प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारतीय घरों में अक्सर पति अपनी कमाई का कुछ हिस्सा पत्नी के नाम पर निवेश कर देता है। सोच यही रहती है कि पैसा भी बढ़ेगा और शायद टैक्स भी कम देना पड़ेगा। कई लोग पत्नी के खाते से SIP शुरू कर देते हैं, यह मानकर कि उस पर होने वाली कमाई पत्नी की आय मानी जाएगी। लेकिन इनकम टैक्स के नियम इतने सीधे नहीं हैं। ‘क्लबिंग ऑफ इनकम’ नाम का एक प्रावधान ऐसे मामलों में तस्वीर बदल सकता है। अगर निवेश के लिए पैसा पति देता है, तो उससे होने वाली कमाई पर टैक्स भी उसी को देना पड़ सकता है। इसलिए पत्नी के नाम निवेश करने से पहले यह नियम समझना जरूरी है।
मान लीजिए कि आपने अपनी पत्नी के बैंक खाते में हर महीने 10,000 रुपये ट्रांसफर किए और उन्होंने उस पैसे से एक म्यूचुअल फंड SIP शुरू कर दी। साल के अंत में उस निवेश पर एक शानदार रिटर्न मिला। अब आप सोच रहे होंगे कि चूंकि निवेश पत्नी के नाम पर है, इसलिए यह रिटर्न उनकी आय मानी जाएगी और उनकी कोई और कमाई नहीं है, तो टैक्स जीरो होगा।
यहीं पर आप गलत साबित हो सकते हैं। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 64 के तहत ‘क्लबिंग’ का प्रावधान सक्रिय हो जाता है। अकाउंटिंग एनालिस्ट और टैक्स एक्सपर्ट सौरभ त्यागी कहते हैं कि जब एक पति अपनी पत्नी को निवेश के लिए पैसा देता है और बदले में कोई ‘उचित प्रतिफल’ (Adequate Consideration) नहीं लेता, तो उस निवेश से होने वाली पूरी कमाई पति की आय में जोड़ दी जाती है। यानी, म्यूचुअल फंड से मिलने वाला डिविडेंड या कैपिटल गेन पति की कुल आय का हिस्सा बनेगा और उस पर पति के टैक्स स्लैब (जैसे 20% या 30%) के हिसाब से टैक्स लगेगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि परिवार अपनी आय को कई हिस्सों में बांटकर (Income Splitting) कम टैक्स रेट का अनुचित लाभ न उठा सकें।
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अक्सर लोग इस नियम से बचने के लिए इसे ‘गिफ्ट’ (उपहार) का नाम दे देते हैं। कानूनन, पति अपनी पत्नी को कितना भी पैसा गिफ्ट के तौर पर दे सकता है। सेक्शन 56 के तहत, पति-पत्नी के बीच दिए गए गिफ्ट पर कोई ‘गिफ्ट टैक्स’ नहीं लगता। लेकिन यहां एक बारीक कानूनी पेंच है।
सौरभ त्यागी बताते हैं कि भले ही उस रकम को ट्रांसफर करते समय टैक्स न लगे, लेकिन जैसे ही उस ‘गिफ्टेड मनी’ को कहीं निवेश किया जाता है, क्लबिंग के नियम फिर से सामने आ जाते हैं। पत्नी उस गिफ्ट किए गए पैसे से SIP करती है, तो उससे होने वाला मुनाफा फिर से पति के खाते में ही टैक्स के लिए गिना जाएगा। यानी गिफ्ट देना तो टैक्स फ्री है, लेकिन उस गिफ्ट से ‘पैसा कमाना’ पति के लिए टैक्स देनदारी पैदा करता है।
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तो क्या इसका मतलब यह है कि पत्नी के नाम निवेश करना व्यर्थ है? बिल्कुल नहीं। त्यागी कुछ ऐसी रणनीतियां सुझाते हैं जिससे आप कानूनी दायरे में रहकर बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग कर सकते हैं:
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टैक्स चोरी और टैक्स प्लानिंग के बीच एक बहुत महीन रेखा होती है। अगर आप पत्नी की SIP इनकम को छिपाते हैं, तो यह टैक्स चोरी की श्रेणी में आ सकता है। त्यागी के मुताबिक, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय दो बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
त्यागी बताते हैं कि आजकल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) और Form 26AS के जरिए आपके हर छोटे-बड़े ट्रांजैक्शन पर नजर रखता है। इसलिए, आंकड़ों में हेरफेर करने के बजाय सही फॉर्म भरना और एक्सपर्ट की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। अगली बार जब आप पत्नी के नाम पर SIP शुरू करें, तो केवल रिटर्न ही नहीं, बल्कि टैक्स की इस ‘क्लबिंग’ वाली गणित को भी जरूर साथ रखें।