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Gold ETF: भारत में सोने में निवेश करने का एक आसान तरीका माने जाने वाले गोल्ड ETF अब बदलने जा रहे हैं। अब तक ये फंड निवेशकों का पैसा सीधे फिजिकल सोने (बुलियन) में लगाते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव के बाद इनका ढांचा थोड़ा अलग हो सकता है।
दरअसल, मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने जून 2024 के मास्टर सर्कुलर में गोल्ड ETF को एक नई सुविधा दी है। इसके तहत फंड हाउस अब अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा गोल्ड डेरिवेटिव्स यानी गोल्ड फ्यूचर्स जैसे वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट्स में भी निवेश कर सकते हैं।
पहले गोल्ड ETF का लगभग पूरा पैसा फिजिकल सोने में लगाया जाता था, जिससे निवेशकों को भरोसा रहता था कि उनका निवेश सीधे सोने की कीमत से जुड़ा है।
अब नए नियमों के बाद ये फंड फिजिकल गोल्ड के साथ-साथ डेरिवेटिव्स का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। यानी गोल्ड ETF पूरी तरह “सोने से बैक्ड” नहीं रह जाएगा, बल्कि इसमें फिजिकल गोल्ड और पेपर गोल्ड का मिश्रण होगा।
हालांकि, एक जरूरी बात यह है कि गोल्ड ETF को अब भी अपने कुल निवेश का कम से कम 95% हिस्सा गोल्ड या गोल्ड से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में ही रखना होगा। फर्क सिर्फ इतना है कि अब इसमें फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स को भी शामिल किया जा सकेगा।
इस बदलाव को लागू करने में सबसे आगे HDFC Mutual Fund रहा है। कंपनी 22 अप्रैल 2026 से अपने गोल्ड ETF में यह नया स्ट्रक्चर लागू करने जा रही है।
सोने में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव धीरे-धीरे सामने आ रहा है। अब तक ज्यादातर लोग मानते थे कि गोल्ड ETF यानी फंड सीधे असली सोना खरीदकर रखते हैं। लेकिन अब तस्वीर थोड़ी बदल रही है।
Value Research के मुताबिक, फिजिकल गोल्ड का मतलब है कि फंड सच में सोने की ईंटें (बार) खरीदता है और उसी के आधार पर आपका निवेश बढ़ता या घटता है। यानी आपका पैसा सीधे सोने की कीमत से जुड़ा होता है।
वहीं, गोल्ड फ्यूचर्स एक अलग तरीका है। इसमें फंड असली सोना नहीं खरीदता, बल्कि एक कॉन्ट्रैक्ट लेता है। यह कॉन्ट्रैक्ट तय करता है कि भविष्य में किसी खास तारीख पर एक निश्चित कीमत पर सोना खरीदा या बेचा जाएगा। आसान शब्दों में कहें तो यह सोने की कीमत पर दांव लगाने जैसा है, बिना सोना हाथ में लिए।
हालांकि रिटर्न के चार्ट में दोनों (फिजिकल गोल्ड और फ्यूचर्स) कई बार एक जैसे दिख सकते हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है – और यही फर्क अहम बन जाता है।
इस बदलाव के पीछे मकसद है गोल्ड ETF को और ज्यादा लचीला और तेज बनाना।
फ्यूचर्स का इस्तेमाल करने से फंड मैनेजर को कई फायदे मिलते हैं:
तेजी से बदलते बाजार में एक साथ बड़ी मात्रा में असली सोना खरीदना या बेचना आसान नहीं होता। ऐसे में फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट एक स्मार्ट और फुर्तीला विकल्प बनकर सामने आते हैं।
इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि आपका रिटर्न तुरंत बदल जाएगा, लेकिन यह जरूर समझना जरूरी है कि अब कुछ गोल्ड ETF सीधे सोना रखने के बजाय “पेपर गोल्ड” यानी फ्यूचर्स के जरिए भी काम कर सकते हैं।
इसलिए आगे निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न नहीं, बल्कि यह भी देखना जरूरी होगा कि फंड असली सोने में निवेश कर रहा है या फ्यूचर्स के जरिए