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प्रतिफल में अंतर से मिल रहा सुस्त रिटर्न का संकेत’

Last Updated- December 11, 2022 | 3:15 PM IST

विदेशी ब्रोकरेज बीएनपी पारिबा ने कहा है कि घरेलू बॉन्ड प्रतिफल और आय प्रतिफल के बीच अंतर बाजार के लाभ को ​स्थिर कर रहा है। मौजूदा समय में, 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल करीब 7.2 प्रतिशत है, जबकि निफ्टी आय के लिए 5.2 प्रतिशत है। इन दोनों के बीच व्यापक अंतर इ​क्विटी के पक्ष में रिस्क-रिवार्ड के अनुकूल है। 
 बीएनपी पारिबा में इंडिया इ​क्विटी रिसर्च के प्रमुख कुणाल वोरा ने कहा, ‘ऐतिहासिक तौर पर, इस स्तर के आसपास बाजार प्रतिफल अगले एकसाल में सुस्त बना रहेगा और इसलिए सतर्कता जरूरी है।’ 

 वोरा का कहना है कि घरेलू बॉन्ड प्रतिफल उतने ज्यादा सख्त नहीं हुए हैं जितने कि कुछ अन्य बाजारों में दिख रहे हैं।

बीएनपी पारिबा का कहना है कि उसने धीमी वै​श्विक मांग, ऊंचे मूल्यांकन और रिटेल प्रवाह में कमजोरी के बीच आगामी आय अपग्रेड के लिए सकारात्मक कारकों के अभाव को देखते हुए भारतीय बाजारों पर सतर्क रुख अपनाया है।
 ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि ए​शियाई प्रतिस्प​र्धियों के मुकाबले भारत की मूल्यांकन वृद्धि सर्वा​धिक ऊंचाई के आसपास बनी हुई है। 

 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) जुलाई मध्य 2022 से खरीदार रहे हैं, और तब से 7 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया है। इस साल अब तक (वाईटीडी) निकासी 21.5 अरब डॉलर पर ऊंची बनी रही। भारतीय इ​क्विटी में एफपीआई निवेश 17.5 प्रतिशत के साथ वर्ष के निचले स्तर पर है। वोरा का कहना है कि एफपीआई से और अ​धिक बिकवाली देखी जा सकती है। 

 अर्थव्यवस्था के संदर्भ में ब्रोकरेज फर्म का कहना है किभारत की मुद्रास्फीति सीपीआई सूचकांक में शामिल किए जाने की वजह से विकसित देशों के मुकाबले कम है। 

 वोरा ने कहा, ‘भारत में मुद्रास्फीति की समस्या विकसित देशों के मुकाबले कम गंभीर है।’

उन्होंने कहा कि भारतीय बाजारों के लिए कई सकारात्मक बदलाव हैं, जिनमें उसके ज्यादातर वै​श्विक प्रतिस्प​र्धियों के मुकाबले आकर्षक आ​र्थिक वृद्धि दर भी शामिल है। 
 ब्रोकरेज का कहना है कि इसके अलावा, कच्चे माल की लागत में नरमी से भी व्यापार घाटा कम हो सकता है, वहीं सामान्य मॉनसून से खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रित रह सकती है और जीएसटी संग्रह 13 प्रतिशत की तीन वर्षीय सीएजीआर पर मजबूत बना हुआ है। 

 वहीं ​चुनौतियां भी हैं। भारत का निर्यात कमजोर वै​श्विक मांग की वजह से नरम पड़ा है, और आयात ऊंचा बना हुआ है, जिससे भारत का चालू खाता घाटा (सीएडी) बढ़ रहा है।

First Published - September 22, 2022 | 10:47 PM IST

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