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एनडीटीवी अधिग्रहण के लिए जुबानी जंग तेज

Last Updated- December 11, 2022 | 4:16 PM IST

 अदाणी समूह ने समाचार चैनल एनडीटीवी के साथ अपनी जुबानी जंग को धार देते हुए आज कहा कि एनडीटीवी की प्रवर्तक कंपनी आरआरपीआर हो​​ल्डिंग्स द्वारा विश्वप्रधान कम​र्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) को उसके शेयरों के हस्तांतरण के लिए बाजार नियामक सेबी से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है।
एनडीटीवी और उसकी प्रवर्तक कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स को 23 अगस्त को भेजे गए दो अलग-अलग पत्रों में वीसीपीएल ने कहा है कि 1.9 करोड़ रुपये (वारंट को भुनाने के बाद आरआरपीआर के 19,90,000 शेयरों के लिए देय रकम) का भुगतान वीसीपीएल द्वारा पहले ही किया जा चुका है और आरआरपीआर ने उसे प्राप्त भी कर लिया है। इसलिए आरआरपीआर होल्डिंग्स द्वारा प्राप्त रकम अथवा मूल वारंट पत्र को वापस करने संबंधी किसी भी प्रयास का वीसीपीएल पर कोई कानूनी प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वह पूरा हो चुका है। 
वीसीपीएल ने कहा है कि आरआरपीआर होल्डिंग्स द्वारा एक पत्र में उठाए गए मुद्दे निराधार व कानूनी रूप से अमान्य हैं और उनमें कोई दम नहीं है। वीसीपीएल ने कहा, ‘इसलिए आरआरपीआर अपने दायित्व को तत्काल पूरा करने और वारंट नोटिस के अनुसार शेयरों को आवंटित करने के लिए बाध्य है।’
अदाणी समूह गुरुवार को एनडीटीवी द्वारा किए गए स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहा था। स्टॉक एक्सचेंज को बताया गया था कि बाजार नियामक सेबी ने नवंबर 2020 में उसके प्रवर्तकों को दो साल के लिए शेयर खरीदने या बेचने से प्रतिबंधित कर दिया था और इसलिए वह इस साल नवंबर तक वीसीपीएल को शेयर हस्तांतरित करने में समर्थ नहीं होगी। 
एनडीटीवी के प्रस्तावित अधिग्रहणकर्ता वीसीपीएल और एएमजी मीडिया नेटवर्क्स एवं अदाणी एंटरप्राइजेज ने मंगलवार को एनडीटीवी में अतिरिक्त 26 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए खुली पेशकश की थी। रॉय ने 2009 में वीसीपीएल (उस समय मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी) से लिए गए ब्याज मुक्त ऋण की अदायगी में चूक की थी। बाद में अदाणी समूह द्वारा 
अ​धिग्रहण किए जाने के बाद वीसीपीएल ने आरआरपीआर होल्डिंग्स में 99.5 फीसदी हिस्सेदारी के अ​धिग्रहण संबंधी अपने अ​धिकारों का प्रयोग किया और एनडीटीवी में 29.1 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर ली। एनडीटीवी भारत में तीन समाचार चैनलों का संचालन करती है।
वीसीपीएल ने कहा कि आरआरपीआर सेबी के 27 नवंबर 2020 के आदेश का पक्षकार नहीं है और इसलिए सेबी के आदेश में आरआरपीआर द्वारा बताया गया प्रतिबंध आरआरपीआर पर लागू नहीं होता है। उसने अपने पत्र में कहा है, ‘वीसीपीएल ने एक अनुबंध के तहत वारंट को भुनाने का नोटिस जारी किया है जो आरआरपीआर के लिए बाध्यकारी है। इसलिए आरआरपीआर अपने अनुबंध संबंधी दायित्वों का पालन करने के लिए बाध्य है।’
 

First Published - August 26, 2022 | 11:14 PM IST

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