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Income Tax Act 2025 में बायबैक, डिविडेंड, और सैलरी कम्पोनेंट पर कैसे बदलेगी टैक्स देनदारी? समझें 7 बड़े बदलाव

नए कानून के जरिए इनकम टैक्स एक्ट में हुए स्ट्रक्चरल बदलावों की बात करें, तो इसमें सेक्शन और चैप्टर की संख्या काफी कम हुई है।

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आशुतोष ओझा   
Last Updated- April 02, 2026 | 11:58 AM IST

Income Tax Act 2025: वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही देश में नया इनकम टैक्स कानून लागू हो गया। 1 अप्रैल 2026 को 65 साल पुराना टैक्स कानून इनकम टैक्स एक्ट 1961 रिटायर हो गया। नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 ने इसकी जगह ले ली। नए कानून के जरिए इनकम टैक्स एक्ट में हुए स्ट्रक्चरल बदलावों की बात करें, तो इसमें सेक्शन और चैप्टर की संख्या काफी कम हुई है। सेक्शन की संख्या 819 से घटाकर 536 रह गई जबकि चैप्टर 47 की बजाय अब सिर्फ 23 हैं। इसके अलावा, रूल्स की संख्या भी 511 से घटाकर 333 कर दी गई है, जबकि फॉर्म भी अब 390 की बजाय 190 हो गए हैं।

सरकार का मानना है कि नए कानून से पारद​र्शिता बढ़ेगी, कम्प्लायंस का बोझ कम होगा और टैक्सपेयर्स को एक बेहतर, सुव्यवस्​थित और सरल टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया मिल सकेगी। यानी, अब आम आदमी को स्पेशलिस्ट की मदद कम लेनी होगी। हालांकि, यह जान लें कि 31 मार्च 2026 तक की इनकम पर टैक्स देनदारी पुराने कानून के तहत रहेगी। 1 अप्रैल 2026 से बाद की इनकम नये कानून के अंतर्गत आंकी जाएगी। पुराने कानून के तहत चल रहे असेसमेंट, अपील या कोई भी प्रोसीडिंग वैसे ही पुराने कानून से निपटेगी।

टैक्स एक्सपर्ट से समझिए- टैक्सपेयर्स पर कैसे होगा Income Tax Act का असर

टैक्स एक्सपर्ट CA (डॉ.) सुरेश सुराना का कहना है कि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 (ITA 2025), आयकर नियम 2026 और नए आयकर फॉर्म 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहे हैं। ये बदलाव भारत के डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में एक बड़ा सुधार माने जा रहे हैं। सरकार का मकसद टैक्स सिस्टम को आसान, स्पष्ट और व्यवस्थित बनाना है। हालांकि, सरकार ने इसे मौजूदा टैक्स पॉलिसी को बनाए रखना बताया है, लेकिन इसमें कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जिनका असर अलग-अलग कैटेगरी के टैक्सपेयर्स पर पड़ेगा। नए नियमों में कुछ प्रक्रियाएं आसान हुई हैं, तो कुछ मामलों में टैक्स बोझ भी बढ़ सकता है।

उनका कहना है कि इन सभी बदलावों का कुल मिलाकर मकसद टैक्स सिस्टम को सरल बनाना और भ्रम को कम करना है, लेकिन इनके व्यावहारिक प्रभाव को समझना हर टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी होगा। जानते हैं नए टैक्स कानून के कुछ बड़े बदलाव और टैक्सपेयर्स पर उनके असर के बारे में…

1. ‘टैक्स ईयर’ का नया कॉन्सेप्ट लागू

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘पिछला वर्ष’ और ‘आकलन वर्ष’ की पुरानी व्यवस्था को हटाकर एक ही ‘टैक्स ईयर’ लागू किया गया है। इसका मकसद रिटर्न फाइलिंग, एडवांस टैक्स और असेसमेंट से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही उलझनों को खत्म करना है, जिससे खासकर आम टैक्सपयेर्स के लिए प्रक्रिया आसान हो सके।

2. आसान रिटर्न फाइलिंग का दायरा बढ़ा

आयकर नियम, 2026 के अंतर्गत अब ज्यादा लोगों को सरल रिटर्न फॉर्म भरने की सुविधा मिलेगी। अब दो मकानों तक के मालिक भी ITR-1 या ITR-4 भर सकेंगे, जबकि पहले यह सीमा सिर्फ एक मकान तक थी। इसके अलावा, संशोधित (रिवाइज्ड) रिटर्न भरने की अंतिम तारीख भी बढ़ाकर संबंधित टैक्स ईयर के 31 मार्च तक कर दी गई है, जिससे टैक्सपेयर्स को अपनी गलतियां सुधारने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

