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धातु फर्मों के लाभ में बड़ी गिरावट की आशंका

Last Updated- December 11, 2022 | 5:43 PM IST

निवेशकों को धातु एवं खनन क्षेत्र में आय वृद्धि की चिंता सता रही है, क्योंकि यह क्षेत्र दशक में अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है, जिससे इस क्षेत्र के शेयरों का मूल्यांकन घट रहा है।
बीएसई मेटल इंडेक्स मौजूदा समय में 4.5 गुना के पी/ई मल्टीपल पर कारोबार कर रहा है, जो एक दशक के दौरान सबसे कम है। बीएसई मेटल इंडेक्स में शामिल प्रमुख 10 शेयरों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) पिछले तीन महीनों में 30 प्रतिशत घटा है, क्योंकि निवेशकों में वित्त वर्ष 2023 में धातु कंपनियों के मार्जिन और लाभ में बड़ी गिरावट की आशंका सता रही है। निवेशकों को कीमत गिरावट और कम बिक्री की वजह से यह चिंता सता रही है। इससे बीसई मेटल इंडेक्स प्रमुख बाजार में हाल में बिकवाली के संदर्भ में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बन गया है।
ऐतिहासिक तौर पर, धातु शेयरों ने इस सेक्टर की आय में उतार-चढ़ाव की वजह से प्रमुच सूचकांकों के मुकाबले हमेशा गिरावट के साथ कारोबार किया है। लेकिन मूल्यांकन में गिरावट अब रिकॉर्ड स्तर पर है। उदाहरण के लिए, बीएसई का सेंसेक्स 21.8 गुना के पिछले पी/ई पर कारोबार कर रहा है।
धातु सूचकांक में कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण मंगलवार को 6.37 लाख करोड़ रुपये था, जो इस साल मार्च के अंत में 9.15 लाख करोड़ रुपये और पिछले साल मार्च के अंत में 7.1 लाख करोड़ रुपये था।
तुलनात्मक तौर पर, बीएसई मेटल इंडेक्स की कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022 में 1.43 लाख करोड़ रुपये का संयुक्त शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो एक साल पहले के 60,454 करोड़ रुपये से 136 प्रतिशत तक की वृद्धि है।
हालांकि कई विश्लेषक वित्त वर्ष 2022 में धातु कंपनियों की आय में बड़ी तेजी को कभी कभार होने वाली तेजी के तौर पर देख रहे हैं, जिसके वैश्विक वृहद आर्थिक समस्याओं की वजह से फिर से दोहराना मुश्किल साबित होगा।
जेएम इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा का कहना है, ‘खनन एवं धातु शेयरों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका से और गिरावट आएगी। वैश्विक मंदी की वजह से औद्योगिक धातुओं के लिए मांग घट जागी और इस वजह से उनकी कीमतों में भारी कमी आएगी और खनन एवं धातु कंपनियों की आय भी कमजोर पड़ जाएगी।’
धातु क्षेत्र को चीन में सुस्त निवेश से पैदा हुई अनिश्चितताओं का भी सामना करना पड़ रहा है। चीन का वैश्विक मांग में करीब 50 प्रतिशत का योगदान है।
यूबीएस के विश्लेषकों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में ठहराव की आशंका पर अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और औद्योगिक जैसे चक्रीयता आधारित क्षेत्रों का एशिया प्रशांत क्षेत्र में कम योगदान है। चीन निवेश से परहेज कर रहा है और खपत पर जोर दे रहा है।’ धातु शेयरों में और संभावित कमजोरी के अन्य कारण भी हो सकते हैं, क्योंकि यह क्षेत्र प्राइस-टु-बुक (पी/बी) वैल्यू आधार पर पहे सस्ता बना हुआ था।

First Published - July 8, 2022 | 12:27 AM IST

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