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Form 16 की छुट्टी! 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया ‘Form 130’, जानें ITR और टैक्स पर क्या होगा असर

नए फाइनेंशियल ईयर में ITR फाइल के लिए ‘फॉर्म 16’ की जगह नया 'फॉर्म 130' आएगा। यह डिजिटल फॉर्म सैलरी, पेंशन और टैक्स कटौती का पूरा हिसाब देकर टैक्स फाइलिंग को आसान बनाएगा

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ऋषभ राज   
Last Updated- March 30, 2026 | 3:24 PM IST

नए फाइनेंशियल ईयर में आपके टैक्स और ITR में बड़ा बदलाव आने वाला है। अब तक जिस Form 16 के सहारे आप अपना टैक्स समझते और ITR भरते थे, उसकी जगह नया Form 130 लेने वाला है। सुनने में ये सिर्फ नाम बदलने जैसा लग सकता है, लेकिन असल में ये टैक्स सिस्टम को ज्यादा साफ, डिजिटल और आसान बनाने की कोशिश है। अब आपको एक ऐसा डॉक्यूमेंट मिलेगा जिसमें सैलरी, कटौतियों और टैक्स की पूरी कहानी एक ही जगह समझ आ जाएगी। खास बात ये है कि सीनियर सिटीजन को भी इसमें शामिल किया गया है। यानी आने वाले समय में टैक्स भरना थोड़ा कम उलझा हुआ और ज्यादा समझ में आने वाला हो सकता है।

Form 130 क्या है और क्यों जरूरी?

फॉर्म 130 दरअसल TDS यानी टैक्स कटौती का सालाना सर्टिफिकेट होगा। पहले जहां सैलरी पाने वाले लोगों को फॉर्म 16 मिलता था, अब उसकी जगह उनका एम्प्लॉयर यही फॉर्म 130 देगा। वहीं जिन सीनियर सिटीजन की आमदनी पेंशन या ब्याज से होती है, उनके लिए ये फॉर्म संबंधित बैंक जारी करेंगे।

इस फॉर्म का मुख्य काम ये होगा कि आपकी सैलरी या पेंशन से कितना टैक्स काटा गया और वो सरकार के पास जमा भी हो गया। साथ ही ये सैलरी की पूरी डिटेल, छूट और कटौतियों का हिसाब भी इसमें रहेगा। इससे लोग अपनी इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करते समय TDS क्रेडिट आसानी से क्लेम कर पाएंगे।

यह डॉक्यूमेंट टैक्स कटौती का सबूत देने के साथ पूरी टैक्स डिटेल देगा।टैक्सपेयर्स को अब फाइलिंग में ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी और गलतियों के चांस कम होंगे।

Form 16 की जगह Form 130 क्यों आ रहा है?

पुराने नियमों के तहत फॉर्म 16 ही सैलरी वाले लोगों के लिए मुख्य TDS सर्टिफिकेट था। लेकिन अपडेटेड इनकम-टैक्स रूल्स 2026 के मुताबिक अब फॉर्म 130 उसकी जगह ले लेगा। मतलब फाइनेंशियल ईयर 2026-27 से सैलरीड टैक्सपेयर्स को फॉर्म 16 की बजाय फॉर्म 130 मिलेगा।

ये बदलाव सिर्फ नाम का नहीं है। नया फॉर्म ज्यादा डिटेल्ड और सिस्टम बेस्ड होगा, जिससे एम्प्लॉयर और टैक्स विभाग के बीच मैचिंग बेहतर हो सकेगी।

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Form 130 के तीन हिस्से और उनकी डिटेल

फॉर्म 130 को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है, जो इसे पहले से ज्यादा साफ और पूरा बनाते हैं:

  • पार्ट A: इसमें एम्प्लॉयर या बैंक की डिटेल और कर्मचारी या सीनियर सिटीजन की जानकारी होती है।
  • पार्ट B: यहां पेमेंट की गई इनकम, कटौती किए गए TDS और दूसरे जरूरी टैक्स डिटेल्स का सारांश रहता है।
  • पार्ट C: ये सबसे बड़ा हिस्सा है। इसमें टैक्सेबल इनकम की पूरी कैलकुलेशन दी जाती है।

पार्ट सी में दो अन्नेक्सर (Annexure) हैं:

  • अन्नेक्सर I: सैलरीड कर्मचारियों के लिए – इसमें सैलरी ब्रेकअप, एग्जेम्प्शन्स, डिडक्शन्स, टैक्स आदि।
  • अन्नेक्सर II: खास सीनियर सिटीजन के लिए – इसमें पेंशन और ब्याज से होने वाली आय की डिटेल रहेगी।

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कौन जारी करेगा और कैसे मिलेगा Form 130?

सैलरी वाले लोगों को उनका एम्प्लॉयर फॉर्म 130 देगा। जबकि पात्र सीनियर सिटीजन को संबंधित बैंक जारी करेगा। जब भी TDS काटा और जमा किया जाता है, तब ये सर्टिफिकेट देना जरूरी होगा।

ये फॉर्म पूरी तरह सिस्टम जनरेटेड होगा। इसे ट्रेसेज पोर्टल से डाउनलोड करना पड़ेगा। इसमें डिजिटल या मैनुअल सिग्नेचर हो सकता है, लेकिन बाहर से मैनुअली बनाना मुमकिन नहीं।

ध्यान दें कि फॉर्म 130 तभी जारी होगा जब एम्प्लॉयर ने तिमाही TDS स्टेटमेंट यानी फॉर्म 138 फाइल कर दिया हो।

जारी करने की आखिरी तारीख और गलतियों का क्या?

फॉर्म 130 जारी करने की आखिरी तारीख 15 जून तय की गई है। यानी जिस साल आपकी कमाई हुई और उस पर टैक्स कटा, उसके अगले फाइनेंशियल ईयर में 15 जून तक ये फॉर्म मिल जाना चाहिए। अगर इसमें कोई गलती रह जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। एम्प्लॉयर रिवाइज्ड TDS स्टेटमेंट फाइल करके इसे ठीक कर सकता है। इसके बाद अपडेटेड फॉर्म 130 दोबारा डाउनलोड करके आपको दे दिया जाएगा।

कई नौकरियां बदलने पर या डुप्लिकेट की जरूरत पड़े तो?

अगर साल के दौरान नौकरी बदल ली तो हर एम्प्लॉयर अलग-अलग फॉर्म 130 (पार्ट A और B) जारी करेगा। पार्ट सी को या तो हर एम्प्लॉयर दे सकता है या सिर्फ आखिरी वाला।

ऑरिजिनल फॉर्म खो जाए तो डुप्लिकेट जारी किया जा सकता है, लेकिन उस पर साफ-साफ लिखा होगा कि ये डुप्लिकेट है।

टैक्सपेयर्स के लिए क्या मतलब?

ITR फाइल करते समय फॉर्म 130 को अटैच करने की जरूरत नहीं है। बस इसे अपने रिकॉर्ड में रखें, क्योंकि वेरिफिकेशन के लिए काम आ सकता है।

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये नया सिस्टम टैक्स फाइलिंग को ज्यादा स्ट्रक्चर्ड और आसान बनाने की कोशिश है। सिस्टम जनरेटेड डेटा पर जोर बढ़ेगा, जिससे ITR और एम्प्लॉयर की फाइलिंग में मिसमैच कम होंगे।

First Published : March 30, 2026 | 3:24 PM IST