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अक्षय तृतीया 2026: सोना खरीदें समझदारी से, आभूषण नहीं निवेश से बनेगी असली संपत्ति

निवेश विशेषज्ञों के अनुसार अक्षय तृतीया पर आभूषणों की छोटी-मोटी खरीदारी तो ठीक है मगर निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए

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संजीव सिन्हा   
Last Updated- April 17, 2026 | 11:04 PM IST

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मगर मौजूदा हालात में आभूषणों के अलावा भी कई विकल्प मौजूद हैं जहां निवेशक दांव लगा सकते हैं। निवेशक चाहें तो सिक्कों और आभूषणों से लेकर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) और सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) में सहजता के साथ निवेश कर सकते हैं। मगर बड़ा सवाल यह है कि लोग सोने की खरीदारी उपभोग या निवेश के लिए कर रहे हैं?

सोने की ऊंची कीमतों और बदलते कर नियमों वाले इस साल में यह अंतर आपके प्रतिफल में बड़ा फर्क ला सकता है। ‘अक्षय’ का अर्थ है ‘कभी न घटने वाला’। लोगों में ऐसी मान्यता रही है कि अक्षय तृतीया पर सोने की खरीदारी दीर्घकालिक समृद्धि लेकर आती है।

रिद्धि सिद्धि बुलियंस के प्रबंध निदेशक एवं इंडिया बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी कहते हैं, ‘इस त्योहार पर भारत में सोने की खरीदारी जमकर होती है। अक्सर एक ही दिन में सालाना खुदरा मांग के 10-15 प्रतिशत हिस्से की खरीदारी इसी दिन हो जाती है। कीमतें आसमान पर होने के बावजूद वर्ष 2026 में भी छोटे सिक्के या आभूषण खरीदने की परंपरा कायम रहेगी।’

1 फाइनैंस में वरिष्ठ वित्तीय सलाहकार अंकिता लोहिया का कहना है कि मोटे अनुमान के मुताबिक अक्षय तृतीया के दिन 20-30 टन सोने का लेन-देन होता है। उन्होंने कहा कि देश में अक्षय तृतीया उन बड़े अवसरों में एक है जिन पर सोने की जमकर खरीदारी होती है।

उपभोग या निवेश?

अक्षय तृतीया पर खरीदे गए आभूषणों पर अक्सर 8-25 प्रतिशत निर्माण शुल्क और 3 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ-साथ दोबारा बिक्री पर कर (रीसेल डिडक्शन) भी लगता है। इससे यह एक कुशल निवेश के बजाय उपभोग से जुड़े खर्च में तब्दील हो जाता है।

लोहिया कहती हैं ‘इसके विपरीत गोल्ड ईटीएफ और सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड की लागत कम होती है और ये कीमतों के लगभग इर्द-गिर्द चलते हैं। भावना से प्रभावित खरीदारी में उपभोग और निवेश के बीच अंतर करना महत्त्वपूर्ण है क्योंकि केवल निवेश-योग्य सोना ही दीर्घकालिक संपत्ति बनाने में सहायक होता है।’ जून 2021 से हॉलमार्क की प्रामाणिकता का सत्यापन शुरू होने के बाद खरीदारों को प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए जांच करनी चाहिए।

कोठारी कहते हैं, ‘शोरूम में आवर्धक लेंस का उपयोग करके भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का लोगो (बीआईएस का त्रिकोणीय चिह्न) और शुद्धता या महीनता का चिह्न जैसे 22के916, 18के750, या 14के585 जरूर देखें।’ प्रत्येक आभूषण पर एक विशिष्ट हॉलमार्क पहचान (एचयूआईडी) भी होनी चाहिए जो आभूषण पर लेजर से उकेरा गया छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड होता है। इससे इसकी पहचान सुनिश्चित होती है और इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होती है।

बीआईएस केयर ऐप का करें उपयोग

बीआईएस केयर ऐप अपने ‘एचयूआईडी सत्यापित करें’ फीचर के माध्यम से आभूषणों की प्रामाणिकता सत्यापित करने का एक सरल तरीका प्रदान करता है। आभूषण पर अंकित छह अंकों के अल्फान्यूमेरिक कोड को दर्ज कर उपयोगकर्ता तुरंत आभूषण विक्रेताओं का पंजीकरण, हॉलमार्किंग तिथि, शुद्धता, वस्तु का प्रकार और हॉलमार्किंग केंद्र जैसी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अगर ऐप ‘कोई रिकॉर्ड नहीं मिला’ दिखाता है तो यह इस बात का प्रबल संकेत है कि एचयूआईडी नकली हो सकता है।

सही शुद्धता का चुनाव कैसे करें?

