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Joint Tax Filing: पति-पत्नी की कमाई पर लगे ज्वाइंट टैक्स, संसद में आए सुझाव पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय

Raghav Chadha के संयुक्त टैक्स फाइलिंग प्रस्ताव से मिडिल क्लास को राहत मिल सकती है, हालांकि एक्सपर्ट ने इसके लागू होने में चुनौतियां भी बताईं।

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मानसी वार्ष्णेय   
Last Updated- March 18, 2026 | 4:27 PM IST

Joint Tax Filing: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने संसद में आम नागरिकों से जुड़े आर्थिक मुद्दों को उठाते हुए कई महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव रखा। अपने संबोधन में उन्होंने कर व्यवस्था, पेंशन और बैंकिंग से जुड़ी तीन प्रमुख समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया और इनके समाधान भी सुझाए।

16 मार्च को संसद में बोलते हुए Raghav Chadha ने कहा कि विवाहित दंपतियों के लिए संयुक्त आयकर रिटर्न दाखिल करने की व्यवस्था असमानता को कम करने में मदद कर सकती है। उनका तर्क था कि जिन परिवारों में पति-पत्नी की आय बराबर नहीं होती, उन्हें मौजूदा सिस्टम में अनुचित रूप से अधिक टैक्स देना पड़ता है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो समान कुल आय वाले परिवारों को, भले ही आय का बंटवारा अलग-अलग हो, लगभग समान टैक्स लाभ मिल सकता है। इससे आम परिवारों की रोजमर्रा की आर्थिक चिंताएं भी कम हो सकती हैं।

संयुक्त टैक्स फाइलिंग से क्या होगा फायदा

Raghav Chadha ने अपने भाषण में कहा कि मौजूदा कर व्यवस्था में एक ही परिवार के लोगों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में देखा जाता है, जिससे कई बार असमानता पैदा होती है। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि अगर पति-पत्नी दोनों की आय 10-10 लाख रुपये है तो दोनों को अलग-अलग कर छूट मिलती है और कुल मिलाकर टैक्स शून्य हो सकता है।

लेकिन यदि किसी परिवार में एक ही व्यक्ति 20 लाख रुपये कमाता है और दूसरा कोई आय नहीं करता, तो उस परिवार को लगभग 1.92 लाख रुपये का टैक्स देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह अंतर केवल आय के वितरण का है, जबकि कुल आय दोनों मामलों में समान है।

असमानता को दूर करने का प्रस्ताव

उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी आईटी प्रोफेशनल की आय 18 लाख रुपये है और उसकी पत्नी की आय 6 लाख रुपये है, तो वर्तमान व्यवस्था में पति को लगभग 1.5 लाख रुपये का टैक्स देना पड़ता है, जबकि पत्नी को नहीं। लेकिन यदि संयुक्त फाइलिंग लागू हो जाए, तो दोनों की कुल आय को एक साथ जोड़कर टैक्स की गणना की जा सकती है, जिससे कर भार कम हो सकता है।

उनका कहना है कि संयुक्त आयकर प्रणाली लागू होने से पति-पत्नी को एक आर्थिक इकाई के रूप में देखा जाएगा। इससे कम आय वाले जीवनसाथी की छूट का लाभ दूसरे को मिल सकेगा और कर प्रणाली अधिक न्यायसंगत बनेगी।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण भी दिए

Raghav Chadha ने बताया कि फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे कई विकसित देशों में विवाहित दंपतियों के लिए संयुक्त टैक्स फाइलिंग की व्यवस्था पहले से लागू है। उनका मानना है कि भारत में भी इस तरह की व्यवस्था लागू करने से खासकर एकल आय वाले परिवारों को राहत मिलेगी।

कर व्यवस्था पर उठाया बड़ा सवाल

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हिंदू अविभाजित परिवार और साझेदारी जैसी संस्थाओं को कर इकाई के रूप में मान्यता दी जाती है, लेकिन पति-पत्नी के छोटे परिवार को यह दर्जा नहीं दिया जाता। यह स्थिति सुधार की मांग करती है।