3. बायबैक टैक्स में बड़ा बदलाव

1 अप्रैल 2026 से शेयर बायबैक पर टैक्स लगाने का तरीका बदल दिया गया है। पहले पूरी बायबैक राशि को डिविडेंड मानकर टैक्स लगाया जाता था, जबकि अब केवल वास्तविक लाभ (बायबैक कीमत में से खरीद कीमत घटाकर) पर टैक्स लगेगा। इसके साथ ही, कुछ मामलों में प्रमोटर शेयरधारकों पर 12% का अतिरिक्त सरचार्ज भी लगाया जाएगा।

4. सैलरी से जुड़ी सुविधाओं की टैक्स वैल्यू बढ़ी

आयकर नियम, 2026 के अतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं (परिक्विज़िट्स), जैसे कंपनी की ओर से दी गई कार आदि, के वैल्यूएशन के नियम और सीमा में बदलाव किया गया है। इससे इन सुविधाओं का टैक्स योग्य मूल्य बढ़ सकता है, यानी कर्मचारियों पर टैक्स बोझ बढ़ने की संभावना है।

5. भत्तों और टैक्स छूट की सीमा बढ़ी

नए नियमों के तहत कई टैक्स-फ्री भत्तों और छूट की लिमिट को बढ़ा दिया गया है। इसमें कर्मचारी लोन, भोजन सुविधा, गिफ्ट, बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल भत्ता के साथ-साथ HRA भी शामिल है, जिसमें अब ज्यादा महानगरों को शामिल किया गया है।

6. लोअर डिडक्शन सर्टिफिकेट (LDC) का दायरा बढ़ा

आयकर कानून, 2025 की धारा 395 के अंतर्गत LDC की सुविधा का विस्तार किया गया है। अब जिस व्यक्ति की आय पर TDS लागू होता है, वह कम दर पर या बिना टैक्स कटौती के लिए आवेदन कर सकता है। यह उसकी अनुमानित आय और टैक्स देनदारी के आधार पर तय होगा।

7. डिविडेंड आय पर ब्याज कटौती खत्म

पहले निवेशक डिविडेंड आय पर 20 फीसदी तक ब्याज खर्च की कटौती का लाभ ले सकते थे, लेकिन ITA 2025 में यह सुविधा हटा दी गई है। अब धारा 93(2) के अंतर्गत डिविडेंड या म्युचुअल फंड यूनिट से होने वाली आय के लिए किए गए किसी भी ब्याज खर्च पर कोई डिडक्शन नहीं मिलेगी। इसका असर खासतौर पर उन निवेशकों पर पड़ेगा जिन्होंने उधार लेकर निवेश किया है, क्योंकि अब उनकी “अन्य स्रोतों से आय” के तहत टैक्स योग्य आय बढ़ जाएगी।

Income Tax Act: मौजूदा स्लैब, दरें (60 वर्ष से कम के टैक्सपेयर्स के लिए)

ओल्ड टैक्स रिजीम

इनकम टैक्स स्लैब इनकम टैक्स रेट
Up to ₹ 2,50,000 Nil
₹ 2,50,001 – ₹ 5,00,000 5% (₹ 2,50,000 से ऊपर)
₹ 5,00,001 – ₹ 10,00,000 ₹ 12,500 + 20% (₹ 5,00,000 से ऊपर)
Above ₹ 10,00,000 ₹ 1,12,500 + 30% (₹ 10,00,000 से ऊपर)

न्यू टैक्स रिजीम

इनकम टैक्स स्लैब इनकम टैक्स रेट
Up to ₹ 4,00,000 Nil
₹ 4,00,001 – ₹ 8,00,000 5% (₹ 4,00,000 से ऊपर)
₹ 8,00,001 – ₹ 12,00,000 ₹ 20,000 + 10% (₹ 8,00,000 से ऊपर)
₹ 12,00,001 – ₹ 16,00,000 ₹ 60,000 + 15% (₹ 12,00,000 से ऊपर)
₹ 16,00,001 – ₹ 20,00,000 ₹ 1,20,000 + 20% (₹ 16,00,000 से ऊपर)
₹ 20,00,001 – ₹ 24,00,000 ₹ 2,00,000 + 25% (₹ 20,00,000 से ऊपर)
Above ₹ 24,00,000 ₹ 3,00,000 + 30% (₹ 24,00,000 से ऊपर)

(नोट: इनकम टैक्स स्लैब, रेट की जानकारी इनकम टैक्स की ऑफि​शियल वेबसाइट से ली गई है।)

First Published : April 1, 2026 | 6:08 PM IST