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शेयर बाजार में आ सकती है और ज्यादा गिरावट

Last Updated- December 11, 2022 | 6:11 PM IST

पिछले एक साल के दौरान भारत में इक्विटी मूल्यांकन तेजी से घटा है, लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल में भारी तेजी के बीच भी दलाल पथ पर लगातार बिकवाल बने हुए।
सेंसेक्स का पिछला पीई मल्टीपल मार्च 2021 के अंत के 34.3 गुना के ऊंचे स्तर से करीब 40 प्रतिशत गिरकर गुरुवार को 21 गुना पर आ गया। यह 6 साल (मई-मार्च 2020 की अवधि में कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि को छोड़कर) में इस सूचकांक के लिए सबसे निचला मूल्यांकन है।  
विश्लेषकों का कहना है कि भारत में इक्विटी मूल्यांकन पिछले दो साल में जोखिम-मुक्त अमेरिकी सरकार के बॉन्ड पर प्रतिफल में भारी तेजी के लिए एफपीआई के प्रतिफल के संदर्भ में अन्य 20 प्रतिशत की गिरावट की जरूरत होगी। इससे भारत में शेयर कीमतों पर दबाव बना रह सकता है, बशर्ते कि अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल ऊंच बना रहे और इसमें और तेजी आए।
जेएम इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा का कहना है, ‘जैसे ही अमेरिका में मौद्रिक सख्ती जोर पकड़ेगी और बॉन्ड प्रतिफल बढ़ेगा, सभी परिसंपत्ति बाजारों में प्रतिफल में तेजी बॉन्ड बाजार में बदलाव के अनुरूप होगी। इससे भारत समेत इक्विटी कीमतों में और गिरावट आ सकती है।’
इक्विटी और बॉन्ड बाजार आपसी संबद्ध प्रतिफल के जरिये जुड़े हुए हैं। बॉन्ड के लिए प्रतिफल सालाना ब्याज है जो बॉन्ड धारकों को मिलता है। वहीं इक्विटी के मामले में, प्राप्त प्रतिफल निवेशक के लिए संभावित लाभांश आय है, यदि कंपनी/सूचकांक वितरक अपने सालाना लाभ का 100 प्रतिशत शेयरधारकों को इक्विटी लाभांश के तौर पर वितरित करता है।
सेंसेक्स का आय प्रतिफल गुरुवार को 3.48 प्रतिशत के अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल के मुकाबले उसके 21 गुना के पीई को देखते हुए 4.76 प्रतिशत पर था। यह 1.29 प्रतिशत या 129 आधार अंक का प्रतिफल अंतर है।
10 वर्षीय अमेरिकी सरकार के बॉन्ड पर प्रतिफल जुलाई 2020 के उसके 0.53 प्रतिशत के निचले स्तर से 295 आधार अंक तक अधिक है। 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड गुरुवार को 3.48 प्रतिशत के प्रतिफल के साथ कारोबार कर रहा था, जो अप्रैल 2010 के बाद से सर्वाधिक है और चालू कैलेंडर वर्ष की शुरुआत के बाद से करीब 200 आधार अंक अधिक है। इसके परिणामस्वरूप, सेंसेक्स आय प्रतिफल और 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल के बीच गुरुवार को घटकर 129 आधार अंक रह गया, जो कैलेंडर वर्ष के शुरू में 208 आधार अंक और अप्रैल 2020 में 469 आधार अंक की ऊंचाई पर था।
मौजूदा प्रतिफल अंतर लीमन संकट की अवधि के बाद के मुकाबले करीब 100 आधार अंक है।

First Published - June 18, 2022 | 1:11 AM IST

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