प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत में अक्षय तृतीया का दिन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि खुशहाली और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सोना खरीदने से घर में बरकत आती है और वह कभी कम नहीं होती। लेकिन पिछले कुछ सालों में, खासकर 2026 तक आते-आते, सोने की खरीदारी का तरीका काफी बदल गया है। अब लोग सिर्फ ज्वेलरी शोरूम के बाहर लंबी कतारों में नहीं खड़े होते, बल्कि अपने स्मार्टफोन के एक क्लिक से ‘डिजिटल गोल्ड’ खरीद रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या डिजिटल गोल्ड हमारी परंपराओं को चुनौती दे रहा है? असल में, यह परंपरा को खत्म नहीं कर रहा, बल्कि उसे आज के जमाने के हिसाब से और भी आसान और सुलभ बना रहा है।
डिजिटल सोना पारंपरिक सोने की खरीदारी को चुनौती नहीं देता, बल्कि ग्राहकों के लिए इसे अधिक सुविधाजनक बनाता है। जो लोग इस शुभ दिन पर ‘टोकन’ के तौर पर सोने की खरीदारी करना चाहते हैं, वे अब केवल एक बटन क्लिक करके ऐसा कर सकते हैं। पहले जहां 1 ग्राम या उससे अधिक सोना खरीदना जरूरी होता था, वहीं डिजिटल गोल्ड ने अब 1 रुपये में भी सोना खरीदने का विकल्प दे दिया है।
मुथूट एक्जिम के सीईओ, केयूर शाह के अनुसार, “डिजिटल गोल्ड किसी भी परंपरा को चुनौती नहीं देता। यह उपभोक्ताओं के लिए इसे और अधिक सुविधाजनक बनाता है। जो लोग अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर टोकन गोल्ड खरीदना चाहते हैं, वे एक बटन के क्लिक के साथ आसानी से ऐसा कर सकते हैं।”
Also Read: Akshaya Tritiya 2026: सोने की ऊंची कीमतों के बाद भी आभूषणों की मांग में उछाल, प्री-बुकिंग में तेजी
डिजिटल गोल्ड का सबसे बड़ा फायदा इसकी फ्लेक्सिबिलिटी है। आज के दौर में लोग एडवांस में प्लानिंग करना पसंद करते हैं। मुथूट के ‘ई-स्वर्ण’ (eSwarna) जैसे डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म ग्राहकों को यह आजादी देते हैं कि वे समय से पहले ही थोड़ा-थोड़ा करके सोना जमा कर सकें।
अक्षय तृतीया जैसे व्यस्त दिनों में जब ज्वेलरी शॉप्स पर भारी भीड़ होती है, तब डिजिटल माध्यम एक राहत बनकर उभरता है। केयूर शाह बताते हैं कि डिजिटल गोल्ड के जरिए फिजिकल गोल्ड की डिलीवरी की योजना बहुत पहले से बनाई जा सकती है। लोग अपना डिजिटल गोल्ड जमा कर सकते हैं, उसे फिजिकल ज्वेलरी या सिक्कों में बदल सकते हैं (Redeem) और ठीक अक्षय तृतीया के दिन अपने घर पर डिलीवरी शेड्यूल कर सकते हैं। यह न केवल सुरक्षित है, बल्कि आपको शुद्धता की पूरी गारंटी भी देता है।
हालिया बिजनेस रिपोर्ट्स और मार्केट डेटा बताते हैं कि युवा निवेशक अब डिजिटल गोल्ड को ‘सेफ हेवन’ मान रहे हैं। इसमें मेकिंग चार्ज की चिंता नहीं होती और न ही इसे लॉकर में रखने का डर। 24 कैरेट शुद्धता और पारदर्शी कीमतें इसे एक पारदर्शी निवेश विकल्प बनाती हैं।
2026 के इस सीजन में देखा जा रहा है कि लोग फिजिकल और डिजिटल गोल्ड के बीच एक बैलेंस बना रहे हैं। जहां भारी गहने आज भी शादियों के लिए खरीदे जा रहे हैं, वहीं अक्षय तृतीया पर ‘शगुन’ के लिए डिजिटल गोल्ड पहली पसंद बनता जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि परंपरा वही है, बस उसे निभाने का जरिया डिजिटल हो गया है। तकनीक ने हमारी आस्था और निवेश के बीच की दूरी को कम कर दिया है।