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Income Tax: आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का नया सीजन शुरू हो चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए सरकार ने सभी जरूरी ITR फॉर्म पहले ही अधिसूचित कर दिए हैं। टैक्सपेयर्स को इस बार भी तय समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना जरूरी है, क्योंकि देर या गलत जानकारी देने पर जुर्माना और जांच दोनों का जोखिम बढ़ सकता है।
इस बार टैक्सपेयर्स के अलग-अलग वर्गों के लिए डेडलाइन अलग रखी गई है। वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनर्स और जिनके खातों का ऑडिट नहीं होता, उन्हें 31 जुलाई तक ITR फाइल करना होगा। ये लोग आमतौर पर ITR-1 और ITR-2 फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
छोटे कारोबारी और पेशेवरों के लिए ITR-3 और ITR-4 फॉर्म भरने की अंतिम तारीख 31 अगस्त तय की गई है। वहीं जिन टैक्सपेयर्स के खातों का ऑडिट जरूरी होता है, उनके लिए अंतिम तारीख 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 276 एक गंभीर कानूनी प्रावधान है, जो टैक्स से जुड़े दायित्वों का पालन न करने पर लागू होता है। यह कोई साधारण जुर्माने वाली धारा नहीं है, बल्कि एक आपराधिक प्रावधान है।
इस धारा के तहत उन मामलों में कार्रवाई हो सकती है जब कोई व्यक्ति सरकार को देय टैक्स, टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) का भुगतान नहीं करता या निर्धारित समय सीमा के भीतर रिटर्न और जरूरी विवरण जमा नहीं करता।
इस कानून के अनुसार दोषी पाए जाने पर कठोर कारावास (rigorous imprisonment) की सजा हो सकती है, जो 3 साल से 7 साल तक हो सकती है, साथ ही आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति यह साबित कर देता है कि भुगतान या फाइलिंग में देरी किसी उचित कारण से हुई थी, तो उसे इस सजा से राहत मिल सकती है।
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि ITR फाइलिंग अब केवल एक फॉर्म भरने की प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरी तरह डेटा-आधारित सिस्टम पर निर्भर है। ऐसे में छोटी सी गलती भी आयकर विभाग की जांच का कारण बन सकती है।
Ezeepay के MD और CMO रशीद अली के अनुसार, टैक्सपेयर्स अक्सर कुछ सामान्य गलतियां करते हैं, जिनमें आय को कम दिखाना, ब्याज या अन्य स्रोतों से मिली आय को न बताना, और Form 26AS या AIS से जानकारी का मिलान न करना शामिल है। उनके मुताबिक कई लोग गलत तरीके से डिडक्शन का दावा भी कर देते हैं, जो आगे चलकर नोटिस का कारण बन सकता है।
रशीद अली ने यह भी कहा कि कई बार टैक्सपेयर्स केवल पहले से भरी हुई जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं, जबकि उसे खुद से जांचना जरूरी होता है। सही दस्तावेजों के साथ पारदर्शिता बनाए रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।
Moneyfront के को-फाउंडर और CEO मोहित गंग ने बताया कि जानबूझकर टैक्स चोरी करने या गलत जानकारी देने के मामलों में सख्त कार्रवाई हो सकती है।
उन्होंने समझाया कि आय छिपाना या गलत जानकारी देना आयकर कानून की धारा 276 के तहत गंभीर अपराध माना जा सकता है। इसमें आय को कम दिखाना, फर्जी डिडक्शन लेना या जानबूझकर गलत रिटर्न दाखिल करना शामिल है।
मोहित गंग के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति समय पर ITR फाइल नहीं करता और उस पर टैक्स देयता अधिक होती है, तो उस पर भी कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि गलतियों की स्थिति में भारी जुर्माना और जांच की संभावना रहती है, जो 200 प्रतिशत तक पेनल्टी तक भी पहुंच सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ITR फाइल करने से पहले टैक्सपेयर्स को अपना AIS और Form 26AS जरूर चेक करना चाहिए। सभी आय स्रोतों को सही तरीके से दिखाना चाहिए और बिना प्रमाण के किसी भी छूट या डिडक्शन का दावा नहीं करना चाहिए।
अगर कोई गलती हो जाए तो समय पर ITR-U के जरिए सुधार करना बेहतर होता है, ताकि आगे किसी बड़ी परेशानी से बचा जा सके।