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स्मार्टफोन में प्री-इंस्टॉल हो Aadhaar ऐप, सरकार के प्रस्ताव पर कंपनियों ने जताई आपत्ति

आधार ऐप को फोन में पहले से इंस्टॉल करने के प्रस्ताव पर टेक कंपनियों की आपत्ति, प्राइवेसी और लागत को लेकर चिंता

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एजेंसियां   
Last Updated- March 20, 2026 | 12:56 PM IST

Aadhaar App Pre-Load: केंद्र सरकार ने जनवरी में निजी तौर पर एप्पल, सैमसंग और गूगल जैसी कंपनियों से कहा था कि वे अपने फोन में आधार ऐप (Aadhaar App) पहले से इंस्टॉल करने पर विचार करें। लेकिन स्मार्टफोन कंपनियों के संगठन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। रॉयटर्स के मुताबिक, इंडस्ट्री के एक लेटर में यह जानकारी सामने आई है।

सरकारी ऐप को पहले से फोन में डालने को लेकर सरकार और टेक कंपनियों के बीच पहले भी विवाद होता रहा है। आधार ऐप का मामला भी ऐसे ही छह प्रस्तावों में शामिल है, जिनका आईटी उद्योग संगठन MAIT ने विरोध किया है।

आधार एक 12 अंकों की पहचान संख्या है, जो लोगों के फिंगरप्रिंट और आंखों के स्कैन से जुड़ी होती है। यह देश के करीब 1.34 अरब लोगों के पास है और बैंकिंग, टेलीकॉम और एयरपोर्ट एंट्री जैसे कामों में इस्तेमाल होती है। हालांकि सरकार इसे सुरक्षित बताती है, लेकिन डेटा लीक को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है। कई बार करोड़ों लोगों की जानकारी डार्क वेब पर मिलने की खबरें सामने आई हैं।

Aadhaar पर कंपनियों ने जताई चिंता

MAIT के एक ईमेल के अनुसार, आधार जारी करने वाली संस्था UIDAI ने आईटी मंत्रालय से कहा था कि गूगल, एप्पल और अन्य कंपनियों से बात कर आधार ऐप को फोन में पहले से डालने की संभावना पर चर्चा की जाए। यह कोई आदेश नहीं था, लेकिन कंपनियों ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि ऐसा करने से उत्पादन लागत बढ़ेगी और यूजर्स के लिए तकनीकी समस्याएं भी हो सकती हैं। एप्पल और सैमसंग ने खासतौर पर सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई।

UIDAI का क्या है तर्क

UIDAI का मानना है कि अगर ऐप पहले से फोन में होगा तो लोगों को आसानी से आधार सेवाएं मिलेंगी और इसका उपयोग बढ़ेगा। लेकिन कंपनियों का कहना है कि इससे कोई खास सार्वजनिक लाभ नहीं होगा। साथ ही उन्हें भारत और अन्य देशों के लिए अलग-अलग प्रोडक्शन लाइन बनानी पड़ेगी। MAIT ने यह भी कहा कि रूस के अलावा कोई देश कंपनियों को सरकारी ऐप पहले से इंस्टॉल करने के लिए मजबूर नहीं करता।

नए Aadhaar App में क्या है

जनवरी में लॉन्च हुए नए आधार ऐप से लोग अपनी जानकारी अपडेट कर सकते हैं, परिवार के सदस्यों की प्रोफाइल संभाल सकते हैं और बायोमेट्रिक डेटा को लॉक भी कर सकते हैं।

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के संस्थापक अपार गुप्ता ने कहा कि यह कदम सरकार के बढ़ते नियंत्रण की ओर इशारा करता है और यह चिंता की बात है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि सरकार इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा रही है या इसे वापस ले लिया गया है।

MAIT ने रॉयटर्स को दिए बयान में कहा कि उसके आंतरिक संवाद गोपनीय होते हैं और ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल रिपोर्टिंग में करने से उद्योग से जुड़ी चर्चाओं का सही संदर्भ बिगड़ सकता है और उसके प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है। UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार, भारत का आईटी मंत्रालय और गूगल ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।

पहले भी विवाद का मुद्दा रहा है ऐप प्री-लोडिंग

दिसंबर में नई दिल्ली को विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं की आलोचना का सामना करना पड़ा था, जब सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों को एक टेलीकॉम सुरक्षा ऐप पहले से इंस्टॉल करने का आदेश दिया था। बाद में सरकार को कुछ ही दिनों में यह फैसला वापस लेना पड़ा।

रॉयटर्स द्वारा देखे गए दस्तावेजों से पता चलता है कि सरकार के ऐप प्री-इंस्टॉलेशन प्रस्तावों को लेकर स्मार्टफोन कंपनियों में असंतोष बढ़ रहा है।

MAIT ने 10 मार्च को आईटी मंत्रालय के अधिकारी रविंदर कुमार मीना को पत्र लिखकर ‘सचेत’ नाम के एक अन्य ऐप, जो आपदा अलर्ट सेवा है, को पहले से इंस्टॉल करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया।

आधार समेत पांच अन्य सरकारी ऐप को पहले से इंस्टॉल करने के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए MAIT ने कहा कि हर मामले में उद्योग ने इस तरह के कदम का विरोध ही किया है। मीना ने भी इस पर टिप्पणी के लिए भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।

First Published : March 20, 2026 | 12:38 PM IST