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खत्म हो रहा खुदरा निवेश का सुनहरा काल?

Last Updated- December 11, 2022 | 6:42 PM IST

देसी निवेशकों की तरफ से मजबूत निवेश (म्युचुअल फंडों के जरिये और सीधे तौर पर बाजार में निवेश के तहत) ने विदेशी निवेशकों की तरफ से हो रही रिकॉर्ड बिकवाली के कारण बाजार में आ रही गिरावट को काफी सहारा दिया है। छोटे निवेशक इक्विटी निवेश पर अपना भरोसा कायम रखे हुए हैं जबकि शेयरों में अपने-अपने उच्चस्तर से काफी गिरावट आई है। पिछले 12 महीने में अनुमानित तौर पर 4.5 लाख करोड़ रुपये की खुदरा रकम देसी इकिक्वटी बाजार में आई है, जो खुदरा निवेश के लिहाज से इसे सुनहरा काल बनाता है। लेकिन क्या अब खुदरा निवेश की कहानी अपने अंतिम दौर मेंं पहुंच गई है?
एक नोट में जेफरीज ने चार कारणों को रेखांकित किया है, जिसने ऐतिहासिक तौर पर खुदरा निवेश के सेंंटिमेंट को प्रभावित किया है। इक्विटी निवेश को लेकर ब्रोकरेज का लंबी अवधि का नजरिया बना हुआ है लेकिन अल्पावधि के लिहाज से खुदरा निवेश घट सकता है।
जेफरीज के रणनीतिकार महेश नंदूरकर और अभिनव सिन्हा ने एक नोट में कहा है, म्युचुअल फंडों व सीधे निवेश के जरिये रिकॉर्ड 60 अरब डॉलर की खुदरा रकम पिछले 12 महीने में देसी इक्विटी बाजार में आई है, जिससे विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली को समाहित करने में मदद मिली है। लेकिन खुदरा निवेश को हल्के में नहीं लिया जा सकता, हालांकि इक्विटी को लेकर ढांचागत खुदरा निवेश लंबी अवधि में मदद कर सकता है। पिछले 12 महीने का रिटर्न अगले 3-4 हफ्ते में घटकर शून्य की ओर चला जाएगा, ऐसे में निवेश की रफ्तार घट सकती है। इतिहास बताता है कि प्रॉपर्टी मार्केट में सतत तेजी और बाजार में काफी ज्यादा उतारचढ़ाव भी निवेश पर असर डालता है।
ऐसे मेंं कौन सी अहम चीजें खुदरा निवेश को प्रभावित कर रही है? एक नजर :

पिछला रिटर्न : मासिक निवेश प्रवाह के पिछले 10 साल के आंकड़े बनाम निफ्टी के पिछले 12 महीने के रिटर्न के विश्लेषण से कुछ ऐसे उदाहरण का पता चलता है जहां बाजार का रिटर्न घटकर शून्य फीसदी पर आ गया या निवेश में काफी गिरावट देखने को मिली। जेफरीज ने एक नोट मेंं ये बातें कही है। निफ्टी-50 का एक साल का रिटर्न अभी करीब 5.6 फीसदी है। पिछले 12 महीने का रोलिंग रिटर्न जल्द ही नकारात्मक होने की आशंका है। निफ्टी 18 अक्टूबर को अब तक के सर्वोच्च स्तर 18,477 पर पहुंचा था। इंडेक्स अभी अपने सर्वोच्च स्तर से 13 फीसदी नीचे है। यह अभी उसी स्तर पर है जो अगस्त 2021 मेंं देखा गया था।

बढ़ता उतारचढ़ाव : वीआईएक्स के जरिए बाजार के उतारचढ़ाव की माप होती है और इसका म्युचुअल फंड के निवेश के साथ सहसंबंध है। 2014, 2016 के मध्य और 2018 आदि मेंं जब कम उतारचढ़ाव था तब मजबूत निवेश देखने को मिला जबकि उच्च वीआईएक्स की अवधि मसलन साल 2013 व 2020 में कम निवेश देखने को मिला। नोट मेंं ये बातेंं कही गई है। इस साल अब तक के आधार पर भारत का वीआईएक्स 60 फीसदी से ज्यादा उछला है।

ऋण प्रतिभूतियों पर प्रतिफल : जेफरीज का कहना है कि यह भी इक्विटी में खुदरा निवेश को प्रभावित करता है। पिछले 10 साल में मजबूत खुदरा निवेश का टकराव घटते या कम जमा दरों से हुआ है। हालांकि जमा दरें 7 फीसदी के स्तर से ऊपर जाएगी, लेकिन इसमें समय लगेगा और यह हमारी तात्कालिक चिंता का विषय नहीं है।
10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूति का प्रतिफल अभी करीब 7.3 फीसदी है। इस बीच, कुछ निश्चित कॉरपोरेट मसलन नवी फिनसर्व गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्रों के जरिए रकम जुटाना चाह रही है, जिस पर वह 9.8 फीसदी तक ब्याज देगी।

रियल एस्टेट में सुधार : शेयर बाजारों में खुदरा निवेश पर भी इसका असर हो सकता है। जेफरीज के नोट में कहा गया है, जमा दरों की तरह पिछले 10 साल में प्रॉपर्टी प्राइस इन्फ्लेशन कम होने से भी मजबूत इक्विटी निवेश को सहारा मिला है। प्रॉपर्टी की कीमतें अब बढऩी शुरू हुई है और हमारा मानना है कि इस बाजार में और बढ़त की गुंजाइश है। इस पर नजर डालने के बाद मेंं हमे पता चला है कि हाउसिंग की मौजूदा मांग में इजाफा सही मायने में वैसे ग्राहकों के जरिए हुआ है, जो इसका इस्तेमाल करेंगे। लेकिन स्थिर बढ़ोतरी से प्रॉपर्टी के बाजार में निवेशक भी आ सकते हैं।

First Published - May 26, 2022 | 12:44 AM IST

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