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Akshaya Tritiya पर सोने की चमक पड़ी फीकी: सालभर में 60% बढ़े दाम, क्या अब भी निवेश करना समझदारी?

अक्षय तृतीया पर सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। सालभर में कीमत में 60% उछाल के कारण बाजार में उत्साह थोड़ा कम है

Published by
ऋषभ राज   
Last Updated- April 14, 2026 | 6:35 PM IST

भारतीय घरों में सोने का रिश्ता सिर्फ निवेश से नहीं, बल्कि परंपरा और भावनाओं से भी जुड़ा है। खासकर अक्षय तृतीया जैसे बड़े त्योहार पर, जिसे धनतेरस के बाद देश में सोना खरीदने का दूसरा सबसे शुभ अवसर माना जाता है। लेकिन इस साल 19 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर पीली धातु की चमक कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है। पिछले साल की अक्षय तृतीया से लेकर अब तक सोने की कीमतों में लगभग 60% का जोरदार उछाल आ चुका है। ऐसे में आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस आसमान छूती कीमत पर सोना खरीदना भविष्य में भी मोटा मुनाफा देगा या फिलहाल दूरी बनाना ही बेहतर है?

बाजार के ताजा हालातों पर नजर डालें तो घरेलू कीमतें इस हफ्ते तीन हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। शुक्रवार को 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1,52,800 रुपये के आसपास दर्ज किया गया, जो कुछ दिन पहले ही 1,54,934 रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक जा चुका था। कीमतों में आई इस ऐतिहासिक तेजी ने खरीदारों के पसीने छुड़ा दिए हैं। हालांकि, अक्षय तृतीया की वजह से मांग में हल्की बढ़त जरूर देखी गई है, लेकिन शोरूम्स में वो रौनक गायब है जो आमतौर पर इस सीजन में होती है।

ग्राहकों की हिचकिचाहट और खाली पड़े शोरूम

त्योहार नजदीक आते ही ज्वेलर्स ने अपनी दुकानें तो सजा ली हैं, लेकिन ग्राहकों का फुटफॉल उम्मीद से काफी कम है। दिल्ली के ज्वेलर्स का कहना है कि लोग अक्षय तृतीया के लिए एडवांस बुकिंग की पूछताछ तो कर रहे हैं, लेकिन जब बात खरीदारी की आती है, तो ऊंची कीमतें उनके कदम रोक देती हैं। दुकानों में भीड़ सामान्य से काफी कम है और लोग अब भारी ज्वेलरी के बजाय छोटे सिक्कों या बहुत ही हल्की ज्वेलरी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सिर्फ खुदरा ग्राहक ही नहीं, बल्कि बड़े डीलर्स भी इस बार सावधानी बरत रहे हैं। मुंबई के बुलियन डीलर्स का मानना है कि आमतौर पर इस समय तक ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोने का स्टॉक जमा कर लेते थे, लेकिन इस साल थोक खरीदारी न के बराबर है। बाजार में वो उत्साह महसूस नहीं हो रहा है जो एक बड़े त्योहार से पहले होता है। ऊंचे दाम और वैश्विक अस्थिरता ने बाजार के सेंटीमेंट को दबा कर रखा है। फिलहाल आधिकारिक घरेलू कीमतों पर 9 डॉलर प्रति औंस तक का प्रीमियम और कहीं-कहीं 6 डॉलर तक का डिस्काउंट देखा जा रहा है, जिसमें भारी भरकम इंपोर्ट ड्यूटी और सेल्स लेवी का बोझ भी शामिल है।

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चीन से लेकर सिंगापुर तक: वैश्विक बाजार का हाल

सोने की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देश चीन में भी इस समय खरीदारी की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। चीन में खुदरा मांग घटने की वजह से सोने पर मिलने वाला प्रीमियम काफी गिर गया है। जहां पिछले हफ्ते यह 12 से 17 डॉलर प्रति औंस था, वहीं अब यह घटकर 3 से 5 डॉलर रह गया है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि चीन का सेंट्रल बैंक लगातार 17 महीनों से सोने की खरीदारी कर रहा है, जिसने वैश्विक स्तर पर कीमतों को गिरने नहीं दिया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि पूरी दुनिया में ज्वेलरी की मांग पिछले साल के मुकाबले लगभग 25% तक गिर गई है। हांगकांग, सिंगापुर और जापान जैसे बाजारों में भी फिजिकल गोल्ड पर प्रीमियम की स्थिति बहुत अनिश्चित बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमतें लगातार तीसरे हफ्ते बढ़त की ओर हैं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम की उम्मीदों ने भी इस तेजी को हवा दी है, जिससे निवेशकों का भरोसा सोने पर और मजबूत हुआ है।

निवेश या परंपरा: क्या कहता है बाजार का गणित?

अब सवाल उठता है कि क्या इस उच्च स्तर पर सोना खरीदना अगले एक साल के लिए भी उतना ही फायदेमंद होगा जितना पिछला साल रहा? रॉयटर्स के एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने में निवेश का आकर्षण अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन इसका तरीका बदल गया है। पिछले साल मिले 60% रिटर्न के बाद अब लोग अधिक चुनिंदा हो गए हैं। ज्वेलरी की मांग भले ही कम हो, लेकिन निवेश के नजरिए से लोग अभी भी सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।

चीन जैसे देशों में निवेश की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, भले ही वहां खुदरा ग्राहक कम हो रहे हों। भारत में भी मध्यम वर्ग अब डिजिटल गोल्ड या (ETF की तरफ रुख कर रहा है, क्योंकि फिजिकल गोल्ड के साथ मेकिंग चार्जेस और सुरक्षा की चिंता जुड़ी होती है। अक्षय तृतीया पर प्रतीकात्मक खरीदारी तो होगी, लेकिन बड़े निवेश के लिए बाजार की कीमतों में थोड़े सुधार का इंतजार करना शायद ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है। फिलहाल वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि सोने की कीमतें आने वाले समय में भी ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।

First Published : April 14, 2026 | 5:34 PM IST