प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
अगर आप नौकरीपेशा हैं और किराए के मकान में रहते हैं, 1 अप्रैल 2026 से HRA से जुड़े नियम बदलने जा रहे हैं और इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ सकता है। अगर आप किराए के घर में रहते हैं, तो अब सिर्फ रसीद दिखाकर टैक्स बचाना आसान नहीं रहेगा। सरकार जहां कुछ शहरों में राहत दे रही है, वहीं गलत तरीके से क्लेम करने वालों पर सख्ती भी बढ़ाने की तैयारी में है। ऐसे में नए नियमों को समझना आपके लिए बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि बाद में कोई दिक्कत न हो।
नए नियमों के तहत अब अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में रहने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत दी गई है। अब तक केवल दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को ही इस श्रेणी में रखा गया था जहां बेसिक सैलरी और DA का 50% तक HRA डिडक्शन मिलता था। अब इन चार नए शहरों के जुड़ने से यहां काम करने वाले लाखों कर्मचारियों की टैक्स फ्री इनकम बढ़ जाएगी और उनकी इन-हैंड सैलरी में इजाफा होगा। बाकी शहरों के लिए यह सीमा 40% पर ही बरकरार रहेगी।
Sudit K Parekh & Co. LLP की पार्टनर अनीता बसरूर कहती हैं, “अक्सर देखा गया है कि टैक्स बचाने के लिए लोग अपने माता-पिता या भाई-बहनों को किराया देने का दावा करते हैं। नए नियमों के अनुसार, अब फॉर्म 124 (जो पहले फॉर्म 12BB था) में आपको मकान मालिक के साथ अपने रिश्ते का खुलासा सही से करना होगा। सरकार यह जानना चाहती है कि रेंट का लेनदेन वास्तविक है या सिर्फ टैक्स बचाने का एक जरिया।”
अनीता आगे बताती हैं, “अब टैक्स देने वालों और किरायेदारों को साफ-साफ बताना होगा कि उनका मकान मालिक से क्या रिश्ता है। खासकर अगर किराया माता-पिता, भाई-बहन या किसी रिश्तेदार को दे रहे हैं, तो इसकी जानकारी देना जरूरी होगा। इसका मकसद ये देखना है कि रेंट का मामला असली है या नहीं। सरकार सही कटौती देना चाहती है, लेकिन साथ ही नियमों का सख्ती से पालन कराना और सिर्फ असली दावों को ही मंजूरी देना चाहती है।”
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अनीता के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से अगर आप साल भर में 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको अपने मकान मालिक का PAN देना जरूरी होगा। अगर मकान मालिक के पास PAN नहीं है, तो उनकी तरफ से एक डिक्लेरेशन देना होगा जिसमें उनका नाम और पूरा पता साफ-साफ लिखा हो। अगर आप ये जानकारी नहीं देंगे, तो आपको HRA पर मिलने वाली टैक्स छूट का फायदा नहीं मिल पाएगा।
अनीता कहती हैं कि नए नियमों के मुताबिक, अब सिर्फ किराए की रसीद जमा करना काफी नहीं होगा। नए नियमों के मुताबिक आपको यह भी साबित करना होगा कि आपने सच में किराया दिया है, इसके लिए बैंक स्टेटमेंट, ऑनलाइन पेमेंट या किसी और डिजिटल ट्रांजैक्शन का प्रूफ संभालकर रखना होगा। जरूरत पड़ने पर ये रिकॉर्ड दिखाने होंगे, वरना आपका HRA क्लेम अटक सकता है या खारिज भी हो सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत है कि टैक्स सिस्टम अब और अधिक पारदर्शी होने जा रहा है। कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने रेंट एग्रीमेंट और पेमेंट के तरीकों को अभी से व्यवस्थित कर लें ताकि नए फाइनेंशियल ईयर में उन्हें कोई परेशानी न हो।