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उद्योग जगत की आय पर पड़ रहा दबाव

Last Updated- December 10, 2022 | 11:12 AM IST

कॉरपोरेट आय में कोविड के बाद आई तेजी पर अब विराम लगता दिख रहा है, क्योंकि वित्त वर्ष 2023 की जुलाई-सितंबर तिमाही में कई कंपनियों ने मार्जिन और मुनाफे में कमी दर्ज की है। ध्यान देने की बात यह है कि भारतीय उद्योग जगत की आय अप्रैल-जून 2020 की तिमाही के बाद से पहली बार कमजोर पड़ी है। तब कोविड-19 की वजह से कंपनियों की आय प्रभावित हुई थी।
दूसरी तिमाही की आय पर कच्चे माल और ऊर्जा की ऊंची लागत के साथ साथ ब्याज दर चक्र में बदलाव का विपरीत प्रभाव पड़ा था, जिससे गैर-वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों के लिए ब्याज खर्च बढ़ गया। हालांकि भारतीय उद्योग जगत ने कच्चे माल की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति की वजह से दो अंक की वृद्धि दर्ज की है जिससे सभी क्षेत्रों में कीमत प्राप्तियों को बढ़ावा मिला। सभी क्षेत्रों की 2,725 सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 6.3 प्रतिशत घट गया था, और यह सालाना आधार पर वृद्धि की लगातार आठ तिमाहियों के बाद पहली बार दबाव दर्ज किया गया है। तुलनात्मक तौर पर वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में कॉरपोरेट आय सालाना आधार पर 22.3 प्रतिशत तक बढ़ी थी और यह एक साल पहले की समान अवधि में सालाना आधार पर 37.8 प्रतिशत तक अधिक थी। 
नमूने में शामिल कंपनियों ने 2.06 लाख करोड़ रुपये का संयुक्त शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो एक साल पहले के 2.20 लाख करोड़ रुपये और पूर्ववर्ती तिमाही के 2.08 लाख करोड़ रुपये से कम है। तुलनात्मक तौर पर, इस नमूने में शामिल सभी सूचीबद्ध कंपनियों की संयुक्त शुद्ध बिक्री दूसरी तिमाही में  सालाना आधार पर 25.9 प्रतिशत तक बढ़कर 29.3 लाख करोड़ रुपये रही थी। 
हालांकि यदि दूसरी तिमाही में बैंकों द्वारा शानदार प्रदर्शन नहीं किया जाता तो कुल कॉरपोरेट आय और ज्यादा खराब रहती।नमूने में शामिल 31 सूचीबद्ध बैंकों का संयुक्त शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 54.8 प्रतिशत तक बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये की ऊंचाई पर पहुंच गया, जो एक साल पहले के 39,150 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही के 45,600 करोड़ रुपये के मुकाबले ज्यादा है। 
बैंकों को ग्राहकों के लिए ऋणों पर ऊंची ब्याज दरों और ऋण में तेज वृद्धि का लाभ मिला। उनकी सकल ब्याज आय दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 18.5 प्रतिशत तक बढ़ गई, जो पिछले चार साल में सर्वाधिक है। गैर-बैंक ऋणदाताओं और बीमा कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया और दूसरी तिमाही में उनका संयुक्त शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 13.6 प्रतिशत तक बढ़कर करीब 22,750 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले के 20,000 करोड़ रुपये से अधिक, लेकिन वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही के 23,250 करोड़ रुपये से मामूली कम है। बैंकों, वित्तीय सेवा, और बीमा (बीएफएसआई) के साथ साथ स्टॉक-ब्रोकिंग को छोड़कर, कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 23.6 प्रतिशत घट गया था, जो 9 तिमाहियों में उनका बेहद खराब प्रदर्शन था।

First Published - November 21, 2022 | 10:38 PM IST

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