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आम लोगों की परेशानियों पर फोकस

अपने भाषण में उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान देना है ताकि व्यवस्था अधिक न्यायपूर्ण और मानवीय बन सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के सुधार आम परिवारों के आर्थिक बोझ को कम कर सकते हैं और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं।

संयुक्त आयकर फाइलिंग पर एक्सपर्ट ने बताए फायदे और चुनौतियां

आम आदमी पार्टी के सांसद Raghav Chadha के सुझाव के बाद अब वित्तीय विशेषज्ञ भी इस पर अपनी राय दे रहे हैं।

MoneyFront के सीईओ Mohit Gang ने इस प्रस्ताव के संभावित लाभ और इसके क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को विस्तार से समझाया है।

टैक्स बोझ में कमी की संभावना

Mohit Gang के अनुसार, संयुक्त आयकर फाइलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एकल आय वाले परिवारों का टैक्स बोझ कम हो सकता है। वर्तमान व्यवस्था में जहां एक व्यक्ति पर पूरा टैक्स भार आता है, वहीं संयुक्त फाइलिंग में दोनों की आय को मिलाकर गणना करने से टैक्स देनदारी घट सकती है।

वैकल्पिक व्यवस्था होगी

Gang ने स्पष्ट किया कि यह प्रणाली अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक हो सकती है। यानी दंपति अपनी सुविधा के अनुसार व्यक्तिगत या संयुक्त, दोनों में से किसी एक विकल्प को चुन सकेंगे। इससे लोगों को अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी।

मध्यम वर्ग को मिल सकती है राहत

यह प्रस्ताव खासतौर पर मध्यम वर्ग के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। Mohit Gang का कहना है कि यदि परिवार को एक इकाई के रूप में टैक्स में देखा जाए, तो इससे कर प्रणाली अधिक संतुलित और न्यायपूर्ण बन सकती है। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी जहां आय का वितरण असमान है।

किन परिवारों को ज्यादा लाभ

विशेषज्ञ के मुताबिक, यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन परिवारों के लिए अधिक उपयोगी होगी जिनकी कुल संयुक्त आय 24 लाख रुपये तक है। खासकर ऐसे परिवार जहां एक ही व्यक्ति कमाता है या एक की आय बहुत अधिक और दूसरे की कम है, उन्हें इसका अधिक लाभ मिल सकता है।

टैक्स फाइलिंग बढ़ेगी और विवाद घटेंगे

Mohit Gang ने यह भी कहा कि संयुक्त फाइलिंग से सेकेंडरी अर्नर, जो अक्सर महिलाओं के रूप में होती हैं, उनकी टैक्स फाइलिंग में भागीदारी बढ़ सकती है। चूंकि रिटर्न संयुक्त रूप से दाखिल होगा, इससे टैक्स चोरी की संभावना कम होगी और कानूनी विवाद भी घट सकते हैं।

क्या भारत में लागू करना आसान है

हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करना आसान नहीं माना जा रहा है। Mohit Gang के अनुसार, इसके लिए सरकार को आयकर प्रणाली में बड़े बदलाव करने होंगे।

टैक्स सॉफ्टवेयर को अपडेट करना होगा, नए टैक्स स्लैब तय करने होंगे और छूट व कटौतियों के नियमों को फिर से परिभाषित करना होगा। साथ ही व्यक्तिगत कर प्रणाली से पारिवारिक कर प्रणाली में बदलाव एक जटिल प्रक्रिया होगी, जिसे सावधानीपूर्वक लागू करना होगा।

उन्होंने यह भी बताया कि United States, United Kingdom, Germany और France जैसे देशों में संयुक्त टैक्स फाइलिंग पहले से लागू है। वहां इस व्यवस्था ने कर प्रणाली को अधिक संतुलित बनाने में मदद की है।

First Published : March 18, 2026 | 4:27 PM IST