facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार पर यूबीएस का कम दांव: सुनील तिरुमलाई

Advertisement

यूबीएस सिक्योरिटीज में उभरते बाजार और एशिया इक्विटी स्ट्रैटजी के प्रमुख सुनील तिरुमलाई ने कहा कि ताजा तेजी के बावजूद चीन उभरते बाजारों के मुकाबले 40% नीचे कारोबार कर रहा है।

Last Updated- October 22, 2024 | 9:43 PM IST
Sunil Tirumalai UBS

चीन में हाल के प्रोत्साहन उपायों ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। यूबीएस सिक्योरिटीज में उभरते बाजार (ईएम) और एशिया इक्विटी स्ट्रैटजी के प्रमुख सुनील तिरुमलाई ने एक ईमेल इंटरव्यू में पुनीत वाधवा को बताया कि ताजा तेजी के बावजूद चीन उभरते बाजारों के मुकाबले 40 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है। उभरते बाजारों में यूबीएस उन बाजारों को पसंद कर रहा है जो बुनियादी आधार और मूल्यांकन के लिहाज से आकर्षक हैं। बातचीत के मुख्य अंश:

संवत 2081 के लिए भारतीय शेयरों पर यूबीएस का नजरिया क्या है?

यूबीएस दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयरों पर कम दांव लगा रहा है। अगले दो साल के लिए एमएससीआई इंडिया का आय वृद्धि अनुमान उभरते बाजारों के मुकाबले सबसे कम है। हालांकि भारत उन बाजारों की तुलना में 42 प्रतिशत के 10 वर्षीय औसत के मुकाबले 80 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा है। वृद्धि संबंधित परिदृश्य और मूल्यांकन के बीच इस अंतर के कारण हम भारत को लेकर अंडरवेट हैं।

क्या भारत की अर्थव्यवस्था और उसके शेयर बाजार के बीच कोई संगति नहीं है? अगर हां, तो आपके अनुसार इस असमानता को कैसे दूर किया जा सकता है?

हमारा मानना है कि भारत अपनी सबसे सुस्त जीडीपी वृद्धि अवधियों में से एक से जूझ रहा है। कुछ हद तक संबंधित बड़े सूचकांकों के शेयरों में भी धीमी आय वृद्धि के अनुमान हैं। इसलिए, बाजारों में आशावाद मुख्य रूप से बुनियादी बातों के बजाय मूल्यांकन और वास्तविक दरों पर आधारित है। यह भी ध्यान देने लायक है कि बाजारों को मुख्य समर्थन घरेलू धन से मिल रहा है – चाहे वह सीधे शेयरों में हो या म्युचुअल फंड जैसे विकल्पों के माध्यम से।

भारत में परिवार वास्तविक दरों को बेहद कम मानते हैं जो उनकी कम बचत,ज्यादा कर्ज और बचत खातों की जमाओं के प्रति कम आकर्षण से दिखता है और ज्यादा रिटर्न के लिए वे बाजार में जा रहे हैं। बैंक दरें बढ़ें या महंगाई घटे तो यह रुझान बदल सकता है। लिहाजा, बैंकों की जमा दरों पर नजर रहेगी।

यूबीएस के अनुसार ऐसी कौन से अहम थीम हैं जिनसे अगले साल उभरते बाजारों में रिटर्न को बढ़ावा मिल सकता है?

उभरते बाजारों में हमारी प्राथमिकता आकर्षक बुनियादी आधार और मूल्यांकन वाले बाजार हैं जो इन थीमों के लिए अनुकूल हैं: घरेलू आर्थिक मजबूती जो बाजारों के लिए महत्त्व रखती हैं, लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें, टेक/एआई चक्र के लिए अनुकूल निवेश और कम नीतिगत/राजनीतिक अनिश्चितता। मुख्य अर्थव्यवस्थाओं में हम चीन और दक्षिण अफ्रीका पर ओवरवेट हैं जबकि दक्षिण कोरिया, ताइवान और ब्राजील पर तटस्थ और भारत पर अंडरवेट हैं।

क्या एक वर्ष के नजरिये से एशियाई क्षेत्र में निवेश करने के लिए चीन सबसे अच्छा इक्विटी बाजार है?

पिछले कुछ सप्ताहों में चीन में केंद्रीय बैंक और बाजार नियामकों के समन्वित प्रयासों से प्रोत्साहन संबंधी खबरों की झड़ी लग गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बहुप्रतीक्षित राजकोषीय उपाय भी जल्द ही आ रहे हैं। हमारे लिए चीन ओवरवेट बाजार बना हुआ है, जिसके मुख्य कारण हैः कंपनियों का बुनियादी आधार कमजोर नहीं हुआ है, आय की उम्मीदें बरकरार हैं, और प्रत्यक्ष वृहद/संपत्ति प्रभाव के बजाय भूराजनीति तथा घरेलू वास्तविक दरों के स्पष्ट संकेत बाजार की कमजोरी का कारण बन रहे हैं। लाभांश/पुनर्खरीद समर्थन भी मजबूत है। हाल की तेजी के बावजूद हमें चीन उभरते बाजारों के मुकाबले 40 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिख रहा है।

मौजूदा माहौल में आपके पसंदीदा क्षेत्र कौन से हैं?

हम ऐसी स्थिति से बाहर आ रहे हैं, जहां घरेलू रहन-सहन (कम बचत और अधिक उधारी के कारण खपत में वृद्धि) बिजनेस-टु-कंज्यूमर क्षेत्रों (डिस्क्रेशनरी, स्टैपल, बैंकिंग आदि) का समर्थन कर रहा है। इसमें से कुछ चीजें उलट भी सकती हैं।

दूसरी तरफ, राजनीतिक स्थिरता का मतलब हो सकता है कि बिजनेस-टु-गवर्नमेंट क्षेत्रों के लिए मांग मजबूत बनी रह सकती है। हम भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर/इंडस्ट्रियल, यूटिलिटीज और सीमेंट पर ओवरवेट हैं जबकि वाहन तथा कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी पर अंडरवेट हैं।

Advertisement
First Published - October 22, 2024 | 9:23 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement