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सैंडबॉक्स पहल की धीमी शुरुआत

Last Updated- December 11, 2022 | 1:23 PM IST

फरवरी 2020 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा स्वीकृत किए गए नियामक सैंडबॉक्स ढांचे की रफ्तार सुस्त बनी हुई है। सैंडबॉक्स ढांचे को नवाचार और भविष्य के विचारों को बढ़ावा देने के मकसद से सेबी द्वारा खासकर फिनटेक कंपनियों के लिए शुरू किया गया था। 
उद्योग के जानकारों का कहना है कि प्रतिबंधात्मक नियामकीय ढाचे, नवीनतम विचारों के प्रति ढलने में असहजता, और अंतर-नियामकीय समन्वय के अभाव ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से यह पहल पूरी तरह सफल होने में कामयाब नहीं हो पाई है।  नियामकीय अ​​धिकारियों का कहना है कि वे इस पहल में तेजी लाने के ​लिए संबद्ध विषयों पर काम कर रहे हैं।
सेबी की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े से पता चलता है कि वर्ष 2020 (जब सैंडबॉक्स ढांचे को पेश किया गया था) से बाजार नियामक को मंजूरी के लिए 10 आवेदन मिले। इनमें से 3 को खारिज कर दिया गया, 5 को लौटा दिया गया, एक पर विचार हो रहा है और एक को स्वीकृति प्रदान की गई। 
सेबी द्वारा खारिज किए गए विषयों में एक स्टॉक मार्केट फैंटेसी गेम्स पर आधारित और दूसरा फ्रैक्शनल शेयरों यानी आं​शिक शेयरों में निवेश सक्षम बनाने से जुड़ा हुआ है। उद्योग के जानकारों का मानना है कि फैंटेसी गेम्स पर सैंडबॉक्स से शेयर बाजार निवेश लोकप्रिय होगा, लेकिन इससे गैमीफिकेशन से जुड़ी चिंताएं पैदा हुई हैं। 
पिछले महीने एक कार्यक्रम में, सेबी अध्यक्ष ने कहा कि सेबी ऐक्ट में संशोधन पर काम हो रहा है जिससे सैंडबॉक्स ढांचे को और ज्यादा उदार बनाने में मदद मिलेगी।
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए मौजूदा ढांचे में बदलाव करने की जरूरत होगी। खेतान ऐंड कंपनी में पार्टनर मोइन लाढा ने कहा, ‘बाजार नियामक नवीनतम अंतरराष्ट्रीय कार्य प्रणालियां पेश करना चाहता है।
यह फाइनैं​शियल टेक्नोलॉजी (फिनटेक) से आगे भी विस्तार के लिए एक अच्छा प्रयास है। हालांकि इस प्रणाली को धीरे धीरे ही सफलता मिल पाएगी, क्योंकि भारत में सैंडबॉक्स अभी आरं​भिक चरण में है।’
संयुक्त नियामकीय प्रयास
इस महीने के शुरू में, वित्तीय क्षेत्र के प्रमुख नियामकों – सेबी, आरबीआई, आईआरडीएआई, इंटरनैशनल फाइनैं​शियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी, और पेंशन फंड नियामक ने नियामकीय सैंडबॉक्स की अनुमति को लेकर अपनी सहमति जताई थी। इसके तहत अंतर-नियामकीय मंजूरियों से 
संबं​धित खामियां दूर होने की संभावना है और आवेदकों को सीमित उद्देश्यों के लिए कुछ और रियायतें मिल सकती हैं। 

First Published - October 21, 2022 | 10:57 PM IST

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