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चढ़ते बाजार से शेयर बिक्री मजबूत

Last Updated- December 11, 2022 | 4:32 PM IST

जून के निचले स्तर से बाजार में आई तीव्र उछाल सूचीबद्ध कंपनियों की इक्विटी शेयर बिक्री में मजबूती ला रही है। इस महीने अब तक करीब 47,000 करोड़ रुपये के ब्लॉक डील हुए हैं, जो अक्टूबर 2021 के बाद का सर्वोच्च आंकड़ा है जब बाजार सर्वकालिक ऊंचाई पर पहुंचा था। चूंकि हर क्षेत्र में सौदे हो रहे हैं, लेकिन इसकी अगुआई स्टार्टअप व वित्तीयक्षेत्र की फर्में कर रही हैं। इस महीने हुए बड़े सौदों में प्राइवेट इक्विटी फर्म केकेआर की तरफ से मैक्स हेल्थ की पूरी 27 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री, उबर की तरफ से जोमैटो की पूरी 7.8 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री और अबर्डन की तरफ से एचडीएफसी म्युचुअल फंड की 5.6 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री शामिल है।
बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि जुलाई के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की वापसी सूचीबद्ध फर्मों में सौदे को मजबूती दे रहा है। ब्लॉक डील निजी तौर पर बातचीत के जरिए विशेष ट्रेडिंग विंडो के तहत किए जाते हैं और यह विंडो स्टॉक एक्सचेंज उपलब्ध कराता है। ऐसे सौदे मोटे तौर पर बाजार कीमत से कम पर होते हैं।
पिछले कैलेंडर वर्ष में हर महीने औसतन 47,000 करोड़ रुपये के ब्लॉक डील हुए, जिसकी वजह नकदी की अच्छी स्थिति थी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से महामारी के बाद के प्रोत्साहन वाले कदमों को समेटने के बीच इस साल ऐसे सौदों को झटका लगा है। कैलेंडर वर्ष 2022 की पहली छमाही में औसतन 23,000 करोड़ रुपये के ब्लॉक डील हर महीने हुए। यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों के आंकड़े से मिली। ब्लॉक डील की गतिविधियां जून में सिकुड़कर महज 10,500 करोड़ रुपये की रह गई जब बेंचमार्क सूचकांक 13 महीने के अपने-अपने निचले स्तर पर आ गए थे। इस साल 17 जून के निचले स्तर से बेंचमार्क सेंसेक्स व निफ्टी ने 17 फीसदी की उछाल दर्ज की है।
कोटक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक व इक्विटी कैपिटल मार्केट्स प्रमुख वी. जयशंकर ने कहा, फेड की दर बढ़ोतरी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की आशंका से वैश्विक बाजारों में काफी उतारचढ़ाव रहा, जिसका भारत पर भी असर पड़ा। मई से जुलाई तक बाजारों में कुछ नहीं हुआ।
निवेशक यह जानने की को​शिश कर रहे थे कि बाजार का निचला स्तर क्या है। फेड की जुलाई की टिप्पणी ने संकेत दिया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने शायद सबसे खराब दिन देख लिया है और मंदी की संभावना काफी कम है। निवेशकों ने सकारात्मक चीजें देखनी शुरू की और वैश्विक इक्विटी बाजार सुधर गया। साल 2020 में आईपीओ एक या दो महीने के अंतराल पर आना शुरू हुआ। इस बार भी हम ऐसी ही चीजें देख सकते हैं लेकिन 2020 या 2021 से इसकी तीव्रता कम हो सकती है।
ब्लॉक डील से बड़े शेयरधारक को बड़ी हिस्सेदारी बड़े संस्थागत निवेशकों को बेचने में मदद मिलती है। दूसरी ओर, खरीदारों को सूचीबद्ध‍ फर्म की अच्छी खासी हिस्सेदारी खरीदने का मौका मिलता है। सामान्य परिस्थितियों में इतने शेयर किसी एक दिन में खरीदना चुनौतीपूर्ण होता है।

First Published - August 18, 2022 | 10:54 AM IST

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