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रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लीव एनकैशमेंट पर कितनी टैक्स छूट मिलेगी? जानें इसको लेकर क्या हैं नियम

बता दें कि रिटायरमेंट पर बची छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे (लीव एनकैशमेंट) पर टैक्स छूट के नियम, सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों के लिए अलग-अलग होते हैं

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अमित कुमार   
Last Updated- June 08, 2026 | 5:48 PM IST

नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत के लिए बेहद अहम होता है। इस फंड का एक बड़ा हिस्सा ‘लीव एनकैशमेंट’ यानी बची हुई छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे से आता है। सालों की मेहनत के बाद इकट्ठा हुई इन छुट्टियों का पैसा जब हाथ में आता है, तो बड़ी राहत मिलती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस रकम पर टैक्स कैसे लगता है? इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(10AA) के तहत रिटायरमेंट पर मिलने वाले लीव एनकैशमेंट पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप सरकारी कर्मचारी हैं या प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे पर टैक्स के क्या नियम हैं।

नौकरी के दौरान छुट्टियां भुनाईं तो लगेगा पूरा टैक्स

कई बार लोग नौकरी में रहते हुए ही अपनी बची हुई छुट्टियों को खत्म लेते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो ध्यान रखें कि इस रकम पर आपको कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी। नौकरी के दौरान मिला लीव एनकैशमेंट आपकी सैलरी का हिस्सा माना जाता है और इस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरा टैक्स कटता है। टैक्स राहत सिर्फ तभी मिलती है जब यह पैसा रिटायरमेंट, इस्तीफा देने या नौकरी छोड़ने के समय मिले।

सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘मौज’, कोई टैक्स नहीं

अगर आप केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। सेक्शन 10(10AA)(i) के तहत सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय मिलने वाले लीव एनकैशमेंट पर पूरी टैक्स फ्री मिलती है। इसके लिए सरकार ने कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की है। यानी आपकी बची हुई छुट्टियों के बदले चाहे जितनी भी रकम मिले, उस पर एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होगा।

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प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए क्या हैं नियम?

प्राइवेट कंपनियों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) और अन्य गैर-सरकारी संगठनों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नियम थोड़े अलग हैं। सेक्शन 10(10AA)(ii) के तहत इन्हें पूरी छूट नहीं मिलती, बल्कि एक तय फॉर्मूले के तहत आंशिक छूट दी जाती है। टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए नीचे दिए गए चार आंकड़ों की तुलना की जाती है और इनमें से जो भी रकम सबसे कम होगी, सिर्फ उसी पर टैक्स छूट मिलेगी:

  • वास्तव में मिला कुल लीव एनकैशमेंट।
  • आपकी बची हुई छुट्टियों के बदले बनने वाली रकम (ध्यान रहे कि इसमें हर साल अधिकतम 30 दिनों की छुट्टी को ही आधार माना जाता है)।
  • रिटायरमेंट से ठीक पहले के आखिरी 10 महीनों की औसत सैलरी के आधार पर 10 महीने की सैलरी।
  • ₹25 लाख की अधिकतम सीमा।

इन चारों में से जो भी राशि सबसे कम आएगी, उसे आपकी टैक्स-फ्री इनकम मान लिया जाएगा। इसके ऊपर की बची हुई रकम को आपकी सैलरी से होने वाली कमाई माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा।

₹25 लाख की लिमिट: प्राइवेट कर्मचारियों को बड़ी राहत

प्रविधाओं में बदलाव करते हुए साल 2023 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने गैर-सरकारी कर्मचारियों को एक बड़ा तोहफा दिया था। 1 अप्रैल 2023 से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए लीव एनकैशमेंट पर टैक्स छूट की अधिकतम सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹25 लाख कर दिया गया।

इस फैसले से उन वरिष्ठ कर्मचारियों को बहुत फायदा हुआ है जो लंबे समय तक एक ही जगह काम करते हैं और जिनके खाते में काफी छुट्टियां बची रहती हैं। हालांकि, यहां यह याद रखना जरूरी है कि यह ₹25 लाख की सीमा आपके पूरे जीवनकाल के लिए है। अगर आपने पिछली किसी नौकरी को छोड़ते समय इस छूट का फायदा लिया था, तो बची हुई सीमा ही आपकी अगली नौकरी के रिटायरमेंट पर लागू होगी।

कैलकुलेशन के लिए ‘सैलरी’ का क्या मतलब है?

जब टैक्स छूट के कैलकुलेश के लिए आखिरी 10 महीने की औसत सैलरी निकाली जाती है, तो उसमें हर तरह के भत्ते शामिल नहीं होते। इस कैलकुलेशन के लिए ‘सैलरी’ में केवल ये तीन चीजें जोड़ी जाती हैं:

  • बेसिक सैलरी (Basic Salary)
  • महंगाई भत्ता (Dearness Allowance): केवल वही हिस्सा जो रिटायरमेंट बेनिफिट्स के दायरे में आता हो।
  • कमीशन: अगर वह कर्मचारी द्वारा किए गए टर्नओवर के निश्चित प्रतिशत के रूप में मिलता हो।

इनके अलावा मिलने वाले अन्य भत्तों और सुविधाओं को इस कैलकुलेशन में शामिल नहीं किया जाता है।

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कानूनी वारिसों के लिए विशेष राहत

यदि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान या रिटायरमेंट के बाद मृत्यु हो जाती है, और लीव एनकैशमेंट का पैसा उनके कानूनी वारिस या परिवार के सदस्यों को मिलता है, तो उस पूरी रकम पर टैक्स से छूट मिलती है। सरकार ने यह नियम इसलिए बनाया है ताकि मुश्किल समय में परिवार पर टैक्स का अतिरिक्त बोझ न पड़े।

ITR फाइल करते समय कैसे करें क्लेम?

अक्सर कंपनियां आपके फॉर्म 16 में लीव एनकैशमेंट की पूरी रकम को दिखा देती हैं। ऐसी स्थिति में, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय आपको खुद अपनी योग्य छूट की गणना करनी होगी और उसे क्लेम करना होगा। किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए अपने पास कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट हमेशा संभालकर रखें, जैसे:

  • आपकी सर्विस का रिकॉर्ड।
  • बची हुई छुट्टियों का स्टेटमेंट (Leave Balance Statement)।
  • रिटायरमेंट से पहले के आखिरी 10 महीनों की सैलरी स्लिप।
  • कंपनी की तरफ से दिया गया लीव एनकैशमेंट कैलकुलेशन का पेपर।
First Published : June 8, 2026 | 5:41 PM IST