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Double OTP: बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के मामलों के बीच वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक नई पहल सामने आई है। हरियाणा पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के सहयोग से “डबल OTP सिस्टम” की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के खाताधारकों को डिजिटल ठगी से बचाना है। इस व्यवस्था के तहत बैंक ट्रांजैक्शन को तभी मंजूरी मिलेगी जब खाताधारक और उनके द्वारा चुने गए एक विश्वसनीय संपर्क, दोनों के OTP की पुष्टि हो जाएगी।
हरियाणा पुलिस के एसपी (CID) आईपीएस उपासना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अहम पहल की जानकारी साझा की है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन बैंकिंग ठगी से बचाना है। इस पहल को “डबल OTP सिस्टम” नाम दिया गया है।
इस सिस्टम के तहत बैंकिंग लेनदेन के दौरान दो अलग-अलग OTP जारी किए जाएंगे। पहला OTP खाताधारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा, जबकि दूसरा OTP उस व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर जाएगा जिसे खाताधारक ने अपने “ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट” यानी विश्वसनीय संपर्क के रूप में जोड़ा होगा, जैसे परिवार का कोई सदस्य।
बैंक से किसी भी पैसे के ट्रांसफर को तभी पूरा किया जाएगा जब दोनों OTP सफलतापूर्वक वेरिफाई हो जाएंगे। अगर इनमें से कोई एक OTP भी कन्फर्म नहीं होता है, तो ट्रांजैक्शन आगे नहीं बढ़ेगा और रोक दिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ नागरिकों की सहमति पर आधारित होगी और इसे वे अपनी इच्छा से सक्रिय कर सकेंगे।
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फिलहाल यह सिस्टम सीमित स्तर पर लागू किया गया है। जानकारी के अनुसार, HDFC बैंक की गुरुग्राम और पंचकूला स्थित चुनिंदा शाखाओं में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। करीब 50 शाखाओं को इस परीक्षण चरण में शामिल किया गया है।
इस पहल पर टिप्पणी करते हुए Ezeepay के एमडी और सीएमओ राशिद अली ने इसे एक समयानुकूल और जरूरी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल बैंकिंग के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच सीनियर सिटिज़न्स को सबसे अधिक जोखिम का सामना करना पड़ता है क्योंकि वे अक्सर तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरी तरह समझ नहीं पाते।
राशिद अली के अनुसार, “डबल OTP सिस्टम एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जोड़ता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि यदि किसी एक स्तर पर जानकारी लीक भी हो जाए, तब भी बिना दूसरे सत्यापन के लेनदेन पूरा नहीं हो सकता। यह व्यवस्था वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाती है।”
डिजिटल लेनदेन के विस्तार के साथ साइबर अपराधियों द्वारा ठगी के नए तरीके सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह डबल OTP सिस्टम एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा, जिससे बिना परिवार या विश्वसनीय संपर्क की पुष्टि के कोई बड़ा लेनदेन संभव नहीं होगा। इससे फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अत्यधिक जटिल प्रक्रिया वरिष्ठ नागरिकों के लिए असुविधाजनक हो सकती है। इसलिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को सरल इंटरफेस, स्पष्ट निर्देश और जागरूकता अभियानों पर ध्यान देना होगा, ताकि यह व्यवस्था सुरक्षित होने के साथ-साथ आसान भी बनी रहे।