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रिटायरमेंट की नो टेंशन! PPF में निवेश कर ऐसे बनेगा ₹1 करोड़ का फंड और लाइफटाइम ₹60,000 की पेंशन

PPF में सही प्लानिंग से ₹1 करोड़ का फंड बनाना आसानी से मुमकिन है। 25 साल निवेश कर आप बिना टैक्स दिए लाइफटाइम 60,000 रुपये महीना पेंशन पा सकते हैं

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ऋषभ राज   
Last Updated- April 06, 2026 | 3:47 PM IST

अगर आप सोचते हैं कि छोटी-छोटी बचत से भी बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है, तो आप बिल्कुल सही हैं। पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी PPF ठीक ऐसा ही सुरक्षित और पावरफुल ऑप्शन है, जिसकी मदद से आप यह कर सकते हैं। ये सरकारी स्कीम है, जिसमें पैसा लगाने से न सिर्फ टैक्स बचता है बल्कि कंपाउंडिंग का कमाल देखने को मिलता है। 2026 में भी PPF का ब्याज दर 7.1 फीसदी सालाना है, जो पूरी तरह टैक्स-फ्री है।

अगर आप हर साल 1.5 लाख रुपये जमा करते हैं और यह 25 साल तक जमा करते हैं, तो 1 करोड़ रुपये से ऊपर का फंड तैयार हो सकता है। उसके बाद बिना मूलधन छुए हर महीने 60,000 रुपये से ज्यादा की पेंशन मिल सकती है। मार्केट के उतार-चढ़ाव से दूर, यह सरकारी स्कीम टैक्स बचाने और लंबी समय में अमीर बनने का सबसे सुरक्षित रास्ता है। आइए समझते हैं कि यह गणित असल में काम कैसे करता है।

PPF क्या है और इसके क्या-क्या फायदे हैं

PPF एक लंबी अवधि की बचत योजना है, जो भारत सरकार चलाती है। इसमें आप किसी भी पोस्ट ऑफिस या बैंक में अकाउंट खोल सकते हैं। न्यूनतम 500 रुपये से शुरू करके सालाना ज्यादा से ज्यादा 1.5 लाख रुपये तक जमा कर सकते हैं। वित्त वर्ष27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून में ब्याज दर 7.1 प्रतिशत सालाना तय है। ये ब्याज हर महीने आपके अकाउंट के न्यूनतम बैलेंस (5 तारीख से महीने के आखिरी दिन तक) पर कैलकुलेट होता है और साल के अंत में कंपाउंड हो जाता है।

सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका टैक्स फायदा है। PPF EEE कैटेगरी में आता है। इसका मतलब है कि जमा रकम, ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट तीनों पर कोई टैक्स नहीं लगता। ओल्ड टैक्स रिजीम में सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की जमा पर छूट मिल जाती है। साथ ही ये पूरी तरह सरकारी गारंटी वाली स्कीम है, यानि इसमें कोई मार्केट रिस्क नहीं है। 15 साल का लॉक-इन पीरियड है, लेकिन उसके बाद इसे 5-5 साल के ब्लॉक्स में बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि ये रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए काफी लोकप्रिय है।

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25 साल में ₹1 करोड़ का फंड कैसे तैयार होगा

PPF का जादू कंपाउंडिंग में छिपा है। अगर आप हर साल पूरे 1.5 लाख रुपये जमा करते हैं तो 15 साल बाद आपका कुल निवेश 22.5 लाख रुपये होता है, लेकिन ब्याज की वजह से अकाउंट बैलेंस करीब 40.68 लाख रुपये पहुंच जाता है। यानी ब्याज अकेला 18.18 लाख रुपये का हो जाता है।

अब अगर आप 15 साल के बाद अकाउंट बंद न करें बल्कि उसे बढ़ा लें तो फंड और तेजी से बढ़ता है। 20 साल (15+5) में कुल जमा 30 लाख रुपये हो जाता है और ब्याज जूटने के बाद बैलेंस लगभग 66.58 लाख रुपये हो जाता है। फिर एक और 5 साल एक्सटेंशन लेकर 25 साल पूरा करने पर कुल निवेश 37.5 लाख रुपये रहता है, लेकिन पूरा फंड 1.04 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाता है। मतलब ब्याज की रकम 65 लाख से ज्यादा हो जाती है।

इसके लिए बस एक बात याद रखने की जरूरत है कि हर फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में जल्दी जमा करें। उदाहरण के लिए अप्रैल के पहले 5 तारीख तक 1.5 लाख रुपये जमा कर दें तो पूरा महीना ब्याज मिलता है। अगर देर हो जाए तो उस महीने का ब्याज कम हो जाता है और लंबे समय में हजारों रुपये का नुकसान हो सकता है।

साल कुल निवेश (₹) कुल ब्याज (₹) कुल फंड (₹)
15 साल (मैच्योरिटी) ₹ 22,50,000 ₹ 18,18,209 ₹ 40,68,209
20 साल (पहला एक्सटेंशन) ₹ 30,00,000 ₹ 36,58,288 ₹ 66,58,288
25 साल (दूसरा एक्सटेंशन) ₹ 37,50,000 ₹ 65,58,015 ₹ 1,03,08,015

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लाइफटाइम पेंशन जैसी आय कैसे मिलेगी

25 साल बाद जब आपका फंड 1.04 करोड़ के करीब पहुंच जाए तो नई जमा बंद कर दें। अकाउंट को 5-5 साल के ब्लॉक्स में एक्सटेंड करते रहें। अब सिर्फ ब्याज पर नजर रखें। 7.1 फीसदी दर पर 1.04 करोड़ का सालाना ब्याज करीब 7.38 लाख रुपये बनता है। इसे 12 से भाग दें तो हर महीने लगभग 61,533 रुपये मिलते हैं।

खास बात ये है कि आप अपना मूलधन छुए बिना सिर्फ ब्याज से पैसे निकाल सकते हैं, यानी आपका असली पैसा सुरक्षित रहता है। एक्सटेंशन पीरियड में ये काम और भी आसान हो जाता है। इसी वजह से आपकी पेंशन लाइफटाइम चलती रह सकती है, बिना टैक्स दिए और बिना फंड कम किए।

हां, अगर कभी जरूरत पड़े तो थोड़ा बहुत मूलधन निकालने का विकल्प भी होता है, लेकिन सुरक्षित तरीका यही है कि पेंशन के लिए सिर्फ ब्याज पर भरोसा किया जाए। एक्सटेंशन लेने के लिए मैच्योरिटी के एक साल के अंदर फॉर्म H भरना जरूरी होता है। इस दौरान आप चाहें तो नई जमा जारी रख सकते हैं या सिर्फ पुराने पैसे को बढ़ने दें, दोनों के अपने फायदे हैं, लेकिन अगर आपका फोकस पेंशन पर है तो नई जमा रोकना ज्यादा सही माना जाता है।

PPF में सबसे बड़ा गेम टाइम का है, जितनी जल्दी शुरू करेंगे, कंपाउंडिंग उतना ज्यादा फायदा देगी। छोटी-छोटी चीजें जैसे समय पर पैसा डालना और एक्सटेंशन का सही इस्तेमाल करना, इसे सच में एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बना देते हैं। यही कारण है कि एक्सपर्ट्स इसे ‘रिटायरमेंट किलर’ स्कीम कहते हैं। यदि कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में नौकरी शुरू करते ही PPF में अधिकतम निवेश शुरू कर दे, तो 50 साल की उम्र तक वह आर्थिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र हो सकता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो शेयर बाजार का जोखिम नहीं उठाना चाहते और एक तय रिटर्न के साथ अपनी ओल्ड एज सुरक्षित करना चाहते हैं।

First Published : April 6, 2026 | 3:47 PM IST