प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवा हमेशा से एक बड़ी आर्थिक चुनौती रही है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाले कुल स्वास्थ्य खर्च का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा आज भी लोग अपनी जेब से (Out-of-Pocket) वहन करते हैं। ऐसे में किसी भी बड़ी बीमारी या अचानक आए अस्पताल के बिल के कारण जमा-पूंजी खत्म हो जाना एक आम बात है। लेकिन पिछले कुछ सालों में ‘फिनटेक’ (Fintech) और हेल्थकेयर के तालमेल ने इस पूरी व्यवस्था को काफी बदला है। अब भारी-भरकम मेडिकल बिलों को चुकाने के लिए लोगों को अपनी जमीन बेचने या गहने गिरवी रखने की जरूरत कम पड़ रही है, बल्कि डिजिटल फाइनेंसिंग के जरिए इलाज का खर्च आसान किस्तों में तब्दील हो रहा है।
CarePay के को-फाउंडर और CEO गौरव गुप्ता के मुताबिक, फिनटेक सॉल्यूशंस ने हेल्थकेयर को एक बार में होने वाले बड़े खर्च से बदलकर ऐसे खर्च में बदल दिया है, जिसे लोग अपनी मासिक कमाई के हिसाब से आसानी से मैनेज कर सकते हैं। इसका मतलब है कि अब इलाज के लिए पैसे जुटाना परिवार के बजट का हिस्सा बन गया है, न कि अचानक पड़ने वाला बड़ा बोझ। बाजार में मिलने वाली ‘नो-कॉस्ट EMI’, तुरंत मिलने वाले डिजिटल लोन और अस्पतालों में मौजूद ‘एम्बेडेड फाइनेंसिंग’ जैसी सुविधाओं की वजह से लोग पैसे की कमी के बावजूद तुरंत इलाज शुरू कर पा रहे हैं।
भारत के उभरते मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा परिवारों के लिए यह बदलाव काफी अहम है। इन लोगों की कमाई तो स्थिर होती है, लेकिन उनकी बचत अक्सर बच्चों की पढ़ाई, घर की EMI या भविष्य की दूसरी जरूरतों के लिए अलग रखी होती है। गुप्ता के मुताबिक, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोग, जिनका बजट पहले से ही काफी टाइट होता है और जिनके पास अच्छा हेल्थ कवर भी नहीं होता, उनके लिए अचानक आने वाला अस्पताल का खर्च संभालना काफी मुश्किल हो जाता है।
युवा पीढ़ी, खासकर 25 से 40 साल के लोग, अब सिर्फ गंभीर बीमारियों पर ही नहीं, बल्कि अपनी लाइफस्टाइल और सेहत को बेहतर बनाने वाले इलाज जैसे डेंटल, फर्टिलिटी (IVF), डर्मेटोलॉजी और विजन (LASIK) पर भी काफी खर्च कर रहे हैं। ये लोग एक बार में बड़ी रकम देने की बजाय ऐसे पेमेंट ऑप्शंस पसंद करते हैं, जो उनके कैश फ्लो के हिसाब से आसान हों।
वहीं, जो लोग खुद का काम करते हैं या जिनकी आय नियमित नहीं है, उन्हें अक्सर बैंक से लोन मिलना मुश्किल होता है, लेकिन ऐसे परिवार फिनटेक मॉडल्स से काफी फायदा उठा रहे हैं। ये कंपनियां पारंपरिक क्रेडिट स्कोर की जगह दूसरे तरीकों से उनकी लोन योग्यता चेक करती हैं और उन्हें जल्दी फाइनेंस उपलब्ध कराती हैं।
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हेल्थकेयर सेक्टर में फिनटेक से कई नए और असरदार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इनमें सबसे अहम ‘एम्बेडेड हेल्थ EMI’ है, जो सीधे अस्पतालों और क्लीनिकों में मिलती है। इससे बड़े मेडिकल बिल को आसान और कम ब्याज वाली किस्तों में बांटा जा सकता है, जिससे मरीज बेहतर इलाज चुनने में हिचकिचाते नहीं हैं। इसके साथ ही ‘इन्सुरटेक’ के जरिए अब OPD खर्चों के लिए भी छोटे बीमा प्लान मिले लगे हैं, जो बिना अस्पताल में भर्ती हुए भी कवरेज देते हैं।
एक और तेजी से बढ़ता ट्रेंड ‘Buy Now Pay Later’ (BNPL) है, जिससे छोटे इलाज के बिलों को कुछ समय में किस्तों में चुकाया जा सकता है। गौरव गुप्ता के मुताबिक, इन सुविधाओं से क्लीनिकों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है और इलाज के लिए आने वाले लोग ज्यादा आसानी से फैसला ले पा रहे हैं। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि फाइनेंसिंग मिलने पर मरीज अपने ट्रीटमेंट को अपग्रेड कर लेते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई मरीज 60,000 रुपये का इलाज करना चाहता है, लेकिन EMI के बाद उसकी क्षमता 1 लाख रुपये तक की निकलती है, तो वह बेहतर ट्रीटमेंट पैकेज चुन लेता है।
फिनटेक ने भले ही लोगों के लिए पहुंच आसान बना दी है, लेकिन कुछ जरूरी सावधानियां भी रखनी चाहिए। गुप्ता के मुताबिक, जब आप डिजिटल तरीके से अपना डेटा शेयर करते हैं, तो उसकी प्राइवेसी को लेकर हमेशा सतर्क रहना जरूरी होता है। साथ ही, आसान तरीके से कर्ज मिल जाने की वजह से कई बार लोग अपनी क्षमता से ज्यादा उधार ले लेते हैं, जिससे बाद में आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
गुप्ता का कहना है कि ग्राहकों को हमेशा नियम और शर्तें ध्यान से पढ़नी चाहिए, खासकर किसी भी तरह के छिपे हुए चार्ज को लेकर पूरी पारदर्शिता समझना बहुत जरूरी है।
गुप्ता का मानना है कि अगले 3 से 5 सालों में फिनटेक की भूमिका और भी ज्यादा बढ़ने वाली है। आने वाले समय में यह सिर्फ पैसों के लेन-देन का जरिया नहीं रहेगा, बल्कि हेल्थकेयर के लिए एक पूरा ‘फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर’ बन जाएगा। भविष्य में बड़े इलाज, जैसे सर्जरी या एडवांस ट्रीटमेंट के लिए बड़े लोन, बीमा और लोन का एक साथ मिलना, और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए तुरंत लोन अप्रूवल जैसी सुविधाएं आम हो जाएंगी।
गुप्ता कहते हैं कि इससे इलाज न सिर्फ सस्ता होगा, बल्कि ज्यादा लोगों के लिए आसान और पहले से अनुमान लगने वाला भी हो जाएगा। आखिर में, फिनटेक का लक्ष्य है कि हेल्थकेयर को हर नागरिक के लिए एक जरूरत ही नहीं, बल्कि एक सुलभ अधिकार बनाया जा सके।