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बैंक के लॉकर में रखते हैं अपनी अमानत? जान लें ‘एक्सेस’ और ‘मालिकाना हक’ के बीच का यह जरूरी अंतर

बैंक लॉकर का जॉइंट होल्डर होना आपको मालिकाना हक नहीं दिलाता। केरल हाईकोर्ट के अनुसार, वसीयत ही आखिरी फैसला तय करती है। भ्रम से बचने के लिए दस्तावेज संभालें

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अमित कुमार   
Last Updated- March 27, 2026 | 6:23 PM IST

अगर आप बैंक लॉकर को लेकर यह सोचते हैं कि जॉइंट होल्डर या नॉमिनी बनने से अंदर रखा सामान अपने आप आपका हो जाएगा, तो यह खबर आपके लिए है। केरल हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले ने इस आम धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। अदालत ने साफ किया है कि लॉकर तक पहुंच (एक्सेस) और उसमें रखी संपत्ति का मालिकाना हक दो अलग चीजें हैं। यानी “Either or Survivor” जैसे क्लॉज होने के बावजूद, असली हक उसी का होगा जिसका नाम वसीयत (Will) में दर्ज है। ऐसे में यह फैसला हर उस व्यक्ति के लिए अहम है, जिसके पास बैंक लॉकर है या जो भविष्य में इसे लेने की सोच रहा है।

मामला 180 सोवरेन सोना से जुड़ा था, जिसे एक बेटी ने अपनी मां के साथ ‘आइदर और सर्वाइवर’ (Either or Survivor) मोड पर रखे लॉकर से अपना मान लिया था। लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि मां की ‘वसीयत’ (Will) उस लॉकर एग्रीमेंट से ऊपर है।

कब्जा मिलने का मतलब मालिकाना हक नहीं

सुप्रीम कोर्ट के वकील तुषार कुमार का कहना है कि लोग अक्सर ‘एक्सेस’ (पहुंच) और ‘ओनरशिप’ (मालिकाना हक) के बीच के अंतर को नहीं समझ पाते। बैंक लॉकर का एग्रीमेंट सिर्फ यह तय करता है कि लॉकर की चाबी किसके पास रहेगी या उसे कौन खोल सकता है। यह इस बात का सबूत कतई नहीं है कि अंदर रखा सोना या कागजात भी उसी के हैं। लॉकर सिर्फ एक सुरक्षित जगह है, जिसका मालिकाना हक कानूनी वारिस या वसीयत में लिखे व्यक्ति का ही होता है।

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FD और लॉकर के नियमों में बड़ा अंतर

ज्यादातर लोग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और लॉकर को एक जैसा समझते हैं, लेकिन कानूनन ये अलग हैं। एक्सपर्ट रोहित जैन और विपुल जय बताते हैं कि RBI के नियमों के मुताबिक, FD में ‘सर्वाइवर’ को पैसा निकालने और इस्तेमाल करने का हक मिल जाता है। लेकिन लॉकर के मामले में बैंक सिर्फ एक ‘कस्टोडियन’ (रखवाला) है। वहां सर्वाइवर क्लॉज सिर्फ बैंक की जिम्मेदारी खत्म करने के लिए है, संपत्ति ट्रांसफर करने के लिए नहीं।

विवाद से बचने के लिए क्या करें?

कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसी नौबत न आए, इसके लिए कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए:

  • स्पष्ट वसीयत बनाएं: अपनी वसीयत में लॉकर नंबर और उसमें रखे सामान का साफ जिक्र करें।
  • इन्वेंटरी तैयार रखें: लॉकर में क्या-क्या है, उसकी एक लिस्ट बनाएं। गहनों के बिल, टैक्स रसीद या गिफ्ट डीड जैसे दस्तावेज संभाल कर रखें।
  • तालमेल बिठाएं: कोशिश करें कि लॉकर का नॉमिनी, जॉइंट होल्डर और वसीयत का वारिस एक ही व्यक्ति हो ताकि कोई विरोधाभास न रहे।

अगर विवाद हो जाए तो क्या?

एलारा लॉ ऑफिस की पार्टनर सुप्रिया मजूमदार कहती हैं कि अगर मालिकाना हक को लेकर झगड़ा हो, तो सबसे पहले वसीयत की तलाश करनी चाहिए। अगर वसीयत नहीं है, तो संपत्ति का बंटवारा ‘हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम’ या ‘भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम’ के हिसाब से होगा। दस्तावेजों के अभाव में ऐसी कानूनी लड़ाइयां सालों-साल खिंच जाती हैं, इसलिए रिकॉर्ड रखना ही समझदारी है।

First Published : March 27, 2026 | 5:03 PM IST