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ITR Update 2026: सरकार ने जारी किए नए ITR फॉर्म्स, जानें किस टैक्सपेयर्स को क्या भरना जरूरी

सरकार ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नए ITR फॉर्म जारी कर दिए हैं। अब कम आय वालों और NRI को भी खास शर्तों पर रिटर्न भरना अनिवार्य होगा

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ऋषभ राज   
Last Updated- March 31, 2026 | 6:42 PM IST

नए वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों के लिए बड़ा अपडेट दे दिया है। असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए सभी ITR फॉर्म जारी कर दिए गए हैं, जिससे आने वाले फाइलिंग सीजन की तैयारी पूरी हो गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इनकम टैक्स रूल्स 1962 के तहत ITR-1 से लेकर ITR-7, ITR-U और ITR-V को नोटिफाई किया है। भले ही नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 एक अप्रैल 2026 से लागू होने वाला है, लेकिन इस बार टैक्सपेयर अभी भी पुराने कानून के अनुसार ही अपना रिटर्न भरेंगे। हालांकि, इसबार फॉर्म में कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं जो ज्यादा डिटेल जानकारी मांगते हैं, जिससे कई ऐसे लोग भी फाइलिंग के दायरे में आ सकते हैं जो अब तक इससे बाहर थे।

कौन सा फॉर्म किसके लिए?

फॉर्म का ढांचा पहले जैसा ही रखा गया है। ITR-1 (सहज) उन लोगों के लिए है जो भारत में रहते हैं और जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये तक है। इसमें सैलरी, घर से होने वाली कमाई और दूसरे सोर्स की इनकम शामिल होती है, साथ ही थोड़ा-बहुत कैपिटल गेन भी कवर होता है।

ITR-2 और ITR-3 उन लोगों के लिए होते हैं जिनकी कमाई थोड़ी अलग-अलग सोर्स से आती है और सीधी नहीं होती। जैसे अगर आपको शेयर या प्रॉपर्टी बेचने से फायदा (कैपिटल गेन) होता है या बिजनेस से इनकम आती है, तो इंडिविजुअल या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) ये फॉर्म भर सकते हैं।

ITR-4 (सुगम) छोटे बिजनेस वालों और प्रोफेशनल्स के लिए होता है, जो आसान तरीके यानी प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत टैक्स भरते हैं। वहीं ITR-5, ITR-6 और ITR-7 बड़ी संस्थाओं जैसे फर्म, कंपनियों और ट्रस्ट के लिए होते हैं। ITR-U का इस्तेमाल पुराने रिटर्न को 48 महीने के अंदर सुधारने या अपडेट करने के लिए किया जाता है, जबकि ITR-V सिर्फ इस बात की पुष्टि के लिए होता है कि आपने रिटर्न फाइल कर दिया है। नॉन-ऑडिट मामलों में रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है।

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नई डिस्क्लोजर से बढ़ेगा कंप्लायंस

अब फॉर्म भरते समय कुछ जानकारी पहले से ज्यादा साफ और विस्तार से देनी होगी। टैक्स एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कई लोग सोचते हैं कि उनकी आय टैक्स सीमा से कम है, इसलिए रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है। लेकिन अब कुछ शर्तें पूरी होने पर उन्हें रिटर्न भरना पड़ सकता है।

जैसे, भले ही आपकी आय नई व्यवस्था में 4 लाख या पुरानी में 2.5 लाख से कम हो, फिर भी अगर आपके PAN पर 25,000 रुपये से ज्यादा TDS कटा है, करंट अकाउंट में 1 करोड़ से ज्यादा जमा है, विदेश यात्रा पर 2 लाख से ज्यादा खर्च हुआ है या बिजली का बिल 1 लाख रुपये से ऊपर है, तो आपको रिटर्न फाइल करना पड़ सकता है।

ये शर्तें पहले भी थीं, लेकिन अब फॉर्म में इन्हें बेहतर तरीके से रिपोर्ट करने की व्यवस्था की गई है। इससे सैलरी पाने वाले, पेंशनभोगी या NRI भी इस नेट में आ सकते हैं।

मिस्ड फाइलर्स और NRI पर फोकस

ये बदलाव ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए हैं जो पहले रिटर्न नहीं भरते थे। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब टैक्स डिपार्टमेंट को बैंक या दूसरे स्रोतों से जानकारी मिलती है, तो बाद में ऐसे मामलों में पेनल्टी लग सकती है। खासकर NRI कई बार ऐसे केस में फंस जाते थे, जहां बड़े ट्रांजेक्शन होते थे लेकिन रिटर्न फाइल नहीं किया जाता था।

अब ITR-2, ITR-3 और ITR-4 में कुछ खास डिक्लेरेशन जोड़े गए हैं, जो एक तरह से चेकलिस्ट की तरह काम करेंगे। इससे टैक्सपेयर्स को खुद समझने में मदद मिलेगी कि उन्हें रिटर्न फाइल करना चाहिए या नहीं।

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अगर आप इन शर्तों में आते हैं, तो रिटर्न भरने से पहले अपने बैंक स्टेटमेंट, TDS डिटेल, विदेश यात्रा के खर्च और बड़े खर्चों को ध्यान से चेक कर लें, ताकि कोई इनकम छूट न जाए।

First Published : March 31, 2026 | 6:35 PM IST