प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने 7 करोड़ से अधिक खाताधारकों को एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है। नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा निकालना हमेशा से एक लंबी प्रक्रिया रहा है। हालांकि, बीते कुछ समय में इसे काफी हद तक डिजिटल किया गया है, लेकिन अब केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने एक बड़ी घोषणा की है। जल्द ही देश के नौकरीपेशा लोग अपने PF खाते से UPI और वॉट्सऐप के जरिए बेहद आसानी से और तुरंत पैसे निकाल सकेंगे।
श्रम मंत्री के अनुसार, इस सुविधा का टेस्टिंग काम पूरा हो चुका है। इस नए कदम से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि इमरेंजीस में लोगों को अपने ही पैसे के लिए दिनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
मौजूदा व्यवस्था में PF सब्सक्राइबर्स को विड्रॉल क्लेम सबमिट करना पड़ता है, जिसके बाद मैनुअल या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसमें अक्सर देरी या तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन नए सिस्टम के तहत पूरी प्रक्रिया बेहद सरल और फास्ट हो जाएगी:
इस ऑटो-सेटलमेंट मोड को बढ़ावा देने के लिए डिपार्टमेंट ने हाल ही में ऑटो-सेटलमेंट क्लेम की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है, जिससे बीमारी, शादी, पढ़ाई और आवास जैसे कामों के लिए 3 दिन के भीतर पैसा मिल जाता है। अब UPI के आने से यह समय घटकर कुछ मिनटों का रह जाएगा।
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EPFO अपनी पहुंच बढ़ाने और अपनी सेवाओं को और आसान बनाने के लिए वॉट्सऐप प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शुरू करने जा रहा है। देश में मोबाइल यूजर्स की बड़ी संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस सुविधा के शुरू होने के बाद:
इसके अलावा, कई सब्सक्राइबर्स को आधार ऑथेंटिकेशन, फेस ऑथेंटिकेशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) लिंकेज से जुड़ी दिक्कतों के कारण रिफंड में देरी होती है। वॉट्सऐप सपोर्ट के जरिए यूजर्स इन समस्याओं को बिना PF ऑफिस जाए घर बैठे तेजी से हल कर सकेंगे।
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श्रम मंत्रालय के अनुसार, EPFO केवल तकनीक को ही अपग्रेड नहीं कर रहा है, बल्कि पेंडिंग शिकायतों और कानूनी मामलों को निपटाने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम कर रहा है। ‘निधि आपके निकट’ (NAN) जैसे कार्यक्रमों के जरिए मामलों की पहचान एडवांस में करके उन्हें तेजी से सुलझाया जा रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि कंज्यूमर कोर्ट में लंबित मामले अप्रैल 2024 में 4,936 थे, जो मार्च 2026 तक घटकर 2,646 रह गए हैं। वहीं, कुल अदालती मामलों की संख्या भी एक साल में 31,036 से घटकर 27,639 पर आ गई है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि 10 साल से अधिक पुराने लंबित मामलों में लगभग 45.4% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। सरकार का दावा है कि नए डिजिटल अपग्रेड के बाद तकनीकी खामियों को पूरी तरह दूर कर लिया जाएगा, जिससे भारत का यह सबसे बड़ा सोशल सिक्योरिटी सिस्टम आम बैंकिंग की तरह बेहद आसान हो जाएगा।