This is an AI-generated image for reference
BNPL vs Credit Card: आज के डिजिटल दौर में खर्च करना जितना आसान हुआ है, उतना ही आसान हो गया है उधार लेना भी। कुछ क्लिक में खरीदारी और बाद में भुगतान की सुविधा ने लोगों की लाइफस्टाइल बदल दी है। ऐसे में दो विकल्प तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। पहला है ‘Buy Now Pay Later’ यानी BNPL और दूसरा पारंपरिक क्रेडिट कार्ड। दोनों ही उपभोक्ताओं को तत्काल खरीदारी की सुविधा देते हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल, फायदे और जोखिम अलग-अलग हैं। सवाल यही है कि आखिर आम उपभोक्ता के लिए कौन सा विकल्प ज्यादा बेहतर है।
इस मुद्दे पर वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों की राय भी काफी अहम है। LoansJagat के को-फाउंडर हर्ष ग्रोवर का मानना है कि BNPL और क्रेडिट कार्ड दोनों की अपनी उपयोगिता है, लेकिन इनके इस्तेमाल का तरीका ही तय करता है कि यह फायदेमंद साबित होंगे या नुकसानदेह। वहीं ईजीपे के सीनियर अकाउंटेंट आदिल मलिक का कहना है कि बेहतर विकल्प पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि उपभोक्ता अपनी वित्तीय आदतों को कैसे संभालता है।
BNPL यानी ‘अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें’ एक ऐसी सुविधा है जिसमें उपभोक्ता बिना तुरंत पैसा दिए कोई भी सामान खरीद सकता है और उसका भुगतान बाद में किस्तों में करता है। यह विकल्प खासकर ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से लोकप्रिय हुआ है।
BNPL का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसमें कई बार ब्याज नहीं लगता, खासकर अगर भुगतान तय समय में कर दिया जाए। इसके अलावा इसमें क्रेडिट कार्ड जैसी लंबी प्रक्रिया नहीं होती। कम डॉक्यूमेंटेशन और जल्दी मंजूरी इसे युवाओं और नए उपभोक्ताओं के बीच पसंदीदा बना रही है।
लेकिन यही आसान सुविधा कभी-कभी जोखिम भी बन जाती है। हर्ष ग्रोवर के मुताबिक, BNPL छोटे-छोटे खर्चों को हल्का बना देता है, जिससे लोगों को लगता है कि वे ज्यादा खर्च नहीं कर रहे। लेकिन जब कई BNPL ट्रांजैक्शन एक साथ हो जाते हैं, तो कुल देनदारी बढ़ जाती है और उपभोक्ता को इसका अंदाजा भी नहीं होता।
दूसरी तरफ क्रेडिट कार्ड एक पुराना और स्थापित वित्तीय उत्पाद है। इसमें बैंक या वित्तीय संस्थान उपभोक्ता को एक निश्चित लिमिट देता है, जिसके भीतर वह खर्च कर सकता है। हर महीने एक स्टेटमेंट जारी होता है जिसमें सभी खर्च, देनदारी और भुगतान की तारीख स्पष्ट होती है।
क्रेडिट कार्ड का एक बड़ा फायदा यह है कि यह उपभोक्ता को उसके खर्च का पूरा हिसाब देता है। स्टेटमेंट के जरिए व्यक्ति को यह साफ दिखता है कि उसने कहां और कितना खर्च किया। इससे वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलती है।
हालांकि, क्रेडिट कार्ड की सबसे बड़ी चुनौती इसकी ऊंची ब्याज दरें हैं। अगर समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज तेजी से बढ़ता है और कर्ज भारी हो सकता है। इसके बावजूद, यह एक ऐसा टूल है जो लंबे समय में मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में मदद करता है।
आज के समय में क्रेडिट स्कोर का महत्व काफी बढ़ गया है। होम लोन, कार लोन या किसी भी बड़े वित्तीय फैसले के लिए अच्छा क्रेडिट स्कोर जरूरी होता है।
क्रेडिट कार्ड इस मामले में ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं। नियमित और समय पर भुगतान करने से क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है और बैंक का भरोसा बढ़ता है।
वहीं BNPL में यह सुविधा सीमित होती है। कई BNPL सेवाएं क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट नहीं करतीं, जिससे उपभोक्ता को लंबे समय में इसका उतना फायदा नहीं मिलता। हालांकि कुछ कंपनियां अब यह सुविधा दे रही हैं, लेकिन यह अभी भी व्यापक रूप से लागू नहीं है।
क्रेडिट कार्ड का एक बड़ा आकर्षण इसके रिवॉर्ड्स होते हैं। कैशबैक, ट्रैवल पॉइंट्स, डिस्काउंट और अन्य ऑफर्स उपभोक्ताओं को अतिरिक्त लाभ देते हैं। नियमित उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए यह फायदे काफी मूल्यवान हो सकते हैं।
इसके मुकाबले BNPL में रिवॉर्ड्स का विकल्प काफी सीमित होता है। इसका मुख्य फोकस आसान भुगतान पर होता है, न कि अतिरिक्त लाभ देने पर।
आदिल मलिक के मुताबिक, BNPL उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है जो छोटे खर्चों के लिए आसान और तुरंत विकल्प चाहते हैं। खासकर वे लोग जिनकी क्रेडिट हिस्ट्री अभी मजबूत नहीं है या जिनके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है।
वहीं क्रेडिट कार्ड उन उपभोक्ताओं के लिए बेहतर है जो अपने खर्च को व्यवस्थित तरीके से ट्रैक करना चाहते हैं और लंबे समय में वित्तीय स्थिरता बनाना चाहते हैं।
दोनों ही विकल्पों में एक समान जोखिम है और वह है ज्यादा खर्च करने की आदत। BNPL में यह खतरा ज्यादा होता है क्योंकि हर खरीदारी छोटी और आसान लगती है। कई बार उपभोक्ता यह भूल जाता है कि उसे बाद में इन सभी भुगतान को चुकाना है।
क्रेडिट कार्ड में भी यही समस्या हो सकती है, लेकिन स्टेटमेंट और लिमिट के कारण व्यक्ति को कुछ हद तक नियंत्रण मिलता है।
हर्ष ग्रोवर का कहना है कि समस्या आसान क्रेडिट नहीं है, बल्कि अस्पष्ट क्रेडिट है। जब उपभोक्ता को अपने कुल कर्ज का सही अंदाजा नहीं होता, तब जोखिम बढ़ता है।
क्रेडिट कार्ड में सभी शुल्क, ब्याज दर और नियम पहले से तय होते हैं। उपभोक्ता को स्पष्ट जानकारी मिलती है कि अगर वह भुगतान में देरी करेगा तो उसे कितना अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
BNPL में कई बार यह स्पष्टता कम होती है। लेट फीस, पेनल्टी और अन्य शुल्कों के बारे में उपभोक्ता को पूरी जानकारी नहीं होती, जिससे बाद में परेशानी हो सकती है।
दोनों विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि BNPL हो या क्रेडिट कार्ड, सही इस्तेमाल करने पर दोनों ही फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन अगर बिना योजना के खर्च किया गया, तो दोनों ही कर्ज के जाल में फंसा सकते हैं।
उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे अपनी आय, खर्च और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही इनका इस्तेमाल करें। हर खरीदारी से पहले यह सोचना जरूरी है कि क्या वह वास्तव में जरूरी है और क्या उसका भुगतान समय पर किया जा सकेगा।