फोटो: एआई जेनरेटेड
घरेलू सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों (आईटी) के शेयरों में आज चार महीने की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट देखी गई। इससे एक दिन पहले ही आईटी सूचकांक में एक साल से भी लंबे समय की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई थी।
निफ्टी आईटी सूचकांक में 5.6 फीसदी गिरावट आई जो 4 फरवरी, 2026 के बाद एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट है। प्रमुख आईटी फर्मों के शेयरों में गिरावट से इस सूचकांक का बाजार पूंजीकरण करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये घट गया।
देश की सबसे बड़ी आईटी निर्यातक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयर में 8.3 फीसदी की गिरावट देखी गई जो 13 मार्च, 2020 के बाद एक दिन में सबसे तेज गिरावट है। कंपनी का शेयर 2,242 रुपये के भाव पर बंद हुआ तो 28 अगस्त, 2020 के बाद से निचला बंद स्तर है।
इस गिरावट ने पिछले तीन सत्रों में हुई ज्यादातर बढ़त को खत्म कर दिया। बीते तीन सत्र में निफ्टी आईटी सूचकांक में 7.6 फीसदी की तेजी आई थी। यह तेजी इस उम्मीद पर आधारित थी कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) पर उद्यमों का खर्च बढ़ने से सॉफ्टवेयर सेवा कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि अमेरिका में तकनीकी शेयरों में आई गिरावट के बाद निवेशकों का रुख सतर्क हो गया। निफ्टी आईटी सूचकांक 2026 में अब तक 22.4 फीसदी टूट चुका है। आईटी क्षेत्र को इस बात की चिंता है कि एआई आधारित उत्पादकता में बढ़ोतरी से पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं की मांग कम हो सकती है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने कहा कि आईटी क्षेत्र को लेकर उसका नजरिया धीरे-धीरे नकारात्मक हो गया है और उन्होंने चेतावनी दी कि अगले कुछ वर्षों में एआई की वजह से राजस्व में गिरावट का जोखिम और बढ़ सकता है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के कवलजीत सलूजा की अगुआई वाले विश्लेषकों ने एक नोट में कहा, ‘हमें उम्मीद है कि आधुनिकीकरण जैसे नए अवसर बढ़ेंगे लेकिन वे पारंपरिक आईटी की मांग में कमी की भरपाई के लिए काफी नहीं होंगे।’
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लार्ज कैप आईटी शेयरों में धन सृजन का दौर अब काफी हद तक पीछे छूट चुका है। हालांकि यह क्षेत्र अभी भी रणनीतिक ट्रेडिंग के अवसर देता रह सकता है।
इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी चोकालिंगम ने कहा, ‘आईटी क्षेत्र में बड़ी और पर्याप्त पूंजी तथा नकदी वाली कंपनियां हैं। समय-समय पर बाजार का रुख इनके पक्ष में हो सकता है। लेकिन ढांचागत रूप से इस उद्योग की विकास की संभावनाएं काफी धीमी हो गई हैं। पहले यह क्षेत्र कहीं ज्यादा वृद्धि दर देने में सक्षम था मगर अब वृद्धि 0 से 3 फीसदी के दायरे में रहने की संभावना है। इस लिहाज से इन कंपनियों के ऐसे कारोबार में बदलने का जोखिम है जो मजबूत आय वृद्धि और बड़ी मात्रा में संपत्ति बनाने के बजाय, स्थिर नकद प्रवाह जुटाती हैं और शेयरधारकों को पूंजी लौटाती हैं।’