Stock Market: वैश्विक बाजारों की भारी बिकवाली के बीच दलाल स्ट्रीट (Dalal street) सोमवार को लाल रंग से लथपथ हो गया और सेंसेक्स (Sensex) 2686 अंक गिरकर 78,295 के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी (Nifty) 823 अंक का गोता लगाकर 23,893 के स्तर पर आ गया।
बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में ब्रोडर इंडेक्स में बिकवाली का ज्यादा दबाव देखा गया। मिडकैप इंडेक्स 4.23 प्रतिशत फिसल गया और स्मॉलकैप इंडेक्स इंट्राडे सौदों में 4.58 प्रतिशत लुढ़क गया।
बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) पर अदाणी पोर्ट्स, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, एसबीआई, इंडोसिस और जेएसडब्ल्यू स्टील में 5-6 फीसदी की गिरावट आई। जबकि इंडेक्स के दिग्गज शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, लार्सन एंड टुब्रो और एचडीएफसी बैंक 2-4 फीसदी के दायरे में फिसले।
इसके अलावा एशियाई बाजार भी सोमवार को भारी दबाव में रहे और प्रमुख इंडेक्स में भारी गिरावट आई। जापान में निक्केई 225 (Nikkei 225) और टॉपिक्स (TOPIX) 13 प्रतिशत तक गिर गए…जो बाजार में सुस्ती का संकेत देता है। जापान के शेयर बाजार में यह 1987 के ‘ब्लैक मंडे’ के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है।
मेहता इक्विटीज़ में डायरेक्टर शरद चंद्रा शुक्ला ने कहा, “जापान के कैरी ट्रेड का अंत एक प्रमुख चिंता का विषय है। कैरी ट्रेड में निवेशक येन जैसी कम ब्याज दरों वाली मुद्रा में उधार लेता है और हाई रिटर्न रेट वाली मुद्रा में आय का पुनर्निवेश करता है। जैसे-जैसे केंद्रीय बैंक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त करते हैं तो उधार लेने की लागत बढ़ती है, जिससे जोखिम भरी संपत्तियों से लोगों का ध्यान हट जाता है।”
तुरंत जल्दबाजी करने से बचना चाहिए
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट में रिसर्च हेड संतोष मीना ने कहा कि निवेशकों को लम्बे समय तक बाजार में रही तेजी के बाद पहले सार्थक सुधार (गिरावट) के संकेत दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि निवेशकों और व्यापारियों को सतर्क रहना चाहिए और तुरंत जल्दबाजी करने से बचना चाहिए क्योंकि बेहतर प्रवेश स्तर सामने आ सकते हैं।
मीना ने कहा, “हमारे बाजार के लिए आउटलुक ”बहुत तेजी” का बना हुआ है, लेकिन एक महत्वपूर्ण गिरावट (सुधर) की संभावना का मतलब है कि निवेशकों को जहां वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं हैं, वहां मुनाफा निकालने पर ध्यान दिया जा सकता है।”’
मुनाफावसूली के कारण बाजार में शार्ट टर्म अस्थिरता
आनंद राठी शेयर्स और स्टॉक ब्रोकर्स में प्रमुख – यूएई तन्वी कंचन भी भारतीय शेयर बाजार के आउटलुक को लेकर ‘बुलिश’ बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि मुनाफावसूली के कारण बाजार में शार्ट टर्म अस्थिरता की स्थिति आई है।
कंचन ने कहा कि यह भारतीय इक्विटी में किसी भी तरह की लॉन्ग टर्म घबराहट का संकेतक नहीं है। उन्होंने कहा कि जो निवेशक इक्विटी बाजार में निवेश करना चाह रहे हैं वो ये मान कर चले कि बाजार में इस इस अस्थिर अवधि के दौरान उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा करके डाले पैसा
कंचन ने कहा कि यह भारतीय इक्विटी में किसी भी तरह की लॉन्ग टर्म घबराहट का संकेतक नहीं है। उन्होंने कहा कि जो निवेशक इक्विटी बाजार में निवेश करना चाह रहे हैं वो हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा करके पैसा डाल सकते हैं।