प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत के लिए बेहद अहम होता है। इस फंड का एक बड़ा हिस्सा ‘लीव एनकैशमेंट’ यानी बची हुई छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे से आता है। सालों की मेहनत के बाद इकट्ठा हुई इन छुट्टियों का पैसा जब हाथ में आता है, तो बड़ी राहत मिलती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस रकम पर टैक्स कैसे लगता है? इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(10AA) के तहत रिटायरमेंट पर मिलने वाले लीव एनकैशमेंट पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप सरकारी कर्मचारी हैं या प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे पर टैक्स के क्या नियम हैं।
कई बार लोग नौकरी में रहते हुए ही अपनी बची हुई छुट्टियों को खत्म लेते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो ध्यान रखें कि इस रकम पर आपको कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी। नौकरी के दौरान मिला लीव एनकैशमेंट आपकी सैलरी का हिस्सा माना जाता है और इस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरा टैक्स कटता है। टैक्स राहत सिर्फ तभी मिलती है जब यह पैसा रिटायरमेंट, इस्तीफा देने या नौकरी छोड़ने के समय मिले।
अगर आप केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। सेक्शन 10(10AA)(i) के तहत सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय मिलने वाले लीव एनकैशमेंट पर पूरी टैक्स फ्री मिलती है। इसके लिए सरकार ने कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की है। यानी आपकी बची हुई छुट्टियों के बदले चाहे जितनी भी रकम मिले, उस पर एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होगा।
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प्राइवेट कंपनियों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) और अन्य गैर-सरकारी संगठनों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नियम थोड़े अलग हैं। सेक्शन 10(10AA)(ii) के तहत इन्हें पूरी छूट नहीं मिलती, बल्कि एक तय फॉर्मूले के तहत आंशिक छूट दी जाती है। टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए नीचे दिए गए चार आंकड़ों की तुलना की जाती है और इनमें से जो भी रकम सबसे कम होगी, सिर्फ उसी पर टैक्स छूट मिलेगी:
इन चारों में से जो भी राशि सबसे कम आएगी, उसे आपकी टैक्स-फ्री इनकम मान लिया जाएगा। इसके ऊपर की बची हुई रकम को आपकी सैलरी से होने वाली कमाई माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा।
प्रविधाओं में बदलाव करते हुए साल 2023 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने गैर-सरकारी कर्मचारियों को एक बड़ा तोहफा दिया था। 1 अप्रैल 2023 से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए लीव एनकैशमेंट पर टैक्स छूट की अधिकतम सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹25 लाख कर दिया गया।
इस फैसले से उन वरिष्ठ कर्मचारियों को बहुत फायदा हुआ है जो लंबे समय तक एक ही जगह काम करते हैं और जिनके खाते में काफी छुट्टियां बची रहती हैं। हालांकि, यहां यह याद रखना जरूरी है कि यह ₹25 लाख की सीमा आपके पूरे जीवनकाल के लिए है। अगर आपने पिछली किसी नौकरी को छोड़ते समय इस छूट का फायदा लिया था, तो बची हुई सीमा ही आपकी अगली नौकरी के रिटायरमेंट पर लागू होगी।
जब टैक्स छूट के कैलकुलेश के लिए आखिरी 10 महीने की औसत सैलरी निकाली जाती है, तो उसमें हर तरह के भत्ते शामिल नहीं होते। इस कैलकुलेशन के लिए ‘सैलरी’ में केवल ये तीन चीजें जोड़ी जाती हैं:
इनके अलावा मिलने वाले अन्य भत्तों और सुविधाओं को इस कैलकुलेशन में शामिल नहीं किया जाता है।
यदि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान या रिटायरमेंट के बाद मृत्यु हो जाती है, और लीव एनकैशमेंट का पैसा उनके कानूनी वारिस या परिवार के सदस्यों को मिलता है, तो उस पूरी रकम पर टैक्स से छूट मिलती है। सरकार ने यह नियम इसलिए बनाया है ताकि मुश्किल समय में परिवार पर टैक्स का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
अक्सर कंपनियां आपके फॉर्म 16 में लीव एनकैशमेंट की पूरी रकम को दिखा देती हैं। ऐसी स्थिति में, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय आपको खुद अपनी योग्य छूट की गणना करनी होगी और उसे क्लेम करना होगा। किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए अपने पास कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट हमेशा संभालकर रखें, जैसे: