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फार्मा क्षेत्र के मार्जिन पर रह सकता है दबाव

Last Updated- December 11, 2022 | 5:37 PM IST

वित्त वर्ष 2023 दो वर्ष की महामारी के बाद भारतीय दवा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण वर्ष है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विश्लेषकों को 5 प्रतिशत राजस्व वृद्धि की उम्मीद है, जबकि कर-पश्चात लाभ सालाना आधार पर 9-10 प्रतिशत तक घटने का अनुमान है, क्योंकि लागत दबाव से मार्जिन कमजोर बना रहेगा।
वहीं दूसरी तरफ, अस्पताल क्षेत्र की कंपनियां सामान्य हालात की ओर धीरे धीरे लौट रही हैं और इस क्षेत्र के विश्लेषकों को फोर्टिस हेल्थकेयर तथा एचसीजी द्वारा शानदार आंकड़े दर्ज किए जाने की संभावना है। हालांकि स्वास्थ्य जांच क्षेत्र की कंपनियों के लिए आगामी राह कठिन है। वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में उन्हें ऐसे समय में गैर-कोविड-19 व्यवसाय में धीमी तेजी से जूझना पड़ा, जब ऑनलाइन कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई।
भारतीय फार्मा क्षेत्र ने विभिन्न चुनौतियों – कोविड-संबंधित अवसरों में कमी, उद्योग-केंद्रित ढांचागत समस्याओं जैसे अमेरिकी कीमतों में कमी और इन्वेंट्री में बड़ी गिरावट, तथा ऊंची उत्पादन लागत जैसे वैश्विक वृहद कारक, माल ढुलाई लागत और विद्युत लागत में वृद्धि- के बीच मिश्रित वित्त वर्ष 2022 से जूझना पड़ा। कोविड-19 की वजह से आपूर्ति श्रृंखला की राह में भी चुनौतियां आई थीं। इसके अलावा वित्त वर्ष 2022 की दूसरी छमाही से भूजराजनीतिक तनाव से आशंका और बढ़ गई।
विश्लेषकों का मानना है कि ब्रांडेड क्षेत्र में भौगोलिक उपस्थिति वाली कंपनियां, अमेरिका में कॉम्पलेक्स पोर्टफोलियो (स्पेशियलिटी ड्रग्स, बायोलॉजिक्स और इंजेक्टीबल्स) के लिए स्थिति सकारात्मक है।
एडलवाइस सिक्योरिटीज का कहना है कि घरेलू मुख्य व्यवसाय अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन लागत दबाव बना हुआ है। ब्रोकरेज का कहना है, ‘नए रुझान स्पष्ट दिखे हैं – घरेलू कीमत वृद्धि की भरपाई के लिए उत्पादन लागत दबाव से सकल मार्जिन दबाव (करीब सालाना आधार पर 70 आधार अंक तक की कमी) को बढ़ावा मिला है और बढ़ते मालभाड़े, जिली और ईंधन जैसी अन्य लागत संबंधित समस्याओं से एबिटा मार्जिन प्रभावित हुआ है।’
हालांकि वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में इन्वेंट्री को बट्टे खाते में डाले जाने की वजह से तिमाही-दर-तिमाही आधार पर सकल मार्जिन में सुधार आने की संभावना है। घरेलू दवा कंपनियों के पास कोविड-19 दवा उत्पाद मौजूद थे जिन्हें वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में इन उत्पादों की वैल्यू घट गई और वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में उन्होंने कीमत नियंत्रण के तहत जरूरी दवाओं पर 10 प्रतिशत कीमत वृद्धि का सहारा लिया।
अमेरिकी जेनेरिक बाजार में कीमत गिरावट बरकरार रहने का अनुमान है, लेकिन प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से निर्यात-आधारित कंपनियों को लाभ मिलेगा। इन विश्लेषकों का कहा है, ‘हमें उम्मद है कि चुनौतीपूर्ण परिवेश और बड़ी मंजूरियों के अभाव के बीच अमेरिकी बिक्री तिमाही आधार पर मजबूत बनी रहेगी। ‘
उनका कहा है कि सन फार्मा की स्पेशियल्टी बिक्री वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि स्पेशियल्टी व्यवसाय में तेजी बनी हुई है।
 

First Published - July 11, 2022 | 11:35 PM IST

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