खरीदारों को सोने की शुद्धता का चुनाव न केवल अपने बजट के अनुसार करना चाहिए बल्कि उपयोग और टिकाऊपन के आधार पर भी करना चाहिए। 22 कैरेट (91.6 प्रतिशत शुद्ध) सोना अपने समृद्ध रंग के कारण चेन और चूड़ियों जैसे पारंपरिक साधारण आभूषणों के लिए आदर्श है मगर यह अपेक्षाकृत नरम होता है और इस पर खरोंच लगने की संभावना अधिक होती है।

चालान (इनवॉइस) होता है अहम

सोना खरीदते समय एक औपचारिक चालान आपकी प्रमुख कानूनी सुरक्षा है। इसमें एययूआईडी, वजन, सोने की दर और निर्माण शुल्क का उल्लेख होना चाहिए। इसके बिना बीआईएस केयर ऐप के माध्यम से शिकायत करना मुश्किल हो जाता है और कई आभूषण विक्रेता रीसेल डिसक्शन पर पूरा पुनर्खरीद मूल्य देने से इनकार कर सकते हैं।

बीआईएस-लाइसेंस प्राप्त ज्वैलर्स से खरीदें। बीआईएस हॉलमार्क वाले सोने की बिक्री करने वाले अधिकृत आभूषण विक्रेता एक रजिस्टर रखते हैं। उनसे खरीदने से प्रामाणिकता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। कोइराह बाय ऑगमोंट की संस्थापक नमिता कोठारी कहती हैं,‘मानकीकरण का यह प्रयास अब सोने से आगे बढ़ रहा है। प्रयोगशाला में तैयार हीरों के लिए स्पष्ट प्रमाणन मानदंडों से उपभोक्ता विश्वास बढ़ाने में मदद मिल रही है।’ अगर बीआईएस द्वारा मान्यता प्राप्त परख केंद्र शुद्धता में कमी पाता है तो ग्राहक बीआईएस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सोने में निवेश

निवेश विशेषज्ञों के अनुसार अक्षय तृतीया पर आभूषणों की छोटी-मोटी खरीदारी तो ठीक है मगर निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। अरुणासेट इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के सह-संस्थापक एवं पार्टनर अंकित पटेल कहते हैं,‘गोल्ड ईटीएफ और सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) का मूल्यांकन कीमत, संरचना, तरलता, कर दक्षता और समग्र परिसंपत्ति आवंटन के आधार पर किया जाना चाहिए। टोकन खरीदना ठीक है मगर बड़े निवेश के लिए अनुशासित वित्तीय योजना का पालन करना आवश्यक है।’

गोल्ड ईटीएफ का चयन

गोल्ड ईटीएफ खरीदते समय निवेशकों को पोर्टफोलियो की संरचना की जांच करनी चाहिए। हालांकि, सेबी कहता है कि कम से कम 95 प्रतिशत आवंटन सोने और संबंधित उपकरणों में अनिवार्य है। इसमें डेरिवेटिव भी शामिल हो सकते हैं जिसका अर्थ है कि गैर-भौतिक जोखिम अहम हो सकता है। निवेशकों को अधिक भौतिक सोने के समर्थन और कम डेरिवेटिव जोखिम वाले ईटीएफ को प्राथमिकता देनी चाहिए।

गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स: फायदे और नुकसान

गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स (एफओएफ) डीमैट खाते के बिना सोने में निवेश करने का एक सरल तरीका प्रदान करते हैं क्योंकि निवेशक इन्हें नियमित म्युचुअल फंड इकाइयों की तरह खरीद और बेच सकते हैं। यह उन्हें व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) के लिए आदर्श बनाता है। ये बोली-पूछताछ स्प्रेड और मूल्य निर्धारण की अक्षमताओं जैसे निष्पादन जोखिमों को भी कम करते हैं।

पटेल कहते हैं, ‘संपत्ति प्रबंधन कंपनी ईटीएफ के गलत मूल्य निर्धारण की अवधि के दौरान आवक का प्रबंधन कर सकती है जिससे निवेशकों को बढ़ी हुई कीमतों पर खरीदने से बचने में मदद मिलती है। हालांकि, निवेशकों को अभी भी लागत, कराधान और अंतर्निहित ईटीएफ की संरचना पर नजर रखनी चाहिए।’

द्वितीयक बाजार में एसजीबी: क्या ये फायदेमंद हैं?

केंद्रीय बजट 2026 ने सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड में द्वितीयक बाजार निवेश को कम आकर्षक बना दिया है क्योंकि पूंजीगत लाभ कर छूट अब केवल मूल ग्राहकों पर लागू होती है जो परिपक्वता तक बॉन्ड रखते हैं। द्वितीयक खरीदारों को अब यह लाभ नहीं मिलता है।

लोहिया कहती हैं,‘एसजीबी अभी भी 2.5 प्रतिशत सालाना ब्याज, सरकारी समर्थन और बिना भंडारण लागत के लाभ प्रदान करते हैं। परिपक्वता तक रखने पर पिछले निर्गम ने अच्छा रिटर्न दिया है। हालांकि, कर लाभ के बिना निवेशकों को द्वितीयक बाजार से खरीदते समय अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।’ वर्तमान में कई एसजीबी ट्रेंच स्टॉक एक्सचेंजों पर मौजूदा हाजिर सोने की कीमतों से कम कीमत पर कारोबार कर रहे हैं।

First Published : April 17, 2026 | 10:59 PM IST