सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से फैल रहा है कि 1 अप्रैल 2026 से हर भारतीय नागरिक को विदेश यात्रा पर जाने से पहले इनकम टैक्स विभाग से इनकम टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट (ITCC) लेना जरूरी होगा। इस दावे ने लोगों के बीच भ्रम और चिंता दोनों बढ़ा दी है।
हालांकि सरकार ने इस वायरल जानकारी को पूरी तरह गलत बताया है।
दरअसल, यह दावा एक फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर के सोशल मीडिया वीडियो के बाद चर्चा में आया था, जिसमें कहा गया था कि अब हर तरह की विदेश यात्रा के लिए टैक्स क्लियरेंस अनिवार्य होगा, चाहे यात्रा एक दिन की हो या लंबे समय की। वीडियो के वायरल होते ही लोगों में असमंजस फैल गया।
इसके बाद सरकार की आधिकारिक संस्था पीआईबी फैक्ट चेक ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे भ्रामक बताया है। पीआईबी के मुताबिक इनकम टैक्स एक्ट की धारा 230 में ऐसा कोई नया बदलाव नहीं किया गया है, जो आम नागरिकों के लिए विदेश यात्रा से पहले टैक्स क्लियरेंस को जरूरी बनाता हो। यह नियम पहले से मौजूद है और 2003 से लागू है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता।
किन मामलों में जरूरी हो सकता है टैक्स क्लियरेंस?
सरकारी नियमों के अनुसार, इनकम टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट केवल कुछ खास परिस्थितियों में ही मांगा जा सकता है। जैसे अगर कोई व्यक्ति गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी या टैक्स अनियमितताओं की जांच के दायरे में है और उसका देश में रहना जरूरी माना गया हो।
इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति पर 10 लाख रुपये से अधिक का सीधा टैक्स बकाया है और उस पर किसी सक्षम प्राधिकारी की ओर से विदेश यात्रा पर रोक लगाई गई हो, तभी यह प्रमाण पत्र जरूरी हो सकता है।
सरकार ने साफ कहा है कि सामान्य नागरिकों की विदेश यात्रा पर इस तरह की कोई नई शर्त लागू नहीं की गई है।