन अपेक्षाकृत सीमित गिरावट आई है। इलारा कैपिटल के एक विश्लेषण से पता चला है कि पिछले 25 वर्षों में सात बड़े संघर्षों के दौरान लड़ाई शुरू होने के समय से निफ्टी में गिरावट आम तौर पर एक अंक में रही है।
2003 के बाद से प्रमुख वैश्विक घटनाओं के दौरान, जिनमें लेबनान युद्ध, रूस-यूक्रेन लड़ाई और इजरायल-हमास संघर्ष शामिल हैं, में औसत गिरावट लगभग 7 प्रतिशत रही है। इराक युद्ध जैसी अधिक तीखी लड़ाई के दौरान भी सूचकांक में अपने चरम से 10 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसके बाद तेजी से सुधार हुआ। ऐतिहासिक रूप से, सूचकांकों की वापसी की समय-सीमा भी अपेक्षाकृत कम रही है, जिसमें औसतन लगभग 15 दिन लगे हैं। लेकिन वर्तमान अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष इस पैटर्न को चुनौती देता दिख रहा है।
निफ्टी पहले ही 10 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है, जो पिछले भू-राजनीतिक संकटों के दौरान देखी गई गिरावट की ऊपरी सीमा को पार कर गया है। विश्लेषकों का सुझाव है कि इस बार बाजार ज्यादा लंबा चलने वाले या प्रणालीगत जोखिम को भी शामिल कर रहा है। इसका कारण संघर्ष का फैलना, वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसका प्रभाव और आपूर्ति व्यवधानों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। ऊंचे मूल्यांकन और आय वृद्धि की चिंताओं ने भी गिरावट बढ़ाई है।
इलारा का कहना है कि अगर ऐतिहासिक रुझान बरकरार रहते हैं, तो मौजूदा स्तर से गिरावट सीमित रह सकती है। रणनीतिकार गरिमा कपूर और सहर्ष कुमार ने कहा, ‘जैसे ही हालात सामान्य होने के शुरुआती संकेत सामने आएंगे, बाजार तेजी से रिकवरी करेंगे।’