प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
आजकल अपनी जरूरतें पूरी करने और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए लोन लेना आम हो गया है। घर हो, गाड़ी हो या मोबाइल, ज्यादातर चीजें अब EMI पर मिल जाती हैं। लेकिन कई बार यही EMI बाद में भारी बोझ बन जाती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि लोग अक्सर अपनी कमाई और कर्ज का सही हिसाब लगाए बिना कई लोन ले लेते हैं, जिससे धीरे-धीरे उनकी आर्थिक हालत बिगड़ने लगती है। अगर आप भी EMI और बढ़ते कर्ज से परेशान हैं, तो कुछ जरूरी आसान उपाय अपनाकर अपनी स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।
1 फाइनेंस के वाइस प्रेसिडेंट (पार्टनर सक्सेस) अनूज मेहता कहते हैं कि EMI का बोझ बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है जरूरत से ज्यादा कर्ज लेना। लोग बिना ज्यादा सोचे पर्सनल लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन अपनी कमाई के हिसाब से कुल कर्ज कितना है, यह नहीं देखते। ऊपर से जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो फ्लोटिंग रेट वाले लोन महंगे हो जाते हैं और EMI और बढ़ जाती है।
ज्यादातर लोग सिर्फ हर महीने की EMI पर ध्यान देते हैं, लेकिन यह नहीं सोचते कि कुल कितना ब्याज देना पड़ेगा या लोन कितने साल तक चलेगा। यही गलती बाद में भारी पड़ती है।
मेहता के मुताबिक, सबसे बड़ी गलती है क्रेडिट कार्ड का बकाया रोलओवर करना, जिस पर 30–42% तक का सालाना ब्याज लग सकता है। इसके अलावा, लाइफस्टाइल खर्चों के लिए टॉप-अप लोन लेना भी स्थिति को और खराब कर देता है। कई लोग यह मान लेते हैं कि जितनी EMI दे सकते हैं, उतना ही लोन ले सकते हैं, जबकि ऐसा नहीं है।
मेहता कहते हैं कि इसका सबसे सही तरीका है अनुशासन में रहना। कोशिश करें कि आपकी कुल EMI आपकी हर महीने की कमाई के 35–40% से ज्यादा न हो।
मेहता कहते हैं, “अगर आपकी कमाई सीमित है, तो EMI संभालना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही प्लानिंग से इसे आसान बनाया जा सकता है। आप सबसे पहले अपने सभी लोन की एक लिस्ट बना लें, जिसमें बकाया पैसा, ब्याज दर, EMI और बचा हुआ समय लिख लें। इससे आपको अपनी पूरी स्थिति साफ समझ में आ जाएगी।”
मेहता आगे बताते हैं, “इसके बाद सबसे ज्यादा ब्याज वाले कर्ज को पहले खत्म करने पर ध्यान दें। जैसे क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन को होम या एजुकेशन लोन से पहले चुकाएं। अगर आपका रिकॉर्ड अच्छा है, तो बैंक से ब्याज कम करने की बात भी कर सकते हैं।”
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मेहता के मुताबिक, छोटे-छोटे कदम भी बड़ा फर्क लाते हैं। सबसे महंगे लोन पर हर महीने 2000 से 5000 रुपये अतिरिक्त जमा करने से आगे चलकर अच्छी बचत होती है। साथ ही EMI को ऑटो-डेबिट पर सेट कर दें, ताकि कभी लेट फीस न लगे।
मंथली बजट बनाना बहुत जरूरी है और उसमें सबसे पहले EMI का खर्च रखें, बाकी खर्च उसके बाद प्लान करें। जितनी ज्यादा आपको अपनी आर्थिक स्थिति की समझ होगी, उतना ही आसान इसे संभालना होगा।
अगर किसी दूसरे बैंक में ब्याज दर 50 से 75 बेसिस पॉइंट कम मिल रही है और लोन का समय भी ज्यादा बचा है, तो बैलेंस ट्रांसफर करना फायदेमंद हो सकता है। जैसे पुराने MCLR वाले होम लोन को कम दर वाले EBLR लोन में शिफ्ट करने से लंबे समय में लाखों रुपये की बचत हो सकती है।
वहीं, लोन रिस्ट्रक्चरिंग या टेन्योर बढ़ाने से EMI तो कम हो जाती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ता है। इसलिए इसे सिर्फ तभी चुनें जब सच में पैसों की तंगी हो।
प्रीपेमेंट EMI का बोझ कम करने का सबसे असरदार तरीका है। मेहता के मुताबिक, अगर आप होम लोन पर साल में एक अतिरिक्त EMI के बराबर रकम जमा कर देते हैं, तो लोन की अवधि कई साल कम हो सकती है और ब्याज में बड़ी बचत होती है। RBI के नियमों के अनुसार फ्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं लगती, इसलिए बोनस, इंसेंटिव या अचानक मिली रकम को लोन चुकाने में लगाना समझदारी है।
लोन लेते समय अगर आपकी जेब इजाजत दे, तो कम अवधि वाला लोन चुनें, इससे कुल ब्याज कम देना पड़ता है। अगर फिलहाल पैसों की तंगी है, तो कुछ समय के लिए लोन की अवधि बढ़ाकर बची रकम से महंगे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का कर्ज पहले खत्म करें। फैसला लेते समय हमेशा पूरे कर्ज को साथ में देखें, सिर्फ एक लोन पर फोकस न करें।
मेहता कहते हैं कि लंबे समय में कर्ज से बाहर निकलने और फाइनेंस बेहतर करने के लिए तीन बातें याद रखें। सबसे पहले, आक्रामक तरीके से लोन चुकाने से पहले 3 से 6 महीने का इमरजेंसी फंड जरूर बना लें, ताकि किसी परेशानी में फिर महंगा कर्ज न लेना पड़े। दूसरा, सबसे ज्यादा ब्याज वाले लोन को पहले खत्म करें और बाकी पर न्यूनतम भुगतान जारी रखें, इससे कुल ब्याज कम लगता है। तीसरा, अच्छे और बुरे लोन का फर्क समझें और कर्ज लेने से पहले अपनी देनदारी को अपनी आय और संपत्ति के हिसाब से परखें। जरूरत पड़े तो किसी प्रोफेशनल फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद लें, जो आपको पूरी योजना बनाकर दे सके।