सरकार ने निर्यात पर भारी लाभ की कर दरों में बदलाव किया है; इसके तहत डीजल पर कर की दर बढ़ाकर करीब 55.5 रुपये प्रति लीटर (या 95 डॉलर प्रति बैरल) कर दी गई है, जो पहले की दर करीब 21.5 रुपये प्रति लीटर (36 डॉलर प्रति बैरल) से काफी ज्यादा है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की दर अब लगभग 42 रुपये प्रति लीटर (या 72 डॉलर प्रति बैरल) है, जो पहले लगभग 29.5 रुपये प्रति लीटर (या 50 डॉलर प्रति बैरल) थी। घरेलू इस्तेमाल के लिए एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी की सीमा हर महीने 25 फीसदी तय की गई है। पेट्रोल को इस कर से छूट दी गई है। कर की इन दरों को हर पखवाड़े समायोजित किया जाएगा।
इस कर से निर्यात करने वाली थर्ड-पार्टी रिफाइनरियों का सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) कम हो जाएगा और वह निर्यातकों को घरेलू खपत के बजाय तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को बेचने के लिए प्रोत्साहन देगा। चूंकि उत्पाद कर की दर में कटौती की गई है, इसलिए नए विंडफॉल टैक्स, उत्पाद कर में कटौती से होने वाले राजस्व के कुछ नुकसान की भरपाई कर सकते हैं।
ज्यादातर डीजल निर्यात एसईजेड रिफाइनरियों से होता है, जिन्हें विंडफॉल निर्यात कर से छूट मिली हुई है। इसलिए, ज्यादातर कमाई एटीएफ निर्यात से ही होगी। ओएमसी, गैर-एसईजेड की स्वतंत्र रिफाइनरियों से कम कीमत की मांग कर सकती हैं। यह कर रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमता के लगभग आधे हिस्से पर लागू नहीं हो सकता है, क्योंकि वह एसईजेड में आती है।
अकेले काम करने वाली रिफाइनरियां ओएमसी के साथ डीजल आपूर्ति के लिए ऐसे समझौते कर सकती हैं, जिनमें दाम निर्यात कीमत (विंडफॉल कर के बाद) के बराबर हो, जो ओएमसी के लिए कम लागत होगी। उदाहरण के लिए, एचपीसीएल अपने बेचे जाने वाले डीजल का 32 फीसदी हिस्सा अकेले काम करने वाली रिफाइनरियों से लेती है, इसलिए इससे काफी बचत हो सकती है।
अभी, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के लिए संयुक्त मार्जिन ऋणात्मक है। ओएमसी के कुल वॉल्यूम में एटीएफ का हिस्सा बहुत कम होता है और 35 फीसदी एटीएफ अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को दुबई और सिंगापुर की कीमतों से जुड़ी दरों पर बेचा जाता है। एटीएफ की बिक्री में आईओसीएल की बाजार हिस्सेदारी 59 फीसदी है। विंडफॉल कर के बाद ओएमसी को घरेलू एयरलाइंस को बेचे जाने वाले एटीएफ पर प्रति लीटर 22 रुपये से ज्यादा का नुकसान होगा।
इन करों को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की कुछ हद तक भरपाई करने और घरेलू उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए लगाया गया है। संशोधित दरों के कारण डीजल पर मुनाफा मार्जिन कम या ऋणात्मक भी हो सकता है। सरकार का कहना है कि अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की सोर्सिंग पक्की कर ली गई है और रिफाइनिंग की अतिरिक्त क्षमता डीजल, पेट्रोल और एटीएफ के लिए बफर का काम भी करती है। निर्यात पर ऊंचे करों को देखते हुए एसईजेड से बाहर के स्वतंत्र रिफाइनर अपने उत्पादों को घरेलू बाजार में तेल विपणन कंपनियों को छूट पर बेचने की कोशिश कर सकते हैं।
फिलहाल अपस्ट्रीम उत्पादन पर फिर से विंडफॉल कर लगाए जाने का खतरा कम लग रहा है। नाकाबंदी और इन्फ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की वजह से कच्चे तेल की कीमतेंन्ज्यादा ही रहेंगी, यह पक्का है। मौजूदा कीमतों पर ओएमसी पेट्रोल पर करीब 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी रिटेल ग्राहकों को दे रही हैं। अगर कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ जाती है तो ओएमसी को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का और नुकसान होगा, यह मानते हुए कि खुदरा कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं। विधानसभा चुनावों के बाद कीमतों में बढ़ोतरी की पूरी संभावना है।
2025 में भारत ने कच्चे तेल की अपनी जरूरत का 88 फीसदी आयात किया। इसमें से 45 फीसदी पश्चिम एशिया से, 35 फीसदी रूस से और 6 फीसदी अमेरिका से आया। उत्पादों के मामले में भारत डीजल (उत्पादन का 24 फीसदी निर्यात), पेट्रोल (उत्पादन का 35 फीसदी) और एटीएफ (उत्पादन का 44 फीसदी ) का शुद्ध निर्यातक है।