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सोना-चांदी में तेजी अभी बाकी? Emkay Wealth ने बताए अगले टारगेट और निवेश का फॉर्मूला

वेल्थ मैनेजमेंट फर्म ने कहा कि अब निवेशक सोना और चांदी को केवल शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो के रणनीतिक हिस्से के तौर पर देखने लगे हैं

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अंशु   
Last Updated- June 04, 2026 | 6:39 PM IST

Gold-Silver Outlook: मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की मजबूती से समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन इसके बावजूद सोना (Gold) और चांदी (Silver) जैसी कीमती धातुएं मजबूत स्थिति में बनी हुई हैं। एमके वेल्थ मैनेजमेंट का मानना है कि मध्यम और लंबी अवधि (medium to long term) में दोनों धातुओं का आउटलुक पॉजिटव बना रहेगा।

वेल्थ मैनेजमेंट फर्म ने कहा कि अब निवेशक सोना और चांदी को केवल शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो के रणनीतिक हिस्से के तौर पर देखने लगे हैं। इन धातुओं की मांग सट्टेबाजी के बजाय स्ट्रक्चरल एलोकेशन से प्रेरित है, जो इनके लिए मजबूत आधार प्रदान कर रही है।

मजबूत बने हुए हैं बुनियादी कारक

एमके वेल्थ मैनेजमेंट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और संस्थागत निवेशकों से आने वाला स्थिर निवेश कीमती धातुओं के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोना हाल ही में कुछ समय के लिए 5,000 डॉलर के स्तर को पार करने के बाद फिलहाल करीब 4,500 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, चांदी भी लगभग 72 डॉलर से उछलकर 77 डॉलर के करीब पहुंच गई है। अल्पकालिक गिरावट और मुनाफावसूली के बावजूद दोनों धातुओं में मजबूत मांग बनी हुई है।

  • अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) द्वारा आगे भी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद सोने और चांदी के लिए एक प्रमुख पॉजिटिव फैक्टर है। ब्याज दरों में कमी से अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ सकता है, जिससे बुलियन (सोना-चांदी) निवेश ज्यादा आकर्षक बन सकता है।
  • वर्ष 2022 से केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही खरीदारी ने भी सोने की कीमतों के लिए लॉन्ग टर्म प्राइस बेस को मजबूत किया है।
  • लगभग एक दशक तक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद सोना और चांदी दोनों ने मल्टी-ईयर टेक्निकल ब्रेकआउट दर्ज किया है, जो इनके लॉन्ग टर्म तेजी के रुझान को और मजबूत करता है।
  • चांदी को विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों से जुड़ी बढ़ती औद्योगिक मांग का फायदा मिल रहा है। वहीं, अमेरिका की राजकोषीय स्थिति और डॉलर की स्थिरता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच निवेशक अपने पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाने के लिए सोने की ओर रुख कर रहे हैं।

एमके वेल्थ का कहना है पहले सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का बड़ा कारण सट्टेबाजी और ट्रेडिंग गतिविधियां होती थीं। लेकिन इस बार निवेशक इन्हें अपने पोर्टफोलियो का स्थायी हिस्सा बनाकर निवेश कर रहे हैं। इसी वजह से मौजूदा तेजी मजबूत नजर आ रही है और इसके लंबे समय तक बने रहने की संभावना ज्यादा है।

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कहां तक जा सकते हैं सोने और चांदी के भाव?

एमके वेल्थ मैनेजमेंट का मानना है कि सोने की कीमतों को 4,000 डॉलर के नीचे मजबूत समर्थन मिल सकता है। इसके लिए 3,890 डॉलर और 3,510 डॉलर प्रमुख सपोर्ट स्तर माने जा रहे हैं। वहीं, तेजी की स्थिति में सोना 4,800 डॉलर और 5,200 डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है।

चांदी की बात करें तो निकट अवधि में कीमतों में कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है और यह 74 डॉलर या 62 डॉलर तक फिसल सकती है। हालांकि, मध्यम अवधि में चांदी के लिए 92 डॉलर और 110 डॉलर के लक्ष्य बरकरार हैं।

हालांकि, एमके वेल्थ ने आगाह किया है कि सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार महंगाई के रुझान, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की दिशा और अमेरिकी डॉलर की चाल जैसे कारकों से प्रभावित हो सकती है।

सोने-चांदी में कितना करें निवेश?

एमके वेल्थ मैनेजमेंट ने मौजूदा निवेशकों को सलाह दी है कि वे सोने और चांदी में अपनी मौजूदा हिस्सेदारी बनाए रखें और बाजार में गिरावट आने पर धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं। जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा 25-30 फीसदी तक पहुंच चुका है, उन्हें अपने निवेश की समीक्षा कर जरूरत पड़ने पर पोर्टफोलियो को दोबारा संतुलित (रीबैलेंस) करने पर विचार करना चाहिए।

नए निवेशकों के लिए फर्म ने चरणबद्ध (फेज्ड) तरीके से निवेश शुरू करने की सलाह दी है। जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर पोर्टफोलियो का 5-10 फीसदी हिस्सा सोने में निवेश किया जा सकता है।

निवेश के विकल्पों में फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड और सिल्वर फंड, गोल्ड-लिंक्ड स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स तथा ग्लोबल गोल्ड माइनिंग फंड शामिल हैं।

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जोखिम क्षमता के आधार पर निवेश आवंटन

एमके वेल्थ मैनेजमेंट ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार सोना और चांदी में निवेश के लिए निम्नलिखित आवंटन की सलाह दी है:

  • कम जोखिम (Conservative) वाले निवेशक: पोर्टफोलियो का 5% तक
  • मध्यम जोखिम (Moderate) वाले निवेशक: पोर्टफोलियो का 10-15%
  • ज्यादा जोखिम (Aggressive) वाले निवेशक: रणनीतिक रूप से 20% या उससे ज्यादा

फर्म ने यह भी सलाह दी है कि सोना और चांदी में निवेश करते समय कम से कम तीन साल की निवेश अवधि रखनी चाहिए। इससे पोस्ट-टैक्स रिटर्न बेहतर करने और अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

रिटर्न की उम्मीदें संतुलित रखें?

एमके वेल्थ मैनेजमेंट के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और अहमदाबाद जोनल हेड विवेक चोकसी के अनुसार, सोना और चांदी किसी भी डायवर्सिफाइड निवेश पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा डॉलर पर निर्भरता कम करने (डी-डॉलराइजेशन) के प्रयासों के साथ-साथ औद्योगिक और उपभोग मांग में बढ़ोतरी के कारण कीमती धातुओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। ऐसे में लंबी अवधि के लिए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का 10-15 फीसदी हिस्सा सोने और चांदी में रखने पर विचार करना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सोना और चांदी में आई तेज तेजी के बाद निवेशकों को रिटर्न को लेकर संतुलित उम्मीदें रखनी चाहिए। उनके मुताबिक, लंबी अवधि में इन धातुओं से सालाना करीब 9-10 फीसदी रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।

एमके वेल्थ का मानना है कि अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल में सोना और चांदी पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन लाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। निवेशकों को अल्पकालिक कीमतों के उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय अपने निवेश आवंटन को लेकर अनुशासित रहना चाहिए।

First Published : June 4, 2026 | 6:39 PM IST