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आजमाए कदमों पर करना होगा गौर

Last Updated- December 11, 2022 | 2:50 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफे के लिए पुराना व परखा हुआ रास्ता अपना पड़ सकता है, जिसमें एनआरआई को और रकम जमा कराने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि आरबीआई लगातार टूट रहे रुपये को स्थिर बनाने की कोशिश में जुटा है। इस साल अब तक भारतीय मुद्रा में 9.5 फीसदी की गिरावट आई है और डॉलर के बिक्री के जरिये रुपये को संभालने पर केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 545 अरब डॉलर रह गया है, जो एक साल पहले 642 अरब डॉलर के सर्वोच्च स्तर पर था।
 

इस हफ्ते एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने एक नोट में कहा, केंद्रीय बैंक को यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए कि टूटती हुई मुद्रा भारत के फंडामेंटल पर ग्रहण न लगा सके। मुद्रा में गिरावट से भले ही व्यापार घाटा पाटने में थोड़ी मदद मिलती है, लेकिन निवेशकों के आत्मविश्वास में कमी के तौर पर पूंजी खाते को होने वाली क्षति इस तरह के फायदे को पीछे छोड़ देगी।
 

बरुआ के मुताबिक, केंद्रीय बैंक को विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफे के लिए और जरिये पर विचार करना पड़ सकता है क्योंकि आगामी महीनों में भंडार घटकर 500 अरब डॉलर के आसपास रह जाएगा। उन्होंने कहा, रुपये को स्थिर करने के लिए अभी और पूंजी की दरकार है। जापानी इन्वेस्टमेंट हाउस नोमूरा ने एक नोट में कहा कि एशिया के केंद्रीय बैंकों व सरकार ने विगत में विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफे के लिए कुछ निश्चित कदमों पर भरोसा किया है और इस पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
 

नोमूरा ने कहा, आरबीआई पहले पूंजी की निकासी की रफ्तार को रोकने की कोशिश कर चुका है और इसके लिए ईसीबी के नियमों का सरलीकरण किया।

First Published - September 27, 2022 | 10:34 PM IST

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