इस वर्ष सेक्टोरल फंडों के बीच टेक्नोलॉजी फंडों का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। वैल्यू रिसर्च के आंकड़े से पता चलता है कि टेक्नोलॉजी फंडों ने -15.5 प्रतिशत का प्रतिफल दिया। आईटी शेयरों में मजबूत मांग परिवेश और शानदार राजस्व वृद्घि अनुमानों के बावजूद गिरावट आई है। यह गिरावट खासकर ब्याज दरों में वृद्घि, प्रमुख ग्राहक आधारित क्षेत्रों में मंदी की आशंका और मार्जिन के लिए जोखिम की वजह से आई है। इस साल आईटी दिग्गजों टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो में 15 प्रतिशत, 25 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की गिरावट आई है।
विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय आईटी सेवा क्षेत्र को मौजूदा डिजिटल बदलाव, खासकर क्लाउड से लगातार मदद मिलेगी। उनकी यात्रा की रफ्तार और फंडिंग प्रणाली हालांकि ग्राहकों की वित्तीय सेहत पर निर्भर करेगी। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है, ‘खराब आर्थिक परिवेश में, ग्राहक या तो बदलाव की राह लंबी बना सकते हैं या ज्यादा लागत के जरिये वित्त पोषण पर जोर दे सकते हैं। इसका वृद्घि दर पर प्रभाव पड़ता है। हमें आईटी खर्च की तीव्रता बढऩे का अनुमान है, लेकिन खर्च में वृद्घि ग्राहक स्वास्थ्य और आर्थिक परिवेश की गतिविधि पर आधारित है। मजबूत क्षमता वाली आईटी कंपनियों को भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी, जबकि अन्य को संघर्ष करना पड़ सकता है।’
नोमूरा की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भले ही हमें पब्लिक क्लाउड (30 प्रतिशत तक) के न्यून पैठ स्तरों की संभावना है और और क्लाउड इस्तेमाल में प्रबंधित सेवाओं की मध्यावधि में बढ़ती पैठ से हमें अल्पावधि चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा, क्योंकि दुनियाभर में केंद्रीय बैंकों ने मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के प्रयास में ब्याज दरों में भारी इजाफा किया है। जीडीपी अनुमानों में कटौती से भी वृद्घि दर की निरंतरता के लिए खतरा पैदा हो गया।’
फार्मा फंड -14 प्रतिशत के प्रतिफल के साथ इस साल खराब प्रदर्शक रहे हैं, जिसके बाद -7.5 प्रतिशत के साथ इन्फ्रा फंडों और -5.1 प्रतिशत के साथ बैंकिंग क्षेत्र के फंडों का स्थान है।