आपका पैसा

सावधान! कहीं आप भी तो नहीं फंस रहे अवैध बेटिंग ऐप्स के जाल में? नितिन कामथ ने दी चेतावनी

नितिन कामथ ने अवैध विदेशी सट्टेबाजी ऐप्स से आगाह किया है, जो UPI और सोशल मीडिया के जरिए भारतीयों को ठग रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसको लेकर सावधानी बेहद जरूरी है

Published by
अमित कुमार   
Last Updated- March 09, 2026 | 5:56 PM IST

जीरोधा के CEO नितिन कामथ ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि भारत में ऑफशोर बेटिंग और मनी-गेमिंग ऐप्स का धड़ल्ले से फैलाव हो रहा है। असल में, जब से सरकार ने कई रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया, तब से ये विदेशी ऐप्स तेजी से बढ़ रहे हैं। ये ऐप्स भारत के नियमों से बाहर रहते हुए UPI जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम का फायदा उठा रहे हैं।

यूजर्स को कैसे फंसाया जाता है

ये प्लेटफॉर्म्स सोशल मीडिया पर खूब प्रचार करते हैं। इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स और टेलीग्राम पर इन्फ्लुएंसर्स और पेड ऐड्स के जरिए लोगों को लुभाया जाता है। इसमें साइन-अप बहुत आसान होता है, बस मोबाइल नंबर डालो, OTP से वेरिफाई करो और बस हो गया।

फिर छोटी-छोटी रकम से शुरूआत करवा देते हैं, जैसे सिर्फ 300 रुपये का टॉप-अप। PhonePe, Google Pay या Paytm से पैसे डालना इतना आसान कि नए यूजर्स को लगता है कोई रिस्क नहीं। पैसे जमा होते ही ये अक्सर पूल में डालकर विदेशी बेटिंग ऑपरेटर्स तक पहुंच जाते हैं। क्रिकेट मैचों पर सट्टा, कैसीनो जैसी गेम्स या दूसरे ऑनलाइन जुआ खेलने का मौका मिल जाता है।

Also Read: क्या अब ‘डिजिटल फ्रॉड’ का डर होगा खत्म? RBI के नए नियम से कैसे बचेगी आपकी मेहनत की कमाई

पैसे निकालने में आती है मुसीबत

कामथ के मुताबिक, असली खतरा तब सामने आता है जब जीतने वाले पैसे निकालने की कोशिश करते हैं। कई यूजर्स शिकायत करते हैं कि विड्रॉल में दिक्कत होती है, पैसे नहीं मिलते या अकाउंट ब्लॉक हो जाते हैं। चूंकि ये ऑपरेटर्स भारत के बाहर बैठे हैं, इसलिए कानूनी मदद लेना मुश्किल हो जाता है। भारतीय रेगुलेटर्स या कोर्ट में केस लड़ना आसान नहीं।

UPI एक्सेस क्यों चिंता की बात

कामथ का कहना है कि इन ऐप्स को रोकने का सबसे आसान तरीका है पैसे भेजने-लाने को मुश्किल बनाना। अगर इनको UPI इस्तेमाल करने से रोका जाए और बैंक ऐसे संदिग्ध मर्चेंट अकाउंट्स को ब्लॉक करें, तो इनका कारोबार खुद-ब-खुद कम हो सकता है।

बता दें कि डिजिटल पेमेंट्स की सुविधा से रोजमर्रा के काम आसान हो गए हैं, लेकिन यही सुविधा अनरेगुलेटेड एक्टिविटीज में भी तेजी से एंट्री दे रही है। छोटी रकम और आसान साइन-अप से शुरू होने वाले ये प्लेटफॉर्म्स पहले तो एकदम सही लगते हैं, लेकिन एक बार पैसे भारत के रेगुलेटेड सिस्टम से बाहर चले जाएं, तो वापस लाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

First Published : March 9, 2026 | 5:56 PM IST